रिसर्च पेपर पब्लिकेशन में अनैतिक कार्य करने के आरोप में पीजीआई ने संस्थान के चार डाक्टरों को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है। इनमें दो डाक्टर विभागाध्यक्ष हैं, बाकी दो सीनियर डाक्टर हैं। यह पहली बार है जब रिसर्च पेपर में गड़बड़ी के मामले में संस्थान ने एक साथ चार डाक्टर को नोटिस थमाया गया हो।
जिन डाक्टरों को नोटिस दिया गया है, उनमें फार्माकोलाजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर व एचओडी एक चक्रवर्ती, पैरासिटोलाजी डिपार्टमेंट के एचओडी व प्रोफेसर आर सहगल, इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर पिनाकी दत्ता और यूरोलाजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर एस कुमार शामिल हैं। पीजीआई के कुछ डाक्टरों का कहना है कि आरोपों से घिरे दो डाक्टरों को धोखे से फंसाया गया है। वे रिसर्च वर्क में काफी अच्छा काम कर रहे थे।
गवर्निंग बाडी ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे
रिसर्च पेपर पब्लिकेशन में गड़बड़ी मिलने के बाद पीजीआई इस मुद्दे को गवर्निंग बाडी में लेकर गई थी। गवर्निंगबाडी में पीजीआई डायरेक्टर को निर्देश दिए गए थे कि वे आरोपी डाक्टरों के खिलाफ डिपार्टमेंटल कार्रवाई करें। उसके बाद पीजीआई ने डाक्टरों को नोटिस जारी किए गए हैं। पीजीआई को आरोपी डाक्टरों को शिकायत कुछ मीडिया रिपोर्ट और फैकल्टी से मिली थी। उसके बाद मामला एथिक्स कमेटी में गया। एथिक्स कमेटी ने दावा किया उसने अपनी जांच सभी आरोप सही पाए हैं।
आरोप सही पाए गए तो सख्त कार्रवाई हो सकती है
पीजीआई के अधिकारियों ने बताया कि यदि डाक्टरों पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो सर्विस रूल्स के मुताबिक उन पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। हालांकि कार्रवाई से पहले डाक्टरों को अपने पक्ष में दलीलें देने का पूरा वक्त दिया जाएगा। उसके बाद ही कोई फैसला होगा।