स्थानीय तहसील कांप्लेक्स में छत्ता टूटने से भड़की मधुमक्खियों ने 12 लोगों को अपना शिकार बना लिया। मक्खियों के हमले के कारण तहसील कांप्लेक्स के बाहर भगदड़ मच गई। घायलों में बच्चें व महिलाएं शामिल हैं।
हमला इतना भयावह था कि लोग स्कूटर, मोटरसाइकिल रास्ते पर छोड़ मदद के लिए चिल्लाने लगे तो कई तड़पते हुए अस्पताल पहुंच गए। घायलों के शरीर से चिपकी हुई मधुमक्खियां प्राइवेट व सरकारी अस्पताल के स्टाफ ने जब तक हटाई तब तक वह डंग मार चुकी थीं। गनीमत रही कि बुधवार को अवकाश था और स्कूल व सरकारी कार्यालय बंद होने के कारण भीड़भाड़ कम थी।
तहसील रोड पर तहसील कांप्लेक्स के पास पीपल के पेड़ पर लगा मधुमक्खियों का छत्ता टूट गया। इससे भड़की मधुमक्खियों ने आसपास के लोगों पर हमला कर दिया। इस दौरान पैदल, दोपहिया वाहन व आसपास दुकानदारों समेत कोई भी उनके प्रकोप से बच नहीं सका। प्रत्यक्षदर्शी गुरमीत सिंह के अनुसार छत्ते से उड़ा मधुमक्खियों का हुजूम मंडराते हुए इस तरह सामने आया कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग स्कूटर व बाइक से गिर गए और मदद के लिए इधर-उधर भागे। कपड़ों में हाथ मुंह छिपाने की भरसक कोशिश की, लेकिन दर्जनों मधुमक्खियों ने उन्हें काट लिया।
दुकानदारों ने आग व धुआं कर मधुमक्खियां को भगाने की कोशिश की। इस दौरान पैदल जा रही बुजुर्ग दर्शना देवी, बाइक पर जा रहा फतेहपुर का विश्वप्रीत और देवीचंद भी मधुमक्खियों के हमले का शिकार हुए। यह लोग मौके पर मदद को दर्द से चीखते रहे, लेकिन बचाने वाला कोई नहीं था। मंडराती मक्खियों के गुजरने के बाद घायलों ने एक दूसरे पर चिपकी मक्खियां को हटाने में मदद की। चार लोग तो तड़पते हुए खुद ब खुद अस्पताल पहुंच गए, जबकि दर्शना देवी को एक ऑटो चालक ने अस्पताल पहुंचाया।
मधुमक्खियों के ज्यादातर डंक अस्पताल स्टाफ ने निकाले। कई घायलों को ग्लूकोज चढ़ाना पड़ा तो कइयों को इलाज में गोलियों संग इंजेक्शन भी दिए गए। लोगों ने नगर परिषद से मांग की है कि सार्वजनिक और सड़कों के आसपास लगे मक्खियों के छत्तों से निजात दिलाई जाए अन्यथा कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
ऐसी विपदा से निपटने के लिए प्रशासन के पास नही कोई प्रबंध
मधुमक्खियों के हमले काफी देर तक जारी रहा। इस दौरान लोगों को कुछ नहीं सूझा की वह क्या करें। जो लोग मधुमक्खियों की चपेट में नहीं आए। वह हमले का शिकार लोगों को बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को फोन करते रहे, लेकिन प्रशासन के पास ऐसी आपदा से निपटने का कोई प्रबंध नहीं होने के कारण वह लाचार रहे। लोगों ने अपने स्तर पर काफी यत्न किए।