पंजाब में साल 2008-09 में हुई मेडिकल अफसर भर्ती में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं।
जांच में पाया गया कि रसूखदारों को मेडिकल अफसर बनाने के लिए न केवल मेरिट को दरकिनार किया गया, बल्कि नियम भी मनमाने ढंग से बदल दिए। कुछ अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में 98 फीसदी तक अंक दे दिए गए। इंटरव्यू के दिन भी पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) के सदस्य अभ्यर्थियों से फोन पर बात करते रहे। इतना ही नहीं, पीपीएससी के सदस्यों के खाते में मोटी रकम भी जमा हुई।
इसी रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ब्यूरो ने पीपीएससी के पूर्व चेयरमैन और पांच सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस मामले में गिरफ्तार पीपीएससी सदस्य रहे पूर्व विधायक डॉ. सतवंत सिंह मोही के खिलाफ भी कई सबूत मिले हैं।
यह भी पढ़ें: पंजाब कांग्रेस में रार: प्रताप बाजवा के 78 से 18 पर लाने के बयान पर भड़के नवजोत सिद्धू, सोशल मीडिया पर पलटवार
भर्ती होने वाले चिकित्सक भी रडार पर
मामला दर्ज होने के बाद विजिलेंस ब्यूरो की रडार पर वे चिकित्सक भी हैं, जिन्हें नियमों को ताक पर रखकर भर्ती किया गया। उन्होंने खुद या उनके परिजनों ने पीपीएससी सदस्यों के साथ टेलीफोन पर बातें की थीं। खास बात है कि जिस दिन साक्षात्कार था, उस दिन भी फोन पर बातें की गईं। एसआईटी की जांच कहती है कि कैसे साक्षात्कार मानदंड को मनमाने ढंग से बदल दिया गया था।
रिपोर्ट में पीपीएससी सदस्य सतवंत सिंह मोही की मिलीभगत की भी बात कही गई है। भर्ती प्रक्रिया में यह पाया गया कि उसने 27 अभ्यर्थियों को 80-98 प्रतिशत अंक दिए। अंक उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं हैं। मोही तो आवेदनकर्ता या उसके पारिवारिक सदस्यों के साथ फोन पर पहले संपर्क में थे। अन्य 16 उम्मीदवार जिनका अन्य बोर्ड सदस्यों द्वारा साक्षात्कार लिया गया था, वे मोही के संपर्क में थे। एसआईटी की ओर से कॉल विवरण भी जांच का हिस्सा बनी है।
हालांकि, जांच टीम किसी भी उम्मीदवार या उनके परिजनों के बैंक लेनदेन और रिश्वत के भुगतान के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं कर पाई है। लेकिन प्रासंगिक अवधि के दौरान विभिन्न चल और अचल संपत्तियों में भारी निवेश के अलावा एसएस मोही और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में बड़ी संख्या में नकद जमा का पता चला है। वह इस अवधि में अर्जित आर्थिक संसाधनों और संपत्ति के बारे में संतोषजनक ढंग से नहीं बता सके।