पीजीआई के रेडियोडाइग्नोसिस डिपार्टमेंट में बड़ा हादसा होने से बच गया। करीब सवा 12 बजे जब एक पेशेंट का एमआरआई हो रहा था। तभी पास में एक अटेंडेंट पल्स ऑक्टोमीटर को लेकर जा रहा था।
जैसे ही वह एमआरआई मशीन के सामने पहुंचा तो मशीन ने अटेंडेंट सहित पल्स ऑक्टोमीटर को अपनी ओर खींच लिया। मशीन बड़ी होने के कारण वह अंदर घुसते ही फंस गई।
यह दृश्य देखकर वहां पर खड़े कर्मचारियों ने शोर मचा दिया। इससे आसपास खड़े डॉक्टर व अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तुरंत एमआरआई मशीन को बंद कर पहले पल्स ऑक्टोमीटर को बाहर निकाला और फिर पेशेंट को।
गनीमत रही कि नुकसान नहीं हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि एमआरआई की मशीन में मैग्नेट होता है। इससे वह लोहे की चीजों को अपनी ओर खींच लेता है।
एमआरआई मशीन के कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरे करीब डेढ़ साल से खराब हैं। यदि सीसीटीवी कैमरे ठीक होते तो पता चल जाता कि मशीन के आसपास कौन सी मशीने जा रही हैं। कर्मचारियों को पता ही नहीं चला कि एमआरआई मशीन के पास पल्स आक्टोमीटर मशीन है।
टाटा अस्पताल में हो चुका है हादसा
कुछ साल पहले टाटा हास्पिटल में ऐसा हादसा हुआ था। एक अटेंडेंट सिलेंडर लेकर जा रहा था। तभी एमआरआई मशीन ने उसे खींच लिया था। इस घटना में दो लोग घायल हुए थे।
हादसे के वक्त एचओडी राउंड पर
जब यह हादसा हुआ उस वक्त हेड आफ डिपार्टमेंट डा. एनके खंडेलवाल राउंड पर थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई छोटी मशीन होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। गनीमत रही कि पल्स आक्टोमीटर मशीन अंदर घुसते ही फंस गई।