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कोटेक महिंद्रा और प्रबंधक के खिलाफ अवमानना याचिका दायर

Sat, 14 Jan 2017 03:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोर्ट - फोटो : file photo
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बैंक से लोन पर ली गई कार बिना लीगल नोटिस और बिना किसी आदेश के उठाकर ले जाने पर पीड़ित ने कोटेक महिंद्रा प्राइमा लिमिटेड और इसके मैनेजर के खिलाफ जिला अदालत में अवमानना याचिका दायर की है। 
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अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर 18 जनवरी को जवाब दाखिल करने को कहा है। एडवोकेट गगन अग्रवाल ने याचिकाकर्ता सेक्टर-45सी निवासी ललित कुमार की ओर से दायर अवमानना याचिका में कहा है कि याची ने जून 2014 को कोटेक महिंद्रा प्राइमा लिमिटेड से कार के लिए 2.82 लाख रुपये का लोन लिया था।

इसकी अदायगी कुल 48 किस्तों में करनी थी। प्रति मंथ वह 6583 रुपये की किस्त दे रहे थे और 24 किस्त वह दे चुके थे, लेकिन इसके बाद वह किन्हीं कारणों से चार किस्त नहीं चुका सके।
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इस पर कोटेक महिंद्रा की ओर से जून 2016 में जिला अदालत में आर्बिट्रेटर नियुक्त करने के लिए याचिका दाखिल की गई। 16 अगस्त को उनकी ओर से याचिका वापस ले ली गई। 

इसके बाद 12 नवंबर 2016 को कोटेक की ओर से कुछ कर्मचारी उनके घर पहुंचे और बिना किसी नोटिस और कोर्ट आदेश के उनकी कार उठाकर ले गए।
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बिना लीगल नोटिस कार ले जाने का आरोप

कोर्ट - फोटो : demo photo
इस पर याचिकाकर्ता ने 8 दिसंबर को सेक्शन 34 के तहत आर्बिट्रेटर के आदेश को अदालत में चुनौती दी। उनका कहना था कि कार उठाने से पहले आर्बिट्रेटर नियुक्त किया जाता है। 

इसकी लिखित में जानकारी दी जाती है जो उन्हें नहीं दी गई। इसके बाद नोटिस दिए जाते हैं और कार लेने से पहले भी नोटिस दिया जाता है। जबकि, उन्हें इस संबंध में कोई भी नोटिस नहीं मिला।

वहीं बाद में आर्बिट्रेटर की ओर से कार ले जाने संबंधी आदेश को दिखाया गया, जिसमें शेवरले की स्पार्क कार ले जाने के आदेश थे, जबकि उनके पास ऑल्टो के-10 है।

नोटिस पर 20 दिसंबर को जवाब दाखिल करने के आदेश देने के बावजूद प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इस पर 23 दिसंबर को अदालत ने याचिकाकर्ता को चारों किस्तें जमा कराने और एक गारंटर पेश करने के आदेश दिए।

इसके बाद याचिकाकर्ता कोटेक के आफिस में कई बार किस्त जमा कराने गया, लेकिन उन्होंने किस्त स्वीकार नहीं की। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से कोटेक महिंद्रा और उनके मैनेजर अमित असवाल के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गई। 

याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की है कि कोर्ट के आदेश की पालना न करने पर प्रतिवादी पक्ष के खिलाफ अवमानना की प्रकिया शुरू की जाए। अदालत ने इस पर प्रतिवादी पक्ष को 18 जनवरी को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। 
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