पीयू के एल्युमिनी और मशहूर गीतकार इरशाद कामिल ने कहा कि पीयू से ढेर सारा प्यार समेट कर ले जाता हूं। मुंबई जाकर उसे आकार देता हूं और वह प्रेम गीत या नज्म का रूप ले लेता है। फिर वापस इसे आपको लौटा देता हूं।
इरशाद पीयू के गोल्डन जुबली हॉल में आयोजित दिल की बात इरशाद के साथ कार्यक्रम में स्टूडेंट्स से बात कर रहे थे। इरशाद ने कहा कि आज भी ऐसा लगता है जैसे वह यहीं के स्टूडेंट हैं।
यहां के पेड़ों, हरी घास, स्टूडेंट सेंटर और गांधी भवन के पास मिलने वाली शांति को याद करता हूं। इरशाद ने पहले पीयू से हिंदी में एमए की। इसकेबाद 1996 में पीएचडी की डिग्री ली।
लिखने का सबसे आसान विषय रूमानियत
युवाओं को लेखन के टिप्स देते हुए इरशाद ने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं की जो आप लिखें वह कहीं पब्लिश हो जाए। आप लिखने की शुरुआत तो कीजिए। लिखने का सबसे आसान विषय रूमानियत है। प्यार पर लिखिए।
इरशाद ने अपनी नई किताब 31 नज्म में से कुछ प्यारी नज्में पढ़कर भी सुनाई। उन्होंने कहा कि यह बुक रूमानियम को समेटे हुए है।
शिक्षक ने जमकर की तारीफ
इस कार्यक्रम में स्टूडेंट्स केसाथ इरशाद के कई शिक्षक भी मौजूद थे। एमए में इरशाद को पढ़ा चुकीं नीरजा सूद ने बताया कि आज खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। गर्व है कि मुझे इरशाद को पढ़ाने का मौका मिला। इरशाद बड़ा सौम्य स्टूडेंट था। उसकी लेखनी रचनात्मकता से भरी होती थी। सेलेब्रिटी बनने केबाद भी वह आम आदमी की तरह उपलब्ध हो जाते हैं।