लंग कैंसर की कीमोथैरेपी के बाद टीबी होने के संकेत मिले हैं। पीजीआई की स्टडी में खुलासा हुआ है कि कीमोथैरेपी से मरीज का इम्युन सिस्टम काफी कमजोर होता है।
इससे मरीजों में संक्रमण होने के चांस बढ़ते हैं। इसमें टीबी का एक भी एक संक्रमण शामिल है। हालांकि यह आंकड़ा काफी कम है, लेकिन फिर भी टीबी के लक्षणों से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह स्टडी नार्थ इंडिया इंस्टीट्यूट में आने वाले लंग कैंसर के मरीजों पर आधारित है। स्टडी पीजीआई के प्लूम्यनरी विभाग की ओर से की गई है।
दूसरी तरफ कैंसर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कीमोथैरेपी के बाद शरीर काफी कमजोर हो जाता है। इस पर खान-पान में ज्यादा ध्यान रखना होगा।
पीजीआई की रिसर्च के मुताबिक पिछले साढ़े तीन साल के लंग कैंसर के मरीजों का डाटा एकत्र किया गया। इन मरीजों पर स्टडी की गई तो पाया गया कि लंग कैंसर के 662 मरीजों में 0.9 प्रतिशत मरीजों में टीबी के लक्षण विकसित होने के सुबूत मिले।
स्टडी के मुताबिक लंग कैंसर के एक हजार मरीजों की कीमोथैरेपी के बाद 2.59 प्रतिशत मरीजों में टीबी के संकेत मिले हैं।
टीम का कहना है कि फिलहाल यह चौंकाने वाले परिणाम नहीं है, क्योंकि देश में टीबी का संक्रमण काफी आम है और कीमोथैरेपी के बाद ऐसे लक्षण से भी इनकार नहीं किया जा सकता। टीबी के इलाज से जुड़े डाक्टरों का भी मानना है कि टीबी के इंफेक्शन की शुरुआत सर्दी-खांसी से होती है।
क्या होती है कीमोथैरेपी
कैंसर के मरीजों के उपचार के लिए अपनाई जाने वाली विधि रासायन चिकित्सा को कीमोथैरेपी कहते हैं। यह रोगियों की जीने की संभावना और जीवन के गुणवत्ता में सुधार करती है।
यह एक ऐसा उपचार है जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दिया जाता है। बताया जाता है कि यह मुंह के अंदर की कोशिकाओं को भी नष्ट कर सकता है।
यह ड्रिप की सहायता से नस में एक सुई के द्वारा, एक गोली व द्रव के रूप में मुंह द्वारा सहित कई विधियां हैं।
कीमोथैरेपी के बाद इंफेक्शन होने के चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं और टीबी का इंफेक्शन भी काफी कामन है। ऐसे में यह संभव है।
एएन अग्रवाल, एडिश्नल प्रोफेसर पीजीआई
कीमोथैरेपी के बाद शरीर का इम्युन सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है। इससे टीबी होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
डा. अनिल गर्ग, स्टेट टीबी अधिकारी चंडीगढ़