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Lumpy Skin Disease: पंजाब सरकार ने रद्द की कर्मचारियों की छुट्टियां, रविवार और अवकाश पर भी करना होगा काम

Fri, 19 Aug 2022 04:06 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रदेश में संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अधिकारी और कर्मचारी रविवार एवं राजपत्रित अवकाश के दिन भी ड्यूटी करेंगे।  
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लंपी त्वचा रोग - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब में पशुओं में फैल रहे लंपी संक्रमण को लेकर हालात बिगड़ गए हैं। सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। सूबे में अब तक संक्रमण से 3765 पशुओं की मौत हो चुकी है। बिगड़ते हालात को देखते हुए पंजाब सरकार ने पशु पालन और कृषि विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दीं हैं।

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ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक सूबे में 80 हजार से अधिक पशुओं में संक्रमण होने की जानकारी मिली है। हालांकि पंजाब सरकार की ओर से दावा किया गया है कि अब तक 3.50 लाख पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है लेकिन सूबे के सीमावर्ती सात जिलों में हालात लंपी संक्रमण को लेकर ज्यादा खराब हैं।

शुक्रवार को पंजाब सरकार ने लंपी संक्रमण फैलने से रोकने के लिए चलाए जा रहे पशुओं के टीकाकरण को सफल बनाने के लिए अब सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। पंजाब सरकार ने सभी कर्मचारियों को निर्देश जारी किए हैं कि प्रदेश में संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अधिकारी और कर्मचारी रविवार एवं राजपत्रित अवकाश के दिन भी ड्यूटी करेंगे। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जब तक संक्रमण पूरी तरह से नियंत्रित नहीं हो जाता, तब तक सभी पशु चिकित्सा, कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे और हमेशा की तरह काम करेंगे।
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टीकाकरण की रफ्तार धीमी
पंजाब में लंपी संक्रमण को लेकर टीकाकरण धीमी रफ्तार से चल रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि सूबे में गॉट पॉक्स टीके की कमी है। सूबा सरकार की ओर से केंद्र सरकार से टीके की 25 लाख खुराक मांगी गईं हैं लेकिन अभी तक सूबे को यह दवा नहीं मिल पाई है।

दूध उत्पादन भी गिरा
पशुओं में बढ़ते लंपी संक्रमण का सीधा असर दूध उत्पादन पर भी पड़ा है। शहरों और गांवों में संक्रमण के कारण 15 लाख लीटर से अधिक दूध उत्पादन में गिरावट आई है। इससे दूध उत्पादन से जुड़े पशुपालकों को 6 से 10 करोड़ रुपये प्रतिदिन का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

लुधियाना में संक्रमित पशुओं की संख्या 10 हजार के पार
शुक्रवार को लुधियाना में इस बीमारी से पीड़ित पशुओं की संख्या 10 हजार पार कर गई है। अब बीमार पशुओं की संख्या 10 हजार 175 हो गई है जबकि 771 अधिक पशुओं की मौत हो गई है। जिले में अब तक 21 हजार 532 पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक जिले में दो लाख से अधिक पशु हैं। ऐसे में टीकाकरण की धीमी गति से और पशुओं को बीमार कर सकती है। 

अमृतसर में 5200 पशु संक्रमित, 220 की हो चुकी है मौत
अमृतसर में अब तक 5200 पशु इस बीमारी से संक्रमित हुए हैं और 220 की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 23000 से अधिक पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। जिले में सोमवार को 25000 वैक्सीन की और डोज पहुंचेंगी। इसके साथ ही पशु चिकित्सक अपने-अपने इलाके में घर-घर जाकर पशुओं की जांच भी कर रहे हैं। पशुपालक व ऑल इंडिया किसान सभा के ज्वाइंट सचिव लखबीर सिंह निजामपुरा और डेयरी मालिक जसविंदर सिंह ने बताया कि अब लंपी पर नियंत्रण पाया जा रहा है। पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नवराज सिंह संधू ने बताया कि वैक्सीन लगाने के बाद पशुओं में लंपी का फैलाव काफी हद तक रुक गया है।

पठानकोट: आठ हजार का हुआ टीकाकरण
पठानकोट में अब तक 1121 पशु लंपी की चपेट में आ चुके हैं, जबकि शुक्रवार को पहली मौत हुई है। पशुपालन विभाग के अनुसार 24 जुलाई को नरोट जैमल सिंह से संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। जिले में करीब 1 लाख पशु हैं, जिनमें से 75 हजार से अधिक गाय हैं। इनमें से अभी तक केवल आठ हजार पशुओं का ही टीकाकरण हो पाया है।

मुक्सतर में 10 हजार पशुओं को लगा टीका
मुक्तसर में लंपी स्किन संक्रमण पर काबू पाने के लिए टीकाकरण मुहिम चलाई जा रही है। विभाग ने अब तक करीब 10 हजार पशुओं का टीकाकरण किया है। डीसी विनीत कुमार की हिदायतों पर जिले के विभिन्न गांवों में शिविर लगाकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. गुरदास सिंह ने बताया कि जिले में अब तक लंपी स्किन से संक्रमित 5,203 पशुओं में से 3,804 तंदुरुस्त हो चुके हैं।
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फिरोजपुर: 11410 पशुओं का टीकाकरण, 210 की मौत
फिरोजपुर में लंपी से अब तक 210 पशुओं की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही 4250 पशु संक्रमित पाए गए हैं। जिले में अभी तक 11410 पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। काफी हद तक बीमारी पर काबू पा लिया गया है। यह जानकारी वरिष्ठ वेटरिनरी डॉ. प्रवीन अग्रवाल ने दी है। गांव बजीदपुर के सरपंच का कहना है कि उनके गांव में लगभग 35 दुधारू पशुओं की मौत हो चुकी है। उन्होंने भी पशु रखे हैं, जिनकी दवा पर उनका लगभग 40 हजार रुपये खर्च आ चुका है। यही नहीं जिन पशुओं को टीका लगाया है, उनका दूध भी कम हो गया है।

दावे बड़े पर टीके की कमी
पटियाला में टीके की कमी है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में पशुओं की संख्या चार लाख 23 हजार 267 है। इनमें 1,24148 गाय और 2,75,744 भैंसें हैं। कुल 3,99,892 गाय व भैंसों में से अब तक 10560 का ही टीकाकरण हो सका है। प्रोग्रेसिव डेयरी फामर्स एसोसिएशन पंजाब के जिला प्रधान सिकंदर सिंह ने बताया कि टीके की वायल पशु अस्पतालों व डिस्पेंसरियों में आ तो रही हैं लेकिन मात्रा कम है। इस तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिए। भादसों पशु अस्पताल के अधिकारी डॉ. गुरजाप सिंह का कहना है कि अस्पताल के अंतर्गत करीब 22 गांव आते हैं। अभी तक उनके पास वैक्सीन की चार वायल ही आई हैं। एक वायल से सिर्फ 33 पशुओं का ही टीकाकरण हो सकता है।
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