लुधियाना पश्चिम सीट पर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने सांसद अरोड़ा को चुनाव में उतारकर कांग्रेस, भाजपा व शिअद की चुनौती बढ़ा दी है। आप ने तीनों विपक्षी दलों में बड़े चेहरे पर दांव खेलने का दबाव बना दिया है।
आम आदमी पार्टी (आप) ने लुधियाना पश्चिम उप चुनाव में राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को चुनाव मैदान में उतारकर कांग्रेस, भाजपा व शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की परेशानी बढ़ा दी है। अब तीनों विपक्षी दलों पर उप चुनाव में बड़े चेहरे पर दांव खेलने का दबाव है।
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वर्ष 2022 में भी इस सीट पर आप ने कब्जा किया था और 34.80% वोट शेयर हासिल किया था। ऐसे में अब तीनों दल किसी ऐसे चेहरे की तलाश कर रहे हैं, जो पिछली हार को इस बार जीत में बदल सके।
उप चुनाव की अभी घोषणा भी नहीं हुई हैं। आप में सबसे पहले अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, जिससे उसके पास लोगों से संपर्क साधने के लिए भी काफी समय है।
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पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर कांग्रेस के भरत भूषण आशू रहे थे, जिन्होंने 28.30 % वोट शेयर हासिल किया था। पिछले तीन चुनावों से आशू इस सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। 2012 और 2017 में उन्होंने दो बार इस हलके से जीत दर्ज की, जबकि वर्ष 2022 में वह आप के गुरप्रीत सिंह गोगी से हार गए थे।
गोगी की मौत के बाद ही यह सीट खाली हुई है। चर्चा है कि इस बार भी कांग्रेस आशू पर दांव खेल सकती है, क्योंकि वह कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि ट्रांसपोर्टेशन टेंडर घोटाले के चलते वह विवादों में भी रहे, लेकिन पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत देने के साथ ही उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर भी रद्द कर दी थी।
हाल ही में लुधियाना में निकाय चुनाव में आशू ने अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन वह हार गई थी। भाजपा भी इस सीट से किसी बड़े चेहरे को चुनाव मैदान में उतारना चाहती है, लेकिन अभी फिलहाल पार्टी के अंदर बिक्रम सिंह सिद्धृ, पूर्व प्रदेश महासचिव जीवन गुप्ता और महासचिव अनिल सरीन के नाम की भी चर्चा है।
पेशे से एडवोकेट बिक्रम सिंह सिद्धृ ने वर्ष 2022 में भी चुनाव लड़ा था और 24.20 % वोट के साथ वह तीसरे स्थान पर रहे थे। भाजपा की शहरी एरिया में अच्छी पकड़ है। वह ऐसे उम्मीदवार पर दांव लगाना चाहती है, जो बाकी तीनों पार्टी के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे सके।
शिअद के लिए नाक का सवाल बना चुनाव
शिअद के लिए उप चुनाव नाक का सवाल बना हुआ है। इससे पहले चार सीटों पर हुए उप चुनाव से शिअद ने किनारा कर लिया था और अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। इस कारण पार्टी को काफी किरकिरी का भी सामना करना पड़ा था। इस समय भी अकाल तख्त साहिब के आदेशों की सही अर्थों में पालना कराने की मांग को लेकर पार्टी के अंदर उथल-पथल चल रही है।
शिअद से पिछली बार महेशइंदर सिंह ग्रेवाल ने चुनाव लड़ा था और 8.70 % वोट शेयर के साथ उनको हार का सामना करना पड़ा था। इस बार वह टिकट के लिए अपने परिवार में से किसी की दावेदारी पेश कर सकते हैं। पार्टी में जिला प्रधान भूपिंदर सिंह भी टिकट के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं।