वह महीने में एक या दो दिन के लिए माता-पिता से मिलने के लिए आता था। दो दिन के बाद वह वापस निकल जाता था। पड़ोसियों ने बताया कि कांत करीब एक सप्ताह पहले ही माता पिता से मिलने के लिए आया था। दो दिन रहने के बाद वह चला गया। घर में सिर्फ माता पिता ही रहते हैं।
इलाके में सभी से अच्छे तरीके से बात करने वाले कृष्ण ढींगरा ने अपने बेटे कांत को भी सभी के साथ अच्छे स्वभाव में बात करने की प्रेरणा दी थी। कांत जब भी महानगर आता तो अपने आसपास रहने वाले लोगों से भी अच्छी तरह मिलता था। उसी समय पता चला था कि वह हिमाचल जा रहा है लेकिन क्या करने जा रहा है इस बारे में नहीं पता।
शाम तक पड़ोसियों को नहीं थी किसी तरह की कोई सूचना
कृष्ण ढींगरा के पड़ोसियों ने बताया कि कृष्ण के अपने काम पर जाने के बाद चमनज्योति अकेली है। उन्होंने बताया कि कांत के साथ किसी तरह के हुए हादसे की खबर उन्हें मालूम नहीं है। वह तो अभी ही जान पाए है। उनकी भी हिम्मत नहीं पड़ रही कि वह जाकर कांत की मां को कुछ बता सके।
कांत का घर बंद था। जब कांत के पड़ोसियों को पता चला तो आस-पास रहने वाले दो तीन घरों के लोग भी बाहर आ गए। जब सब को पता चला तो वह हैरान हो गए कि एक सप्ताह पहले सब लोगों से अच्छे से मिलकर जाने वाला कांत अब इस दुनिया में नहीं रहा।