लुधियाना का एक किसान, जिसकी जमीन का अधिग्रहण हो गया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। लेकिन तारीख पर तारीख पड़ने के बाद जब अधिग्रहण का पैसा नहीं मिला, तो कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया, जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। अदालत ने किसान के नाम पूरी ट्रेन कर दी।
हांलाकि शनिवार को हुई सुनवाई में अदालत की तरफ से साफ किया गया है कि अगर रेलवे तीन सप्ताह के बीच किसान को मुआवजा नहीं देता। तो स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर को किसान के नाम कर दिया जाएगा।
रेलवे ने मांगा तीन सप्ताह का वक्त
एडिशनल सेशन जज जसपाल वर्मा की अदालत में रेलवे अधिकारियों ने किसान को पेमेंट देने के लिए तीन सप्ताह का वक्त मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अदालत ने पेमेंट के लिए रेलवे को सात अप्रैल तक का वक्त दिया है। शिकायतकर्ता किसान ने कुर्क की गई संपत्ति की नीलामी के लिए अदालत में आवेदन किया था, जबकि रेलवे ने भी पेमेंट करने के लिए तीन सप्ताह का वक्त मांगा।
इस पर अदालत ने रेलवे को और वक्त दे दिया। साथ ही कुर्क की गई संपत्ति स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस और स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर के कमरे की सुपुर्ददारी रेलवे अधिकारियों के पास ही रहेगी। अदालत ने संपत्ति की नीलामी के आवेदन को भी फिलहाल पेंडिंग कर लिया है।