भाखड़ा डैम से आने वाला पानी कजौली वाटर वर्क्स से पंचकूला को अगले साल जून-जुलाई तक मिलने की संभावना है।
तब तक शहर में ऊपरी मंजिलों पर लो-प्रेशर की समस्या दूर होने और ताजा पानी मिलने के लिए इंतजार करना होगा। अभी कौशल्या डैम और ट्यूबवेलों की मदद से शहर के सेक्टरों व ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति की जा रही है।
बोतल बंद पानी पीने की मजबूरी
ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण शहर के सैकड़ों घरों में पीने के लिए बोतल बंद पानी या टंकी के पानी को पीने के लायक बनाने के लिए आरओ सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन, हुडा अधिकारियों की दलील है कि न तो पानी की कमी है और न ही लो प्रेेशर की समस्या है।
हां, बायलॉज में सिर्फ ग्राउंड फ्लोर तक ही पानी की आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने का प्रावधान है। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार लो प्रेशर की समस्या से जूझ रहे सेक्टरवासी (ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोग) अपनी समस्या लेकर किसके पास जाएं।
मांग से ज्यादा पानी, फिर भी मारामारी
पंचकूला में रोजाना तकरीबन 29 मिलियन गैलन की उपलब्धता है, जबकि मांग 27 मिलियन गैलन से थोड़ा अधिक है।
हुडा अधिकारियों का कहना है कि पानी की कोई कमी नहीं है, लेकिन समस्या यह है कि आम लोगों को लो प्रेशर से फिर भी निजात नहीं मिल पा रही है।
लो प्रेशर से निपटने की नहीं है तैयारी
पंचकूला के शहरी इलाके में करीबन 35 हजार वाटर कनेक्शन हैं, जहां हर महीने पानी की नियमित आपूर्ति का दावा है। इसके बावजूद सेक्टरों और कालोनियों के मकानों में रहने वालों को फ्रेश पानी नहीं मिल रहा है।
हुडा के आंकड़े के मुताबिक, प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है। हुडा अधिकारी के मुताबिक अब भी कौशल्या डैम से पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं की जा रही है।
लो-प्रेशर से निपटने के लिए न तो हुडा के पास कोई विकल्प है और न ही किसी तरह की नई तकनीक को अपनाने की तैयारी है।