चंडीगढ़। शहर में पिछले कई महीनों से एक निजी इलेक्ट्रिक बस नजर आ रही है जो चंडीगढ़ से दिल्ली तक के लिए लगभग हर घंटे बसें चला रही है। ये बस आईएसबीटी-17, 43 और ट्रिब्यून चौक के पास से सवारियां उठा रही है। इससे सीटीयू को घाटा हो रहा है। इस बस को रोकने के लिए अब यूटी प्रशासन के परिवहन सचिव नितिन यादव ने स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को पत्र लिखा है। परिवहन सचिव ने लिखा है कि निजी बस अवैध रूप से शहर में कार्य कर रही है। इसकी वजह से सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही अवैध बसें यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक नहीं है। उन्होंने इस बस को रोकने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। ये बस इलेक्ट्रिक है जो मोहाली में खड़ी होती है लेकिन चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए चलती है। हैरानी की बात है कि जिस शहर में किसी भी निजी बस की एंट्री पर पाबंदी है। ये बस आईएसबीटी-17 और आईएसबीटी-43, ट्रिब्यून चौक के पास से व अन्य जगहों से सवारियों को बिठाती है। इससे सीटीयू के कर्मचारी भी चिंतित हैं, क्योंकि ये बस सुबह साढ़े 12 बजे से लेकर रात के 11 बजे तक हर घंटे चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए निकलती है। इससे सीटीयू को सवारियों का भारी नुकसान हो रहा है।
बस सेवा में बढ़ गई है निजी कंपनियों की दखलअंदाजी
बता दें कि कोविड के बाद से बस सेवा में निजी कंपनियों की दखलअंदाजी काफी बढ़ गई है। आईएसबीटी-43 के सामने सड़क पार करने के बाद उन्होंने अपना अलग बस स्टैंड बनाया है। जहां लगभग हर समय निजी कंपनियों की बसें खड़ी रहती हैं और सैकड़ों की संख्या में सवारी भी वहां मौजूद रहती हैं। लोगों को बिठाने के बाद बसें आगे बढ़ जाती हैं। कजहेड़ी से जो सड़क मोहाली की तरफ जाती हैं वहां बसें खड़ी रहती हैं। बस कंपनियों ने कजहेड़ी में दफ्तर खोले हुए हैं।
निजी बसों से प्रशासन और जनता को नुकसान
- टैक्स की चोरी
- किराया पर प्रशासन का कोई कंट्रोल नहीं, वह मनमर्जी के होते हैं
- ये बसें स्टैंडर्ड के अनुसार नहीं होती, सुरक्षा के पूरे उपकरण नहीं होते
- सीजन के समय एक सीट पर दो लोगों को बैठने पर मजबूर किया जाता है