हरियाणा को जीएसटी लागू होने के बाद पहले दो माह जुलाई और अगस्त में 476 करोड़ रुपये की राजस्व चपत लगी है। इन महीनों में बीते वर्ष के टैक्स कलेक्शन की तुलना में इस साल कम राजस्व प्राप्त हुआ। हालांकि, जीएसटी लागू किए जाने से पहले के अपने वादे मुताबिक केंद्र सरकार ने इस राशि की क्षतिपूर्ति हरियाणा सरकार को कर दी है।
जीएसटी लागू होने के बाद मुनाफाखोरी भी बढ़ी है और मुनाफाखोरी निरोधक प्राधिकरण के पास 43 शिकायतें आई हैं। इसके साथ ही कैमिस्ट ने दवाओं पर डिस्काउंट देना भी बंद कर दिया है। इसकी शिकायत आने पर सरकार कमेटी बनाकर जांच कराने की तैयारी में है। हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने जीएसटी पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए हर मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की। उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत 1,01,409 नए डीलरों के पंजीकरण के साथ प्रदेश में कर दाताओं की कुल संख्या बढ़कर 3,31,786 हो गई है। इनमें 44.02 प्रतिशत माइग्रेटेड डीलर्स हैं जो पहले हरियाणा में वैट और सेवा कर के तहत पंजीकृत थे।
जीएसटी माल से जुलाई एवं अगस्त माह में लगभग 2,822 करोड़ रुपये का कुल राजस्व एकत्रित हुआ। जीएसटी के क्रियान्वयन के कारण जुलाई व अगस्त 2017 में हुए राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए हरियाणा को 476 करोड़ रुपये की राशि मुआवजे के तौर पर मिल चुकी है। कंपोजिशन स्कीम का विकल्प लेने वाले ट्रेडर्स की संख्या 25,979 है। कुल करदाताओं की तुलना में कंपोजिशन करदाता 7.83 प्रतिशत हैं। एंटी-प्रॉफिटरिंग प्राधिकरण 43 शिकायतों की जांच करेगा।