वर्ष 2021 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सियासी लोगों के मामलों की लंबी कतार रही। पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के लिए यह साल मुसीबत भरा रहा लेकिन आखिरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से उन्हें अभयदान मिल गया। मोहाली की अदालत द्वारा सुखपाल खैरा के रिमांड आदेश रद्द करने और कस्टडी बढ़ाने से इनकार करने के फैसले को एनफोर्समेंट डाइरेक्टोरेट (ईडी) द्वारा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर को निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। इसी तरह एजेएल मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप तय करने पर भी हाईकोर्ट ने रोक लगाई।
पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी
पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को किसी न किसी मामले में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी के पंजाब सरकार के प्रयास के बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 10 सितंबर को सैनी को बड़ी राहत दी। 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव तक उनके खिलाफ दर्ज किसी भी केस में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज दर्ज सभी एफआईआर में आगे जांच और कार्रवाई पर भी रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने कहा कि न्याय तक पहुंचने से पहले सभी का पक्ष सुना जाना जरूरी है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 14 जुलाई को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बड़ी राहत देते हुए एजेएल भूमि आवंटन मामले में ईडी अदालत द्वारा आरोप तय करने की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि आगामी आदेश तक इस मामले में आरोप तय न किए जाएं। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने इस मामले में पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। साथ ही हाईकोर्ट से आग्रह किया था कि 15 जुलाई को इस मामले में हुड्डा पर आरोप तय होने हैं और ऐसे में इस पर रोक लगाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने अब ईडी कोर्ट द्वारा 15 जुलाई को होने वाली आरोप तय करने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है साथ ही हाईकोर्ट ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी तलब न करने का आदेश दिया। हुड्डा ने एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के निर्णय पर सवालिया निशान लगाते हुए इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। ईडी कोर्ट के 5 जुलाई के आदेश को हुड्डा ने मनमाना और आपत्तिजनक बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की है। साथ ही हाईकोर्ट ने ईडी की शिकायत को भी खारिज करने की हाईकोर्ट से मांग की है।
नवजोत सिंह सिद्धू
इस वर्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपनी टिप्पणियों को लेकर चर्चित रहे। हाईकोर्ट में पंजाब में हजारों करोड़ रुपये के ड्रग्स कारोबार का मामला विचाराधीन है। इस मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम लिप्त होने की बात कहते हुए सिद्धू लगातार सीलबंद रिपोर्ट खोलने की मांग करते रहे। इस रवैये को न्यायालय की अवमानना बताते हुए हरियाणा के एडवोकेट जनरल कार्यालय में याचिका दाखिल की गई ताकि सिद्धू के खिलाफ न्यायालय की आपराधिक अवमानना के तहत कार्रवाई की जा सके। कानून के अनुसार हाईकोर्ट में ऐसी कोई याचिका दाखिल करने से पहले एडवोकेट जनरल के समक्ष याचिका दाखिल करनी पड़ती है। उन्हीं की मंजूरी के बाद इस पर हाईकोर्ट में सुनवाई होती है।
राम रहीम
डेरा सच्चा सौदा के प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के मामले में राम रहीम ने पंचकूला की सीबीआई अदालत द्वारा दोषी करार देने और उम्र कैद की सजा के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने अपील को सुनवाई के लिए एडमिट करते हुए 20 दिसंबर को जुर्माने की आधी राशि वसूल करने पर रोक लगा दी। डेरा प्रबंधक हत्याकांड मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत ने गुरमीत राम रहीम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही राम रहीम पर 31 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह की 2002 में गोली मारकर हत्या की गई थी। उस समय एक पत्र सामने आया था जिसमें कहा गया था कि राम रहीम डेरे में महिलाओं का यौन शोषण करता है। डेरा प्रमुख को यह शक था कि इस पत्र को प्रसारित करने में रंजीत सिंह की भूमिका है। इससे पहले उसे साध्वियों के यौन शोषण के मामले में 20 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। साथ ही राम रहीम को पत्रकार छत्रपति की हत्या के मामले में भी उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके साथ ही इसी वर्ष राम रहीम को बेअदबी के मामले में प्रोडक्शन वारंट पर लाने का फरीदकोट की अदालत ने आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए राम रहीम से सुनरिया जेल में ही पूछताछ का पंजाब पुलिस की एसआईटी को आदेश दिया है।
पूरा साल हुई वीसी के जरिए सुनवाई
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोरोना के चलते पूरे वर्ष सुनवाई वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। इस दौरान हाईकोर्ट के कई जजों और अन्य अधिकारियों के कोरोना संक्रमित होने के चलते पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूरी तरह से फिजिकल सुनवाई न करने का फैसला लिया। इसके चलते सीमित संख्या में मामलों की सुनवाई हुई और ज्यादातर मामलों में पूरे साल बिना सुनवाई के ही तारीख पड़ती रही। इस दौरान जहां कई जज रिटायर हुए तो वहीं कुछ वकीलों को जज के तौर पर एलिवेट भी किया गया। इतिहास में पहली बार एक एडिशनल जज को स्थायी नियुक्ति नहीं दी गई और उनका यह दर्जा उनसे छिन गया। अक्सर दो साल का प्रोबेशन पूरा होने के बाद जज को स्थायी जज के रूप में शपथ दिलाई जाती है लेकिन इस मामले में अज्ञात कारणों से ऐसा नहीं हुआ।
एजी के नाम पर विवाद
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफेके बाद एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद एजी के नाम को लेकर कयासों का सिलसिला आरंभ हो गया। कई नामों पर चर्चा के बाद एपीएस देओल को एडवोकेट जनरल बनाया गया। नवजोत सिद्धू ने इसका सीधे तौर पर विरोध किया और भारी विरोध के बाद देओल को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस पद को भरने का प्रयास आरंभ किया गया तो ज्यादातर सीनियर वकीलों ने अपने पैर खींच लिए। इसके बाद डीएस पटवालिया को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई तो पहले ही दिन सरकार को हाईकोर्ट में मुंह की खानी पड़ी और सरकार द्वारा जब्त की गई बसों को छोड़ने का हाईकोर्ट ने फरमान जारी कर दिया।