अमर उजाला डॉट कॉम पर खबर लगते ही चमत्कारी ‘संत लाल’ की चर्चा अब लंदन की गलियों तक पहुंच चुकी है। गर्मी में सर्दी और सर्दी में गर्मी लगने वाले शख्स संतलाल की इस खासियत जांचने लंदन के एक न्यूज पेपर से जुटे सदस्य गांव डेरोली अहीर में पहुंचे। टीम ने संतलाल को दो घंटे बर्फ पर लेटाकर फिल्म भी तैयार की।
इस फिल्म के साथ पूरी रिपोर्ट तैयार कर लंदन में ब्रिटिश न्यूज एजेंसी को भेजी है। इस रिपोर्ट पर एजेंसी शोध करेगी कि ‘मौसम विभाग’ नार्मल है या नहीं। शोध के बाद रिपोर्ट को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज करवाने के लिए भेजा जाएगा।
अमर उजाला की वेबसाइट पर पढ़ी खबर
‘अमर उजाला’ ने 28 दिसंबर को ‘कंपकंपाती ठंड में बर्फ की सिल्ली पर सोते है मौसम विभाग’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। खबर को अमर उजाला डॉट काम पर ब्रिटिश न्यूज एजेंसी के लिए दिल्ली में काम करने वाली तानिया ने पढ़ा।
लंदन स्थित एशिया न्यूज न्यूजपेपर के लिए ब्रिटिश न्यूज एजेंसी काम करती है। अमर उजाला की साइट पर खबर पढ़ने के बाद तानिया ने एजेंसी को मामले से अवगत करवाया। एजेंसी से निर्देश मिलने के बाद शुक्रवार सुबह टीम नई दिल्ली से महेंद्रगढ़ जिले के गांव डेरोली अहीर के लिए रवाना हुई। टीम में रिपोर्टर तानिया के साथ फोटोग्राफर तनवीर और असिस्टेंट सारिख शामिल थे।
दो घंटे तैयार की फिल्म, गांव उमड़ा
टीम सदस्य दोपहर 12.30 बजे गांव डेरोली अहीर में राजमिस्त्री संतलाल के घर पहुंचे। उस समय संतलाल नारनौल आया हुआ था। परिजनों से टीम सदस्यों ने मोबाइल नंबर लेकर संतलाल से संपर्क किया। संतलाल नारनौल से तीन बर्फ की सिल्ली लेकर घर पहुंचा। टीम ने संतलाल को दो घंटे से ज्यादा समय तक बर्फ की सिल्ली पर लेटाया।
इस पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी की। इसके बाद टीम ने संतलाल से ‘सर्दी में गर्मी और गर्मी में सर्दी’ लगने के विषय में बातचीत की। पूरी जानकारी लेकर टीम वापस शाम 6.00 बजे नई दिल्ली रवाना हुई। इस दौरान पूरा गांव भी उपस्थित रहा।
क्या कहती है तानिया
अमर उजाला की साइट पर खबर पढ़ने वाली तानिया ने बताया कि दो घंटे से ज्यादा की वीडियोग्राफी की गई है। फोन पर उन्होंने बताया कि पूरी रिपोर्ट ब्रिटिश न्यूज एजेंसी के माध्यम से लंदन भेज दी है।
रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इसमें मुख्य यह बात है कि अगर जांच में यह व्यक्ति संतलाल नॉमर्ल हुआ तो लंदन से रिसर्च करने टीम आएगी। उन्होंने बताया कि गुगल सर्च कर पता चला है कि डच के विमहुफ नामक व्यक्ति के नाम बर्फ के टुकड़ों में गर्दन तक रहने का वर्ल्ड रिकार्ड 1 घंटे 13 मिनट 48 सेकेंड का है।
2008 में बनाया था रिकार्ड
डच में विमहुफ नामक व्यक्ति ने वर्ष 2008 में सबसे अधिक समय बर्फ में रहने का रिकार्ड बनाया हुआ है। इस रिकार्ड के मुताबिक विमहुफ को गर्दन तक एक कैंटर में खड़ा किया और चारों ओर बर्फ के टुकडे़ डाले गए। वह 1 घंटा 13 मिनट 48 सेकेंड तक इस बर्फ के कैंटर में रहा। इस तरह गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में उसका नाम दर्ज है।
संतलाल में क्या है खासियत
गांव डेरोली अहीर में संतलाल (60) को आस-पास के ग्रामीण ‘मौसम विभाग’ के नाम से जानते हैं। पेशे से राज मिस्त्री का काम करने वाले संतलाल ने बताया कि सर्दी के मौसम में वह बाहर खुले में नजदीक नहर या जोहड़ में डुबकी लगाता रहता है। दिन में कम से कम तीन बार ठंडे पानी में, नहर या जोहड़ में नहाना। उसके बाद बर्फ के ऊपर लेटकर शरीर को आराम देना।
कुछ वर्षों तक तो आस-पड़ोस के मकानों में रखे फ्रिज से बर्फ लेकर काम चलता रहा। पड़ोसियों ने भी सर्दी के मौसम में बर्फ तैयार करनी छोड़ दी। ऐसे में अब इस मौसम में बुजुर्ग बाजार से रोजाना बर्फ खरीदकर लाते हैं। जब तक बर्फ न पिघले, उस पर लेटकर आराम करते हैं। इसी बर्फ को खाकर अपनी बेचैनी मिटाने का प्रयास करते हैं। पहनावे में देखा जाए तो दिनभर सिर्फ पतले कुर्ते-पायजामे में रहते हैं। वहीं गर्मी में बहुत सर्दी लगती है। कंबल और रजाई ओढ़ कर बिस्तर में सोना पड़ता है।
दिन में 10 बजने के बाद अलाव जलाना और रात को सेकना पड़ता है। ज्येष्ठ माह में जब लोग लू की थपेड़ों से बचने के लिए एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल करते है। उस वक्त संतलाल को दिन में चलने वाली लू सोने पर सुहागे का काम करती है। इसे देखते हुए परिजन ओढ़ने वाले गर्म वस्त्र 3 माह की बजाय पूरे सालभर बाहर ही रखते हैं।
गर्मी में इन वस्त्रों को बुजुर्ग इस्तेमाल करता है और सर्दी में परिजन। संतलाल का कहना है कि वह 60 बसंत देख चुका है। एक बार भी बीमार नहीं हुआ। सिर्फ सादा खाना दाल-रोटी ही रोजाना का भोजन है।