करीब दो साल पहले आम आदमी पार्टी का गठन कर सियासत के गलियारों में कदम रखने वाले अरविंद केजरीवाल के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके पूर्वज भी राजनीति में कांग्रेस से लोहा लेकर उनसे मात देने वालों में प्रथम पंक्ति के नेताओं में से एक थे।
वर्ष 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता बंसीलाल को इस परिवार ने उस समय पटखनी दी थी, जब उनके नाम का यहां बोलबाला था। पूरे जिले में सबसे पहले बंसीलाल के खिलाफ बगावत का झंडा अरविंद केजरीवाल के दादा ने ही उठाया था। उन्होंने जनता पार्टी की प्रत्याशी चंद्रावती का सिवानी में न केवल कार्यालय खुलवाया, बल्कि उनके पक्ष में खुलकर प्रचार भी किया था।
उस समय चौ. बंसीलाल ने अरविंद केजरीवाल के दादा मंगलचंद को मनाने की कोशिश भी की थी, लेकिन जुबान के धनी समझे जाने वाले मंगलचंद ने जनता पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। उस समय रिकॉर्ड तोड़ मतों से चंद्रावती की जीत भी हुई थी।
यहां यह भी बता दें कि अकेले केजरीवाल के दादा मंगलचंद ने ही वर्ष 1968 से 1977 तक हरियाणा में एकछत्र राज करने वाले बंसीलाल को चुनाव में पटखनी देने में अहम भूमिका अदा की थी, चूंकि मंगलचंद की भिवानी जिले में सामाजिक कार्यों के चलते लोगों में अच्छी खासी पैठ थी।
बंसीलाल को हराया था रिकॉर्ड मतों से
सिवानी क्षेत्र में अरविंद केजरीवाल के दादा मंगलचंद का एकमात्र पहला परिवार था, जिन्होंने सिवानी के पुराने बस स्टैंड पर रामचंद सारस्वत के भवन में बंसीलाल के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ रही जनता पार्टी की उम्मीदवार चंद्रावती का कार्यालय खुलवाया।
उस समय शहर के रामानंद बिश्नोई भी जनता पार्टी के एक और खास समर्थकों में शामिल हो गए थे। इस इलाके में उस समय केवल अरविंद के घर और इस कार्यालय में ही जनता पार्टी के झंडे थे।
अरविंद के चाचा गिरधारी केजरीवाल बताते हैं कि उस समय हर घर और दुकान पर केवल कांग्रेस पार्टी के ही झंडे लगे थे, लेकिन मतदान के बाद चुनावी नतीजे चंद्रावती के पक्ष में थे। इस दौरान एक जुमला भी चला था और परिणाम जानने के लिए कहीं चर्चा थी तो सभी की जुबान पर एक ही बात होती थी कि हमें नहीं मालूम कौन जीतेगी (उनका इशारा चंद्रावती था) और कौन हारेगा (यानी बंसीलाल)। और ऐसा हुआ भी, जिसमें चंद्रावती ने अरविंद के दादा मंगलचंद के सहयोग से बंसीलाल को रिकॉर्ड मतों से हराया था।
सिवानी का भी क्रेज बढ़ा
दिल्ली में केजरीवाल के पक्ष में आ रहे चुनावी रुझान के साथ ही अरविंद के जन्म स्थान सिवानी और उनके पूर्वजों के गांव खेड़ा के लोगों का क्रेज बढ़ गया है। पि्रंट और या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सिवानी और खेड़ा सुर्खियों में है। देश और विदेश के पत्रकारों की यहां आवाजाही बढ़ गई है।
अरविंद की चाची पिस्ता देवी और उनकी चचेरी बहन चिंकी, लक्ष्मी और सुमन बताती हैं कि वे पहले घरेलू काम-काजों में व्यस्त रहते थे, लेकिन अब मीडिया के लोगों के बीच उनका पूरा दिन गुजरता है।