कांग्रेस प्रवक्ता सुखपाल खैहरा ने फतेहगढ़ साहिब से अकाली दल के उम्मीदवार कुलवंत सिंह को लेकर मुख्यमंत्री बादल पर निशाना साधा है। खैहरा ने कहा है कि एक समय ऐसा था जब बादल ने कुलवंत की कंपनी जेएलपीएल को मोहाली में दिए मेगा प्रोजेक्ट की सीबीआई जांच की मांग की थी। आज वही कुलवंत सिंह उनके इतने नजदीक हो गए कि न सिर्फ बादल ने उन्हें बचाया, बल्कि फतेहगढ़ साहिब से लोकसभा की टिकट भी दे दी।
खैहरा ने यह भी आरोप लगाया है कि एक ओर तो बादल जेएलपीएल को दिए मेगा प्रोजेक्ट की सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। दूसरी तरफ अरबों के ड्रग्स रैकेट की सीबीआई जांच से मुकर रहे हैं। जो उनके दोहरे मापदंडों और सियासी मौकापरस्ती का सबूत है।
खैहरा ने बताया कि उन्होंने राज भवन से आरटीआई के तहत जानकारी हासिल की है। जिसके मुताबिक 2007 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सीएम बादल ने राज्यपाल को एक मांग पत्र सौंपा था। जिसमें कहा गया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कुलवंत सिंह की रियल एस्टेट कंपनी जनता लैंड प्रमोटर्स लिमिटेड को मोहाली के सेक्टर-91 में मेगा प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए 120 एकड़ जमीन दी है।
बादल ने आरोप लगाया था कि यह सार्वजनिक पार्कों की जमीन है, जिसे नियमों को दरकिनार करके जेएलपीएल को दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई थी कि इसमें 1500 करोड़ रुपये का घपला किया गया है। इतना ही नहीं बादल ने अपने मांगपत्र के साथ कई अधिकारियों की रिपोर्ट भी लगाई थीं। जिनमें पुडा और गमाडा के अलावा अर्बन एंड हाउसिंग डेवलपमेंट विभाग के अधिकारी शामिल थे।
बादल ने मांग की थी कि इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए। साथ ही यह भी मांग की थी कि इस मामले में तत्कालीन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह जिम्मेदार हैं, उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में जीत कर जैसे ही बादल सत्ता में आए, सभी समीकरण बदल गए। देखते ही देखते वह कुलवंत उनका नजदीकी हो गया, जिसके प्रोजेक्ट की उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद बादल ने कुलवंत को बचाने की कवायद शुरू कर दी। कुलवंत की उनके साथ नजदीकियां इतनी बढ़ीं कि उसे लोकसभा चुनाव का टिकट तक दे दिया गया। खैहरा ने सवाल किया कि सीएम बताएं कि वह तब सही थे या अब सही हैं।
साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि अगर वह 1500 करोड़ रुपये के घपले की सीबीआई जांच की मांग कर सकते हैं तो हाल ही में सामने आए अरबों रुपये के ड्रग्स रैकेट की सीबीआई जांच से क्यों पीछे हट रहे हैं।