मैं चंडीगढ़ में जिया हूं। इस शहर को जानता हूं। यहां के सुख-दुख से परिचित हूं। यहां के जन प्रतिनिधि इस शहर को जितना जानते होंगे उससे ज्यादा इस देश के भविष्य का प्रधानमंत्री जानता है। इसलिए देश के लोग चाहे मुझे जिताकर प्रधानमंत्री बना दें, लेकिन चंडीगढ़ में कमल के बिना मुझे यह विजय अधूरी लगेगी।
इसलिए चंडीगढ़ में भी कमल खिलना चाहिए। यह बात नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-34 के प्रदर्शनी मैदान में भारत विजय रैली के दौरान कही। मोदी ने इस दौरान चंडीगढ़ को लेकर अपने सपने भी बताए।
मोदी ने कहा कि सालों बाद चंडीगढ़ आया हूं। यहां आकर लगा जैसे अपने घर वापस आया हूं। मैंने गुजरात छोड़कर अगर इस शहर में कुछ समय भाजपा के प्रभारी के नाते न काम किया होता तो मेरी शिक्षा-दीक्षा अधूरी रह जाती।
यहां बहुत कुछ पाया है और बहुत कुछ सीखा है। पंचकूला में मैं रहा हूं। यहां के लोगों को ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलेगा कि जिसे वह जानते हों वह प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। इसलिए विशेष तौर पर वह यहां के लोगों का आशीर्वाद लेने आए हैं।
उन्होंने कहा कि मैं जब चंडीगढ़ आता था तो यह महसूस करता था कि इस शहर का विकास नहीं हो रहा है। चंडीगढ़ को शिक्षा का हब बनाया जा सकता है। यहां आईआईटी, आईआईएम या एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान खुलने चाहिए। लेकिन, चंडीगढ़ के बारे में सोचने वाला कोई नहीं है। हम शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाएंगे।
चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते गृह मंत्री के अधीन है। लेकिन, कांग्रेस में गृह मंत्री बदलते रहे। कोई भी गृह मंत्री शहर की समस्या को जानने नहीं पहुंचा। चंडीगढ़ में पर्यटन की आपार संभावनाएं है। इस शहर में पर्यटन को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है।
लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा है। दिल्ली के बाद चंडीगढ़ देश में दूसरा ऐसा शहर है जहां महिलाओं के खिलाफ अत्याचार सबसे ज्यादा हुआ हो। ।