देश को लोकसभा के स्पीकर और केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में बलराम जाखड़ जैसा कद्दावर नेता देने वाली फिरोजपुर लोकसभा सीट को भी खडूर साहिब की तरह ही शिअद का गढ़ कहा जा सकता है।
पिछले 10 लोकसभा चुनावों में यहां से शिअद को 5, कांग्रेस को 2, बसपा को 2 तथा निर्दलीय प्रत्याशी को एक बार सफलता मिली है। बसपा ने एक बार अपने स्तर पर, जबकि दूसरी बार शिअद के साथ समझौते के तहत यह सीट जीती।
1980 के आम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में बलराम जाखड़ को जीत मिली और इसके बाद 1980 से 1989 तक लगातार दो टर्म वह लोकसभा के स्पीकर रहे। फिर 1991 से 1996 तक केंद्र सरकार में कृषि मंत्री भी रहे।
इस सीट से कांग्रेस को दूसरी बार सफलता 1985 में मिली, जब इसके प्रत्याशी गुरदयाल सिंह ढिल्लों जीते। शिअद को 1977 सहित पिछले चार आम चुनावों में यहां से लगातार सफलता मिली है।
1977 में महिंदर सिंह, 1998, 1999 व 2004 में जोरा सिंह मान तथा 2009 में शेर सिंह घुबाया फिरोजपुर से शिअद के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए लोकसभा सदस्य चुने गए।
1996 के चुनाव में शिअद-बसपा समझौते के तहत बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मोहन सिंह फल्लियांवाला को सफलता मिली। इससे पहले 1992 में भी बसपा उम्मीदवार के तौर पर मोहन सिंह फल्लियांवाला को ही इस सीट से जीत मिली थी।
1989 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ध्यान सिंह मंड यहां से जीत गए थे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई वाले शिअद ने 1989 और 1992 में चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया था।