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आसान नहीं है श्री आनंदपुर साहिब की चुनावी जंग

Sat, 29 Mar 2014 03:42 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आनंदपुर साहिब सीट से लोकसभा की जंग आसान नहीं होगी। यह हलका चार जिलों में फैला होने के कारण यहां से संसद का सफर बेहद मुश्किल हो गया है। कांग्रेस ने निवर्तमान सांसद रवनीत बिट्टू को टिकट देने के बाद सीनियर नेता अंबिका सोनी को मैदान में उतारा है।
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वहीं अकाली दल ने दो बार सांसद रह चुके प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा पर भरोसा जताया है। आम आदमी पार्टी ने सिख वोट बैंक पर नजर गड़ाते हुए कच्छ के सिखों का केस लड़ रहे एडवोकेट हिम्मत शेरगिल पर दांव खेला है।

जबकि, बसपा ने पंजाबी गायक केएस मक्खन को टिकट दिया है, लेकिन अभी तक मुख्य मुकाबला कांग्रेस और शिअद के बीच ही दिख रहा है।

चुनाव प्रचार के लिए बहाना पड़ेगा खूब पसीना

आनंदपुर साहिब हलका 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया, 2009 लोकसभा चुनाव में रवनीत बिट्टू पहले सांसद बने। इस हलके में मोहाली जिले के मोहाली और खरड़ विधानसभा हलकों, रोपड़ जिले के रोपड़, श्री आनंदपुर साहिब और चमकौर साहिब हलकों, नवांशहर जिले के नवांशहर, बंगा और बलाचौर हलकों और होशियारपुर जिले के गढ़शंकर हलके को शामिल किया गया है।

ये हलके पहले फिल्लौर, रोपड़ और होशियारपुर संसदीय सीटों का हिस्सा थे। आनंदपुर साहिब हलका चार जिलों में फैला होने के कारण उम्मीदवारों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सबसे पहले तो चुनाव प्रचार का शैड्यूल तैयार करना मुश्किल हो रहा है, उसके बाद प्रचार में भी खूब पसीना बहाना पड़ रहा है।

इससे भी बड़ी दिक्कत यह है कि उम्मीदवारों को चारों जिलों की गुटबाजी और नाराज लोगों से जूझना पड़ रहा है। इसे देखते हुए कांग्रेस और शिअद ने पैराशूट कैंडिडेट उतारे हैं। बाहरी होने के कारण दोनों को ही स्थानीय समीकरण समझने में समय लगेगा।

चंदूमाजरा के लिए मुसीबत है मोहाली

मोहाली में कांग्रेस एकजुट है, लेकिन मोहाली के रहने वाले चंदूमाजरा के लिए यही हलका मुसीबत है। अकालियों की गुटबाजी के चलते पिछले दस साल से पार्टी यहां हर चुनाव हारती आ रही है। इस बार भी किरनबीर कंग, हरसुखइंदर बब्बी बादल जैसे नेता विरोध में हैं।

खरड़ में राजबीर पडियाला के शिअद में जाने से कांग्रेस को झटका लगा है पर अकाली हलका इंचार्ज उजागर सिंह बडाली इससे खुश नहीं हैं। रोपड़ में विधायक डॉ. दलजीत चीमा के विरोधी चंदूमाजरा के लिए मुश्किल बन सकते हैं।

नवांशहर जिले में शिअद एकजुट नजर आ रही है। उधर, कांग्रेस के लिए रोपड़ और नवांशहर में गुटबाजी समस्या बनी हुई है। दोनों जगह नए जिला प्रधानों की नियुक्ति से दूसरे नेता नाराज हैं, पार्टी को होला मोहल्ला की सियासी कॉन्फ्रेंस तक रद्द करनी पड़ी थी।

अंबिका के लिए चुनौती है रोपड़

उम्मीद की जा रही है कि अंबिका के आने के बाद रोपड़ से राणा केपी सिंह, रमेश दत्त, अमरजीत सैनी, सुखविंदर सिंह जैसे नेता चल पड़ेंगे। यहां जिला प्रधान अमरजीत सैनी को बदलने पर भी विचार चल रहा है।

वहीं, नवांशहर में भी धरमपाल बांगड़ को प्रधान बनाने के बाद से सतबीर सिंह, ललित मोहन पाठक, बलाचौर में राजिंदर लक्की नाराज थे। अंबिका के लिए इन्हें मनाना चुनौती होगा। नवांशहर में रेल लिंक का मुद्दा भी अकाली उठा सकते है।

गढ़शंकर अंबिका सोनी की ससुराल है, इसका उन्हें फायदा मिलेगा। उधर, चंदूमाजरा के लिए यहां पार्टी विधायक सुरिंदर सिंह भूलेवाल के प्रति लोगों की नाराजगी नुकसानदायक हो सकती है।

हलके की विधानसभा सीटों के समीकरण

मोहाली - बलबीर सिद्धू - कांग्रेस
खरड़ - जगमोहन कंग - कांग्रेस
चमकौर साहिब - चरनजीत चन्नी - कांग्रेस
रोपड़ - डॉ. दलजीत चीमा - शिअद
श्री आनंदपुर साहिब - मदन मोहन मित्तल - भाजपा
नवांशहर - गुरइकबाल कौर - कांग्रेस
बंगा - तरलोचन सिंह सूंड - कांग्रेस
बलाचौर - नंद लाल - शिअद
गढ़शंकर - सुरिंदर सिंह भूलेवाल - शिअद

लोकसभा चुनाव 2009
रवनीत बिट्टू - कांग्रेस - 4,04,836 वोट
डॉ. दलजीत चीमा - शिअद - 3,37,632 वोट
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ये है दिग्गजों का प्रोफाइल

अंबिका सोनी पंजाब से राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय मंत्री रहीं। वह पार्टी प्रधान सोनिया गांधी की सियासी सलाहकार हैं। राज्यसभा सदस्य रहने के दौरान उन्होंने अपने कोटे की सारी ग्रांट श्री आनंदपुर साहिब हलके में ही बांटी। निवर्तमान सांसद रवनीत बिट्टू द्वारा न्यू चंडीगढ़ में टाटा कैंसर अस्पताल, मोहाली के लिए कई ट्रेन समेत कई प्रोजेक्ट लाने का फायदा उन्हें होगा।

प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा स्व. जत्थेदार गुरचरन टोहड़ा के वफादार रहे। वह शिअद के टिकट पर 1996 और 1998 में पटियाला से सांसद बने। 1985-87 के बीच सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। बाद में अकाली दल में आ गए। 1998 के बाद से चंदूमाजरा कई बार विधानसभा व लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, पर उन्हें जीत हासिल नहीं हुई है।

आप उम्मीदवार एडवोकेट हिम्मत सिंह शेरगिल (34) सबसे युवा प्रत्याशी हैं। वह गुजरात में कच्छ से उजाड़े जा रहे सिखों का केस सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे हैं। उन्होंने लॉरेंस स्कूल सनावर, पंजाब यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ बकिंघम और इन्स ऑफ कोर्ट स्कूल ऑफ लॉ यूके से पढ़ाई की है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले शेरगिल अब चुनाव मैदान में हैं।
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