1999 में सुरजीत सिंह रखड़ा, 2004 में कैप्टन कंवलजीत सिंह और 2009 में प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा को उनके हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस बार प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा को शिअद ने श्री आनंदपुर साहिब से प्रत्याशी बनाया है, इसलिए आगामी चुनाव में परनीत कौर का मुकाबला नए अकाली उम्मीदवार से होगा। शिअद की ओर से इस सीट पर कैबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा या जिला योजना कमेटी के चेयरमैन दीपिंदर कौर ढिल्लों में से किसी एक को मैदान में उतारे जाने की संभावना है। इस क्षेत्र को कैप्टन अमरिंदर सिंह का गढ़ माना जाता है।
बदलाव पर हैं निगाहें
2004 में पंजाब की 13 में से 11 सीटें हारने के बावजूद परनीत कौर यहां से जीत गई थीं। इसी प्रकार 2009 के आम चुनाव में परनीत कौर 97389 के बड़े अंतर से जीती थीं।
इस चुनाव में उन्होंने पटियाला सीट के अधीन आती नौ विधानसभा सीटों में से 6 पर लीड हासिल की थी। इसके बाद 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 5, जबकि शिअद को 4 सीटों पर जीत मिली। बेशक आम चुनाव के मुकाबले असेंबली इलेक्शन में कांग्रेस की एक सीट कम हुई, लेकिन वोटों की संख्या के लिहाज से अधिक अंतर नहीं आया।
इसका एक कारण यह भी रहा कि 2012 में यह लग रहा था कि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालत यह है कि 1999 के बाद से पटियाला क्षेत्र में कांग्रेस का पलड़ा भारी चलता आ रहा है। अब शिअद का बदलाव कितना सफल हो पाएगा, इसी पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
936085 ने किया था मतदान
2009 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 936085 वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। इनमें से 498940 पुरुष, जबकि 437145 महिलाएं थीं। मतों की कुल संख्या 1344864 थी।
पिछले आम चुनाव में परनीत कौर ने प्रो. चंदूमाजरा को पटियाला लोकसभा सीट के अधीन आते छह विधानसभा क्षेत्रों पटियाला, पटियाला ग्रामीण, नाभा, राजपुरा, सनौर और समाना में पछाड़ा था। तीन विधानसभा क्षेत्रों डेराबस्सी, घनौर और शुरतारणा में चंदूमाजरा को लीड मिली थी। 2009 की तुलना में विधानसभा चुनाव 2012 में सीट पर चुनावी माहौल कुछ बदला।
इस चुनाव में कांग्रेस को पटियाला, पटियाला ग्रामीण, नाभा, राजपुरा और सनौर से जीत हासिल हुई। वहीं, समाना, डेराबस्सी, घनौर और शुरतारणा से शिअद के उम्मीदवार जीते।