करीब 13.77 लाख मतदाताओं वाली सोनीपत लोकसभा सीट पर पार्टियों ने जातीय गोत्र समीकरण बिठाकर बड़ा दांव खेला है।
भाजपा के रमेश कौशिक व बसपा के सुमन सिंह शर्मा जहां गैर जाट हैं, वहीं इनेलो के पदम सिंह दहिया, कांग्रेस के जगबीर मलिक व आम आदमी पार्टी के जयसिंह भनवाला एक ही जाति से हैं, लेकिन सभी के गोत्र जरूर अलग हैं। इनके साथ ही पूर्व विधायक सुखबीर फरमाणा भी पिछले एक साल से निर्दलीय तौर पर मैदान में उतर कर पसीना बहा रहे हैं।
पार्टियों व प्रत्याशियों ने जिस हिसाब से जाति व गोत्र के लोगों को अपने पीछे खड़ा करने की जुगत की है, उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि इस सीट पर चुनाव रोचक होगा।
गोहाना के जगबीर मलिक, जिन पर कांग्रेस ने दांव खेला है, वे लगातार तीसरी बार विधायक हैं। सोनीपत से कविता जैन विधायक हैं। बात जींद जिले की करें तो सोनीपत लोकसभा क्षेत्र में यहां से जींद, जुलाना व सफीदों हलके शामिल हैं, लेकिन इन तीनों पर ही इनेलो के विधायक हैं।
पार्टियों ने जाती-गोत्र वाइज वोटों का आंकलन करने के बाद ही टिकट अलॉट की है। चुनाव का ऊंट किस करवट बैठेगा, इसमें तो अभी संशय है, लेकिन उसमें सभी अपनी अपनी जीत तय मान कर चल रहे हैं।
गोहाना से कांग्रेस विधायक जगबीर मलिक को सोनीपत सीट से प्रत्याशी बना मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी एक बड़ा दांव चला है। वे 10 नवंबर, 2013 की हरियाणा शक्ति रैली में यह कह सबको चौंका चुके हैं कि मैं गोहाना का और गोहाना मेरा।
उन्होंने जगबीर को टिकट देकर हलके में यह संदेश देने का प्रयास किया है कि जगबीर के सांसद बनने के बाद रिक्त गोहाना सीट से वे विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। साथ में उन्होंने इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खाप मलिक-गठवाल के नेता को टिकट देकर मलिक वोटरों को रिझाने की चाल चली है।
हुड्डा का मानना है कि उनकी धर्मपत्नी आशा हुड्डा के जरीए दहिया वोटरों पर तो पकड़ मजबूत है ही, अब मलिक भी काबू आ जाएं तो जीत पक्की। वैसे भी कांग्रेस के जगबीर मलिक गोहाना से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। सीएम हुड्डा को ऐसे में उनसे मजबूत कोई प्रत्याशी सोनीपत सीट पर दिखा ही नहीं।