हरियाणा में दो लोकसभा सीटें अंबाला और सिरसा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इस सीट पर जब भी गैर कांग्रेसी दल गठबंधन में लड़े तो सीट कांग्रेस से छीन लेते हैं।
जब अलग-अलग-अलग होकर चुनाव लड़ते हैं तो सीट कांग्रेस के खाते में चली जाती है। वर्ष 1984 से 2009 के बीच कुल नौ बार लोकसभा के चुनाव हुए।
इनमें पांच बार कांग्रेस जीती और दो बार भाजपा गठबंधन। एक बार बसपा गठबंधन ने जीत दर्ज की। दो बार 2009 और 1989 में गठबंधन यह सीट कुछ अंतर से हार गया।
कम-ज्यादा होता रहता है वोट बैंक
अंबाला लोकसभा क्षेत्र में कालका, पिंजौर, पंचकूला, अंबाला शहर, अंबाला छावनी, जगाधरी और यमुनानगर शहर पड़ते हैं। वैसे नारायणगढ़, साढ़ौरा, मुलाना और पुराना छछरौली विधानसभा क्षेत्र ग्रामीण हैं।
कालका, अंबाला शहर विधानसभा क्षेत्रों में ग्रामीण इलाका काफी है। अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या इस लोकसभा क्षेत्र में अधिकतम है। इस सीट पर बसपा का पारंपरिक वोट बैंक है।
यह वोट बैंक कम-ज्यादा होता रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इनेलो का आधार है जबकि कांग्रेस का शहरों और ग्रामीण क्षेत्र दोनों में आधार है।
भाजपा सिर्फ शहरों तक सीमित
भाजपा का सिर्फ शहरों तक आधार है। इस बार भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंच बनाई है। 1996 में भाजपा का हविपा के साथ गठबंधन था। तब भाजपा के सूरजभान ने 2,53,555 (31.77) फीसदी वोट लेकर जीत दर्ज की थी और कांग्रेस के शेर सिंह को सिर्फ 1,66,408 (20.85) फीसदी वोट मिली थी।
हरियाणा में 1991 से 1996 तक कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस सरकार के खिलाफ मतदाताओं में गुस्सा था। बहुजन समाज पार्टी जब 1998 में चुनाव हुए तो बहुजन समाज पार्टी और इनेलो का समझौता हो गया।
बसपा के अमन कुमार नागरा को 2,73,792 (36.97) वोट मिले थे और जीत दर्ज की थी। भाजपा के सूरजभान को 2,70,928 (36.58) और कांग्रेस के राज कुमार वाल्मीकि को 1,74,171 (23.52) वोट मिले थे और तीसरे नंबर पर रहे थे।
भाजपा-इनेलो का हो चुका है गठबंधन
1999 में भाजपा का इनेलो के साथ गठबंधन हो गया। नतीजतन भाजपा के रतन लाल कटारिया को 3,57,460 (51.63) वोट मिले और जीत दर्ज की। कांग्रेस के फूलचंद मुलाना को 2,32,982 (33.65) वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर बसपा के अमन कुमार नागरा को सिर्फ 83,644 (12.08) फीसदी वोट मिले थे।
प्रदेश में जुलाई, 1999 से 5 मार्च, 2005 तक इनेलो-भाजपा की सरकार थी। मगर 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का इनेलो से गठबंधन नहीं हुआ। सरकार के खिलाफ माहौल भी था। कांग्रेस ने सिरसा से सांसद रह चुकीं कुमारी सैलजा को अंबाला से चुनाव मैदान में उतार दिया। सब दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा।
नतीजतन कांग्रेस की कुमारी सैलजा ने 4,15,264 (48.99) वोट हासिल किए। भाजपा के रतनलाल कटारिया को 1,80,329 (21.27) और इनेलो के बलवंत सिंह को 1,30,972 (15.45), बसपा के चंद्रपाल को मात्र 57028 (6.23) और हविपा के अमन कुमार नागरा को 22039 (2.60) वोट मिल पाए।
इस बार कांग्रेस के खिलाफ अलग-अलग दल
2014 के चुनाव में कांग्रेस के मुकाबले सिर्फ भाजपा-हजकां अपना गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ेंगे। जबकि इनेलो, बसपा और आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में अलग-अलग डटे हैं।
केंद्र की 10 साल से कांग्रेस (यूपीए) सरकार है और प्रदेश में नौ साल से कांग्रेस की सरकार है। अब चुनाव में पता चलेगा कि गठबंधन दल सत्ताधारी दल कांग्रेस पर भारी पड़ते हैं या नहीं।
यह है अंबाला लोकसभा क्षेत्र का फ्रोफाइल
एक जनवरी, 2014 की स्थिति
कुल मतदाता--------------------------16,49,960
पुरुष मतदाता--------------------------8,88,849
महिला मतदाता--------------------------7,61,111
मतदान केंद्र--------------------------1759
यह रहा पिछले चुनाव का परिणाम
2009
प्रत्याशी--------------------------पार्टी--------------------------वोट (फीसदी)
कुमारी सैलजा---------------------कांग्रेस--------------------------37.19
रतन लाल कटारिया--------------भाजपा-इनेलो--------------------------35.50
चंद्रपाल--------------------------बसपा------------------------------21.76