लुधियाना से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार एडवोकेट एचएस फूलका की शिकायत पर मुख्य चुनाव अधिकारी डीसी को शहर में लगे अयाली के पोस्टरप, होर्डिंग्स और बैनर हटाने के लिए निर्देश दिए हैं।
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फुलका ने शिकायत में हलके में अकाली उम्मीदवार मनप्रीत सिंह अयाली पर शहर को पोस्टरों, बैनरों और होर्डिंग्स भरने का आरोप लगाते हुए, इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया था।
फूलका ने शिकायत में कहा कि अकालियों ने लुधियाना में लाखों पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स लगा दिए हैं। शहर में पांच लाख से ज्यादा पोस्टर और पचास हजार होर्डिंग लगाए गए हैं। यह न सिर्फ चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि इससे लोगों की जायदाद को भी नुकसान हुआ है।
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ये प्रचार सामग्री निजी इमारतों के साथ ओवरब्रिज, सार्वजनिक स्थानों, खंभों, फ्लाईओवर के साथ ही धार्मिक स्थानों पर भी लगाई गई है। इन होर्डिंग्स पर रोजाना इतना खर्च हो रहा है कि अधिकतम राशि की सीमा अभी ही पार कर गई है।
फूलका की शिकायत पर आयोग ने लुधियाना के डीसी को आदेश दिए हैं कि सरकारी इमारतों पर लगे बोर्ड आदि हटाए जाएं। निजी संपत्ति पर लगे पोस्टर आदि के बारे में जांच की जाए कि यह मालिक की सहमति से लगे हैं या नहीं।
चुनाव आयोग से जागीर कौर को मिली राहत
पंजाब के कपूरथला जिले में दो स्थानों पर नींव पत्थर रखने के मामले में शिअद विधायक बीबी जगीर कौर के लिए राहत भरी खबर है।
इस मामले में कपूरथला के डीसी डीएस मांगट ने कहा है कि बीबी जगीर कौर ने नींव पत्थर 2 मार्च को रखे थे, जबकि चुनाव आचार संहिता इसके बाद लागू हुई। ऐसे में बीबी जागीर कौर का कार्य चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला नहीं बनता।
मुख्य चुनाव अधिकारी वीके सिंह ने बताया कि डीसी मांगट ने उन्हें जानकारी दी है कि बीबी जगीर कौर द्वारा नींव पत्थर रखने के बाद केंद्रीय मंत्री संतोष चौधरी का पत्र आया कि चूंकि इन केंद्रों पर सांसद निधि का पैसा लगना है, इसलिए वह 5 मार्च को इन का शिलान्यास करेंगे।
उसी दिन शाम फिर से मैसेज आया कि उनकी जगह पूर्व विधायक सुखपाल खैरा नींव पत्थर रखेंगे, लेकिन बाद में दोनों ने ही ऐसा नहीं किया। इस बारे में रिपोर्ट सीईओ को सौंप दी गई है। सीईओ वीके सिंह ने बताया कि रिपोर्ट पर आयोग से अभी कोई जवाब नहीं आया है।
मनप्रीत को मिलेगा अकाली दल लौंगोवाल का साथ
बठिंडा लोकसभा सीट से पीपीपी-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी मनप्रीत सिंह बादल को अकाली दल लौंगोवाल का समर्थन मिल सकता है। इस प्रकार, बिखर चुके साझा मोर्चा का हिस्सा रहे माकपा-भाकपा द्वारा पीपीपी-कांग्रेस गठबंधन का विरोध किए जाने के बीच अकाली दल लौंगोवाल के समर्थन की उम्मीद मनप्रीत के लिए राहतभरी है।
मनप्रीत को समर्थन देने पर अंतिम फैसला लेने के लिए अकाली दल लौंगोवाल ने बैठक बुलाई थी, लेकिन ऐन मौके पर बैठक को स्थगित कर दिया गया। संभावना है कि यह बैठक अगले एक-दो दिन में ही होगी।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मनप्रीत को समर्थन देने पर सहमति लगभग हो चुकी है। दल की कार्यकारिणी की बैठक में केवल इस पर मोहर ही लगाई जानी बाकी है। इसके बाद औपचारिक घोषणा हो जाएगी।
अकाली दल लौंगोवाल के महासचिव बलदेव सिंह मान ने कहा कि पार्टी ने मनप्रीत बादल को समर्थन देने बारे फैसला कार्यकारिणी बैठक में ही होगा। इसलिए बैठक से पहले वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
2012 के विधानसभा चुनाव के वक्त पीपीपी, माकपा, भाकपा और अकाली दल लौंगोवाल पर आधारित साझा मोर्चा अस्तित्व में आया था। अब लोकसभा चुनाव में पीपीपी ने कांग्रेस से समझौता कर लिया है और इसके अध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल बठिंडा लोकसभा क्षेत्र से गठबंधन प्रत्याशी हैं।
कांग्रेस ने फरीदकोट लोकसभा सीट भाकपा के लिए छोड़ने की पेशकश भी की थी, लेकिन बात नहीं बन पाई और पीपीपी-कांग्रेस समझौते के विरोध में दोनों वामपंथी दल मोर्चा से बाहर हो गए। अब निगाहें अकाली दल लौंगोवाल पर टिकी हुई हैं। इसका अंतिम निर्णय मनप्रीत के लिए काफी मायने रखता है।
मनप्रीत के प्रति भाकपा का रुख हुआ नरम
लोकसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के संबंध में माकपा और भाकपा के बीच हुई बैठक में बठिंडा लोकसभा सीट को लेकर सहमति नहीं बन पाई।
सूत्रों के अनुसार, भाकपा नेताओं ने कहा कि इस सीट पर पार्टी का कोई अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है कि यहां किसे समर्थन किया जाना है।
उनका इशारा अप्रत्यक्ष रूप से पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत बादल की ओर था। वहीं, माकपा नेताओं का साफ कहना था कि बठिंडा में वामपंथी दलों को अपना उम्मीदवार उतारना चाहिए।
भाकपा की प्रदेश इकाई के सचिव बंत बराड़ कह चुके हैं कि पार्टी कांग्रेस या इसके किसी समर्थक दल का समर्थन नहीं करेगी, लेकिन वीरवार को बैठक में चली चर्चाओं से मनप्रीत के प्रति भाकपा का नरम रुख नरम सामने आया है।
बैठक में लंबी चर्चा हुई, लेकिन सीटों के बंटवारे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। बंत बराड़ ने कहा कि यह अनौपचारिक बैठक थी और कोई भी अंतिम निर्णय पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर ही आधारित होगा।
वहीं, माकपा के प्रदेश सचिव चरण सिंह विर्दी का कहना है कि पंजाब के सभी वामपंथी दलों के बीच सीटों के आवंटन से संबंधित फैसला जल्द ले लिया जाएगा। भाकपा के साथ उनके मतभेद वाली कोई बात नहीं है।
कांग्रेस हाईकमान में लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों को लेकर जारी मंथन आखिरकार वीरवार को निर्णायक दौर में पहुंच गया। पार्टी ने लुधियाना सीट से मनीष तिवारी का नाम फाइनल कर दिया है।
हालांकि वीरवार को जारी कांग्रेस की दूसरी सूची में मनीष का नाम नहीं था। उसके बाद पार्टी ने मनीष का नाम फाइनल किया है, जिसका औपचारिक ऐलान शुक्रवार को हो सकता है।
मनीष तिवारी बतौर पैराशूट कैंडिडेट 2004 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना आए थे। कांग्रेस ने गुरचरण सिंह गालिब का टिकट काटकर मनीष को टिकट दिया था, तब गालिब ने ही बागी होकर मनीष को हरवा दिया।
गालिब फैक्टर के चलते हुए अकाली उम्मीदवार शरनजीत सिंह ढिल्लों चुनाव जीत गए थे। 2009 में मनीष तिवारी को कांग्रेस ने दोबारा उम्मीदवार बनाया। इस बार उनके मुकाबले में शिअद ने गुरचरन सिंह गालिब को ही उतारा, जिन्हें मनीष ने हरा दिया।
2014 के चुनाव के लिए भी मनीष की उम्मीदवारी तय मानी जा रही थी, क्योंकि वह सिटिंग एमपी थे। अकाली दल ने लुधियाना सीट से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली को उम्मीदवार बनाया है जबकि, आम आदमी पार्टी ने एडवोकेट एचएस फूलका को उतारा है।