पंजाब कांग्रेस में अभी टिकटों की दौड़ खत्म नहीं हुई है और एक नई जद्दोजहद शुरू हो गई। हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा को दोबारा गुरदासपुर हलके से चुनाव मैदान में उतार दिया है। जिसके बाद कांग्रेस में नए समीकरण बन गए हैं।
अहम सवाल यह है कि आखिर पंजाब में कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान कौन संभालेगा। बाजवा के टिकट के ऐलान के साथ ही चुनाव प्रचार की कमान संभालने को लेकर जद्दोजहद तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक सेंट्रल वर्किंग कमेटी मेंबर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब की कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है।
कैप्टन गुट की दलील है कि बाजवा अपने हलके में कड़े मुकाबले में होने के कारण पूरे पंजाब के चुनाव प्रचार को संभालने में समर्थ नहीं हो सकते। इसलिए मजबूत कैंपेन कमेटी बननी चाहिए, जो पूरे पंजाब में चुनाव प्रचार संभाल सके। उधर, बाजवा को पहले ही यह आशंका थी।
सूत्र बताते हैं कि चुनाव लड़ने पर सहमति जताने से पहले ही बाजवा ने हाईकमान से यह बात सुनिश्चित कर ली थी कि प्रचार की जिम्मेदारी भी वह खुद संभालेंगे। पर अगर कैप्टन धड़ा हावी होने की कोशिश भी करता है तो बाजवा वर्किंग प्रेसिडेंट का दांव खेल सकते हैं। बाजवा अपने किसी करीबी को वर्किंग प्रेसिडेंट बना सकते हैं।
पिछले चुनाव में ऐसा हुआ भी था। तब तत्कालीन प्रधान मोहिंदर सिंह केपी जालंधर से चुनाव लड़ रहे थे। पार्टी ने लाल सिंह को चुनाव तक के लिए वर्किंग प्रेसिडेंट बना दिया था। इस बार भी बाजवा इस हथियार का इस्तेमाल कर सकते हैं।
वर्किंग प्रेसिडेंट बाजवा गुट का होने के कारण एआईसीसी से आने वाले चुनावी फंड को खर्च करना भी इसी गुट के अख्तियार में होगा। इससे वह अपने करीबी उम्मीदवारों की ज्यादा मदद कर सकेंगे। टिकटों के ऐलान के साथ ही हाईकमान इस बारे में भी फैसला कर सकती है।