खडूर साहिब संसदीय सीट को पंथक सीट कहा जाता है लेकिन पिछले लोकसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि खडूर साहिब सीट पर कांग्रेस व शिअद का मुकाबला बराबरी का रहा है। अब तक हुए 15 लोकसभा चुनावों में छह बार कांग्रेस के प्रत्याशी विजयी हुए और आठ बार ही शिअद के प्रत्याशी विजयी रहे है।
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एक बार शिरोमणि अकाली दल (मान) के प्रत्याशी सिमरनजीत सिंह मान विजयी हुए हैं। 16वीं लोकसभा चुनाव में किस पार्टी का प्रत्याशी विजयी होता है यह तो चुनाव के परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा। इस सीट से कांग्रेस ने हरजिंदर सिंह गिल, शिअद ने जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा और शिरोमणि अकाली दल (मान) ने सिमरनजीत सिंह मान को चुनाव मैदान में उतारा है।
संभावना जताई जा रही है कि इस बार भी मुकाबला कांटे की टक्कर का होगा। खडूर साहिब सीट के पिछले सभी लोकसभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि शिअद और कांग्रेस का दबदबा बराबरी का रहा है जिससे शिअद के प्रत्याशी जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा को कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि उक्त क्षेत्र में पड़ते कुछ इलाके जहां पर पंथक वोट का दबदबा है को काटने के लिए शिरोमणि अकाली दल (मान) के प्रत्याशी सिमनरजीत सिंह मान चुनाव मैदान में हैं, जिन्होंने 1989 में उक्त सीट भारी बहुमत के साथ जीती थी।
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रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा
जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा को शिअद ने प्रत्याशी बनाया है, लेकिन ब्रह्मपुरा 2012 के विधानसभा चुनाव में श्री खडूर साहिब से शिअद के टिकट पर चुनाव लड़े थे और कांग्रेस पार्टी के टिकट पर पहली बार रमनजीत सिंह सिक्की ने ब्रह्मपुरा को पटखनी देकर परचम लहराया था।
शिअद के वरिष्ठ नेता होने के कारण पार्टी हाईकमान द्वारा ब्रह्मपुरा को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है लेकिन ब्रह्मपुरा की राह आसान नहीं है। गत विधानसभा चुनाव में पहली बार चुनाव लड़े कांग्रेस प्रत्याशी रमनजीत सिंह सिक्की ने माझा क्षेत्र के शक्तिशाली जरनैल कहलवाने वाले रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा को उनके ही क्षेत्र में हराकर पंजाब की राजनीति में एक नया इतिहास रचा था।
कपूरथला विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी विधायक राणा गुरजीत सिंह का दबदबा होने के चलते आज तक कांग्रेस ने राणा के नेतृत्व में इलाके में विधानसभा का कोई भी चुनाव नहीं हारा। वहीं पिछले लोकसभा चुनावों में कपूरथला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस को यहां से करीब साढे़ 18 हजार की लीड मिली थी।
सिमरनजीत सिंह मान
शिरोमणि अकाली दल (मान) के प्रत्याशी सिमरनजीत सिंह मान ने 1989 में उक्त सीट भारी बहुमत के साथ जीती थी। मान कहीं चुनाव के दौरान शिअद प्रत्याशी रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा को दिक्कत न पेश कर दें। 1951 से 1971 तक हुए पांच लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी खडूर साहिब से लगातार जीतते आए हैं।
उसके बाद शिअद के प्रत्याशी मोहन सिंह तुर ने 1977 में उक्त सीट कांग्रेस की झोली से छीनकर शिअद का कब्जा करवाया। उसके बाद तरलोचन सिंह तुर 1985 में भी विजयी रहे, लेकिन इसके बाद शिअद की सीट से कब्जा छिन गया और शिरोमणि अकाली दल (मान) के प्रत्याशी सिमरनजीत सिंह मान ने 1989 में विजयी हुए।
उसके बाद 1992 में कांग्रेस के प्रत्याशी सुरिंदर सिंह कैरो उक्त सीट से विजयी हुए। इसके बाद 1996 से 2009 के बीच हुए चार लोकसभा चुनावों में शिअद के प्रत्याशी लगातार चुनाव जीतते आए, तब से उक्त सीट को पंथक सीट का नाम राजनीतिक विशेषज्ञों द्वारा दिया जाने लगा था।
इस सीट से अब तक जीते उम्मीदवार
खडूर साहिब लोकसभा सीट से 1951 में कांग्रेस के सुरजीत सिंह, 1957 में कांग्रेस के सुरजीत सिंह मजीठिया, 1962 में कांग्रेस के सुरजीत सिंह मजीठिया, 1967 में कांग्रेस के जीएस ढिल्लो, 1971 में कांग्रेस के गुरदियाल सिंह ढिल्लो, 1977 में शिअद के मोहन सिंह तुर, 1985 में शिअद के तरलोचन सिंह तुर, 1989 में शिरोमणि अकाली दल (मान) के सिमरनजीत सिंह मान, 1992 में कांग्रेस के सुरिंदर सिंह कैरो, 1996 में शिअद के मेजर सिंह ओबोके, 1999 में शिअद के तरलोचन सिंह तुर, 2004 में शिअद के डा. रतन सिंह अजनाला, 2009 में शिअद के डा. रतन सिंह अजनाला विजयी रहे।
छह बार कांग्रेस, आठ बार शिअद व एक बार शिअद (मान) के प्रत्याशी विजयी हुए 1951 से 1971 तक लगातार कांग्रेस ने जीते पांच लोकसभा चुनाव 1996 से 2009 तक शिअद ने जीते लगातार चार लोकसभा चुनाव 15,031,86 है वोटर जिसमें 1,90,941 नए वोटर खडूर साहिब संसदीय क्षेत्र से हैं।