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यहां उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे वोट बैंक

Thu, 10 Apr 2014 03:47 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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लोकसभा चुनाव में नामांकन भरने की प्रक्रिया खत्म होने के साथ ही शह और मात की बिसात बिछ गई है। सभी पार्टियों और उम्मीदवारों ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए चालें चलनी शुरू कर दी हैं। सभी का फोकस पंजाब के विभिन्न हलकों के अलग-अलग वोट बैंक पर है।
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धर्म, जाति, वर्ग के आधार पर बने वोट बैंक हर बार निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस बार भी ये वोट बैंक उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे। पार्टियां भी वोट बैंक की अहमियत समझती हैं। इसलिए वोट बैंक के आधार पर ही उम्मीदवार भी उतारे जाते हैं। वोट बैंक की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके जरा सा खिसकने से हाथ में आती सत्ता चली जाती है।

शहरी, हिंदू और दलित कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक रहा है। 2007 के विधानसभा चुनाव में इसी वोट बैंक की अनदेखी ने कांग्रेस को सत्ता से दूर कर दिया। 2012 में इस वोट बैंक ने फिर अपनी ताकत दिखाई और अकाली-भाजपा गठबंधन को जिता कर पंजाब में नया चुनाव इतिहास रच दिया।
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इसलिए दोनों ही प्रमुख दलों ने वोट बैंकों को अपने हक में करने की कवायद तेज कर दी है, जिसकी शुरुआत वोट बैंक के मुताबिक उम्मीदवारों को उतारने से हुई है।

19 विस सीटों पर हिंदुओं की अहम भूमिका

हिंदू वोट बैंक कांग्रेस और भाजपा के बीच बंटा हुआ है, शिअद ने भी इसमें सेंध लगाई है। सभी प्रमुख शहरी सीटों पर हिंदू वोट बैंक निर्णायक हैं। सबसे ज्यादा अहम लुधियाना सीट पर हैं, जहां इस बार चारों उम्मीदवार सिख हैं। इसके अलावा जालंधर, अमृतसर, पटियाला, संगरूर व बठिंडा के शहरी हलकों में मिला कर करीब 19 विधानसभा सीटों पर हिंदू वोट बैंक अहम भूमिका में है। वहीं, पंजाब की सभी ग्रामीण सीटों पर सिख वोट निर्णायक हैं। पर ये वोट बैंक पूरी तरह अकाली दल व कांग्रेस में बंटा है।

रविदास बिरादरी
रविदास बिरादरी पंजाब की तीन सीटों पर निर्णायक रोल अदा करती है। इनमें दोआबा की दोनों रिजर्व सीटों जालंधर व होशियारपुर के अलावा फतेहगढ़ साहिब सीट शामिल हैं। इसे देखते हुए दोनों प्रमुख पार्टियों उम्मीदवार इसी बिरादरी से हैं। दोआबा में कांग्रेस ने मोहिंदर सिंह केपी व चौधरी संतोख, तो शिअद-भाजपा ने पवन टीनू और विजय सांपला को उतारा है।

ऐसे में बिरादरी के वोट पूरी तरह बंट जाएंगे, दूसरे वोट बैंक निर्णायक होंगे। वहीं, फतेहगढ़ साहिब से भी शिअद ने रविदास बिरादरी के कुलवंत सिंह को उतारा है। जबकि, कांग्रेस ने बाजीगर बिरादरी से साधू सिंह धरमसोत को टिकट दिया है। अगर यहां बिरादरी कार्ड चला तो शिअद का पलड़ा भारी हो सकता है।

वाल्मीकियों और सिखों की वोट

वाल्मीकि वोट बैंक जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और फरीदकोट में मजबूत स्थिति में है। जालंधर में पिछली बार शिअद ने वाल्मीकि बिरादरी के हंसराज हंस को टिकट दिया था। इस बार दोनों ही पार्टियों ने इस बिरादरी को टिकट नहीं दिया। ऐसे में जालंधर में इनका वोट बैंक ही निर्णायक होगा। अमृतसर व लुधियाना में भी यह वोट बैंक अगर किसी एक उम्मीदवार के हक में एकजुट हो गया तो नतीजे बदल सकता है।
राय सिख
राय सिख बिरादरी पंजाब के एक हलके में है, पर बेहद मजबूत स्थिति में। फिरोजपुर हलके में इस बिरादरी का वोट बैंक ही सब कुछ तय करता है। इसी लिए अकाली दल ने इस बिरादरी के शेर सिंह घुबाया को टिकट दिया है। उधर, कांग्रेस भी बिरादरी के वोट बैंक में सेंध लगाने में लगी है।
मजहबी सिख
फरीदकोट सीट पर मजहबी सिखों के हाथ में सत्ता की चाभी है। इस हलके में इस वोट बैंक के आधार को देखते हुए दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार इसी बिरादरी से हैं। जिनमें शिअद की परमजीत कौर गुलशन व कांग्रेस के जोगिंदर सिंह पंजगराईं शामिल हैं।
कंबोज
कपूरथला व सुलतानपुर लोधी कंबोज बिरादरी के गढ़ हैं। इनके खडूर साहिब हलके में आने के बाद दोनों पार्टियों के लिए यहां कंबोज बिरादरी का वोट बैंक महत्वपूर्ण हो गया है। जालंधर में भी कंबोज बिरादरी का प्रभाव है।

‌मुस्लिमों, इसाइयों और फौजियों का वोट

मुस्लिम वोट बैंक
मुस्लिम वोट बैंक कुछ सीटों पर अहम है। जिनमें संगरूर का मलेरकोटला हलका तो मुस्लिम बाहुल्य है। इसी तरह गुरदासपुर का कादियां हलका भी कादियानी मुस्लिम का गढ़ है। लुधियाना में करीब 70 हजार और जालंधर में करीब चालीस हजार मुस्लिम हैं। आमतौर पर यह कांग्रेस का वोट बैंक रहा है, पर पिछले चुनाव में अकाली दल ने इसमें सेंध लगाई है।

ईसाई
पंजाब में ईसाई की आबादी 17-20 लाख है, जो कम संख्या में सभी हलकों में हैं। गुरदासपुर हलके में इनके वोट सबसे %यादा हैं, जालंधर में भी इनका ध्रुवीकरण किसी भी पार्टी को फायदा पहुंचा सकता है।

पूर्व फौजी
पंजाब में फौजी व पूर्व फौजी भी देश भर में सबसे ज्यादा तादाद में हैं। फौजियों, पूर्व फौजियों और उनके परिजनों के वोट मिला लें तो आंकड़ा आठ लाख से ज्यादा है। कांग्रेस ने इस वोट बैंक को लुभाने के लिए वन रैंक वन पेंशन का कार्ड खेला है। पर पूर्व फौजियों के सभी संगठनों ने चुनाव में आम आदमी पार्टी की हिमायत करने का ऐलान कर दिया है।
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2012 विधानसभा चुनाव में पार्टियों का प्रदर्शन

श्रेणी--------- सीटें ----- कांग्रेस -- शिअद-भाजपा
हिंदू बाहुल्य - 19 -------- 4 ------ 13
सिख बाहुल्य - 62 ------- 26 ------ 36
मिश्रित ----- 36 -------- 16 ------ 19

श्रेणी-------- कांग्रेस --------- शिअद-भाजपा
2007-2012 -------2007-2012 (विधानसभा चुनाव)
हिंदू  जाति - 45 - 48 (प्रतिशत वोट)- 43 -- 34 (प्रतिशत वोट)
हिंदू ओबीसी -- 51 -- 37 -------- 36 -- 40
हिंदू दलित ---- 53 -- 37 -------- 29 -- 33
जट सिख ----- 31 -- 31 -------- 60 -- 52
खत्री सिख ---- 37 -- 35 --------- 49 -- 50
ओबीसी सिख -- 44 -- 44 --------- 42 -- 46
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