लोकसभा चुनाव के दौरान चंडीगढ़ में एक बार फिर से रेंट एक्ट का मुद्दा ट्रेडर्स ने गरमा दिया है। लगातार महंगी हो रही कमर्शियल प्रापर्टी ने उनकी नींद उड़ा दी है और वे बैलेंस रेंट एक्ट चाहते हैं। चंडीगढ़ में तीस हजार से ज्यादा व्यापारी और उद्यमी हैं। इतने वोट कोई भी उलट फेर कर सकते हैं।
चंडीगढ़ में बैलेंस रेंट एक्ट तो होना ही चाहिए। इससे भी ज्यादा सिटी के अधिकारियों को यह बात भी ध्यान देनी होगी कि कम से कम उन ट्रेडर्स का नुकसान न होने पाए जिन्होंने सिटी को डवलप किया। हालात यह है कि किराया चार गुना हो गया है और बिजनेस आधा रह गया है। किराए की कोई सीमा ही नहीं रह गए है।
अरविंद जैन, अध्यक्ष, कॉमर्शियल प्रापर्टी एसोसिएशन
चंडीगढ़ में ट्रेडर्स के लिए बैलेंस रेंट जरूरी है। इसकी आवश्यकता इसीलिए है क्योंकि अब कामर्शियल प्रापर्टी के रेट्स लगातार बढ़ने लगे हैं।जो जिन किराएदारों ने अपने व्यापार से चंडीगढ़ में व्यापार जनरेट किया उनको ठिकाने लगा दिया गया है।
बीएस सैनी, महासचिव, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया टैनेंट एसोसिएशन
रेंट एक्ट का मुद्दा हमारे लिए अहम है। हमने इस मुद्दे को कई नेताओं के सम्मुख रखा पर निदान कहीं नहीं निकला। अबकी बार दो दिन में हम बैलेंस रेंट एक्ट और अन्य समस्याओं का पूरा एजेंडा तैयार करके प्रत्याशियों को सौंपेंगे।
चरंजीव सिंह, अध्यक्ष, चंडीगढ़ व्यापार मंडल
सिटी के ट्रेड को बचाने के लिए बैलेंस रेंट एक्ट का होना अतिआवश्यक है। हमने पहले भी बैलेंस रेंट एक्ट लागू करने की वकालत की है और लोकसभा चुनाव मैदान में उतरने जा रहे प्रत्याशियों से भी हमारी यही डिमांड है।
-दिवाकर सहूंजा, मैनेजिंग डायरेक्टर, ड्यूसन
क्या है यह मुद्दा
चंडीगढ़ में कामर्शियल प्रापर्टी ज्यादा है। सिटी में जिन परिसर का किराया दस से बारह हजार रुपये था उनका ही किराया अब तीन लाख रुपये हो गया है। चंडीगढ़ में कामर्शियल टैनेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद जैन ने यह मुद्दा उठाया। उसमें भी जिनका किराया पंद्रह सौ से ज्यादा है उनको कोर्ट में चैलेंज किया जा रहा है।