लोकसभा चुनाव में नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने अपने गतिविधियां तेज कर दी हैं। आम आदमी पार्टी के बाद शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी में भी रैली व जनसभा की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं।
पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राज वड़िंग ने पिछला लोकसभा चुनाव बठिंडा सीट से लड़ा था। इस चुनाव में वह शिरोमणि अकाली दल की उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल से 21,772 मतों से हार गए थे। इसके बाद वह वर्ष 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव गिद्दड़बाहा से जीत गए थे। यहां उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के हरदीप सिंह डिंपी को 1349 मतों से हराया था। अब दोबारा वड़िंग लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं और उनके सामने चुनाव मैदान में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए रवनीत सिंह बिट्टृ, शिअद से पूर्व विधायक रणजीत सिंह और आप से लुधियाना सेंट्रल से विधायक अशोक कुमार पप्पी पराशर चुनाव मैदान में है।
वड़िंग के लिए ये चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है, क्योंकि एक तो उनका मुकाबला पूर्व कांग्रेसी बिट्टू से है। दूसरा पंजाब कांग्रेस प्रधान के तौर पर भी उनका ये पहला लोकसभा चुनाव हैं। इसी तरह आप प्रत्याशी डॉ. राज कुमार चब्बेवाल ने पिछला लोकसभा चुनाव कांग्रेस पार्टी से होशियारपुर सीट पर लड़ा था, जहां वह भाजपा के सोमप्रकाश से 48,530 मतों के अंतर से हार गए थे। इसके बाद वह वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव में चब्बेवाल हलके से जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। इस लोकसभा चुनाव में दोबारा से उनकी होशियारपुर से ही चुनावी परीक्षा है। वह आप से चुनाव लड़ रहे हैं और इस बार वह वर्ष 2019 के नतीजों को पलटना चाहेंगे, लेकिन उनके सामने भाजपा से केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश की पत्नी अनिता सोमप्रकाश चुनाव मैदान में हैं। इसके आलावा शिअद से चार बार के विधायक व पूर्व मंत्री सोहन सिंह ठंडल और कांग्रेस से यामिनी गोमर भी उनको टक्कर दे रही हैं।
पिछले नतीजे बदलने की उम्मीद
पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों को बदलने की उम्मीद के साथ कांग्रेस प्रत्याशी सुखपाल सिंह खैरा संगरूर से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछला लोकसभा चुनाव उन्होंने पंजाब एकता पार्टी की तरफ से बठिंडा सीट पर लड़ा था, जिसमें वह हार गए थे। वर्ष 2021 में इस पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव कांग्रेस की सीट पर लड़ा था और वह भुलत्थ विधानसभा सीट पर तीसरी बार जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। अब विधानसभा जीतने के बाद वह फिर से लोकसभा चुनाव में उतरे हैं, लेकिन इस बार भी उनके लिए चुनाव आसान नहीं है। आप ने संगरूर से कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर पर दांव खेला है। इसी तरह खैरा के सामने शिअद से इकबाल सिंह झूंडा और शिअद अमृतसर से सिमरनजीत सिंह मान खुद चुनाव लड़ रहे हैं। मान यहां से मौजूदा सांसद भी है, क्योंकि वह इस सीट पर उप चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। भाजपा ने फिलहाल यहां से अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
धालीवाल भी दोबारा आजमा रहे किस्मत
वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव कुलदीप सिंह धालीवाल अमृतसर सीट से हार गए थे। यहां से गुरजीत सिंह औजला सांसद चुने गए थे। इसके बाद ही धालीवाल वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव में अजनाला सीट से जीत दर्ज करने में सफल रहे और आप सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे, लेकिन एक बार एक फिर से अमृतसर सीट ही लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार भी उनकी चुनौती कम नहीं है, क्योंकि इस सीट पर उनका मुकाबला अमेरिका में पूर्व भारतीय राजदूत भाजपा प्रत्याशी तरनजीत सिंह संधू से होगा। कांग्रेस से इस सीट पर मौजूदा सांसद गुरजीत सिंह औजला और शिअद से पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी मैदान में है।
ये विधायक भी लड़ रहे इस बार चुनाव
कई विधायक भी इस बार लोकसभा चुनाव के चुनावी अखाड़े में जीत की आस के साथ उतरे हुए हैं। इसमें कांग्रेस से पूर्व उप मुख्यमंत्री व विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा, लुधियाना सीट पर आप से विधायक आशोक पप्पी पराशर, फिरोजपुर से जगदीप काका बराड़, गुरदासपुर से अमनशेर कलसी, संगरूर से कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर, पटियाला से डॉ. बलबीर सिंह, बठिंडा से गुरमीत सिंह खुड्डियां और खडूर साहिब से लालजीत भुल्लर चुनाव लड़ रहे हैं।