-नौतोड़ भूमि को लेकर सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया के साथ की जियो रेफरेंसिंग
-मालिकाना हक को लेकर दाखिल की गई है याचिका, 40 हजार किसान हैं प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में 40 हजार किसानों के नौतोड़ जमीन के मालिकाना हक के मामले में अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को इस विवाद का निपटारा करने के लिए फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर का नाम प्रस्तावित करने का आदेश दिया है।
हरियाणा किसान कांग्रेस के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष व शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने एडवोकेट दीपांशु बंसल के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए न्यायालय को बताया कि 2017 में किसानों को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट को बताया गया कि लंबे समय से इस भूमि का मालिकाना हक देने की 40 हजार के करीब स्थानीय किसान मांग कर रहे हैं। वन विभाग ने कोर्ट में 2018 में झूठा शपथ पत्र देकर बताया था कि नौतोड़ की समस्या के समाधान के लिए वन विभाग ने आईएफएस ऑफिसर एमपी शर्मा को दो वर्ष के लिए फाॅरेस्ट सेटलमेंट अफसर नियुक्त कर दफ्तर समेत आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवा दी हैं और उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है। कोर्ट को बताया गया कि 59,998 एकड़ भूमि अधिग्रहण का फैसला लिया गया था, जिसके बाद कुल 50,807 एकड़ भूमि का वनक्षेत्र के लिए मुआवजा देकर अधिग्रहण किया गया। इसके बाद भूमि के मालिकाना हक पर विवाद हुआ था। इस विवाद के निपटारे के लिए बीते कुछ समय में प्रयास शुरू हुए। इस मामले में अब हाईकोर्ट को हरियाणा सरकार ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र में स्थित 14 भोज और 172 बास की मसावियो का डिजिटलाइजेशन और जियो रेफरेंसिंग का कार्य सर्वे ऑफ इंडिया के साथ मिलकर किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर पद पर नियुक्ति के लिए अब बिलकुल सही समय है। बीते कई वर्ष से यह पद रिक्त है और इसके चलते भूमि विवाद हल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब हरियाणा सरकार को इस पद के लिए नाम प्रस्तावित करने का आदेश दिया है। इस प्रस्ताव के बाद हाईकोर्ट नाम पर अंतिम फैसला लेगा।