फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस और भाजपा का दबदबा रहा है अंबाला सीट पर

Wed, 26 Mar 2014 05:04 PM IST
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब से अलग प्रदेश बनने के बाद हरियाणा में लोकसभा सीट अंबाला (आरक्षित) पर 1967 से 2009 तक 12 चुनाव हुए हैं। इनमें से छह बार कांग्रेस, पांच बार भाजपा और एक बार बसपा जीती।
विज्ञापन


बसपा को इनेलो से गठबंधन के सहारे जीत मिली जबकि भाजपा को भी इस सीट पर गठबंधन के बलबूते ही कामयाबी मिलती रही। इस सीट की खास बात यह भी रही कि यहां पार्टियों ने भी अपने उम्मीदवारों पर लंबे समय तक भरोसा बनाए रखा और उन्हें बार-बार चुनाव में उतारा।

अंबाला से चार बार रामप्रकाश, दो बार कुमारी सैलजा कांग्रेस के टिकट पर जीते जबकि सूरजभान तीन बार और रतन लाल कटारिया एक बार भाजपा के सांसद बने। अमन कुमार नागरा बसपा के टिकट पर जीतकर सांसद बने।
विज्ञापन


नागरा बसपा के टिकट पर पांच बार व हविपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं जबकि सूरजभान नौ बार और रामप्रकाश पांच बार चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन इस बार हालात बदले हैं। इनेलो, बसपा, कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा-हजकां का गठबंधन है तो पहली बार आम आदमी पार्टी (आप) भी मैदान में हैं।

इस बार मैदान में उतरे ये उम्मीदवार

रतन लाल कटारिया (भाजपा)
कटारिया चौथी बार इस सीट से मैदान में हैं। वे एक बार गठबंधन में जीते थे और एक बार हारे। अकेले लड़ते हुए भी वह चुनाव हार गए थे। पिछले चुनाव में भाजपा की गुटबाजी के कारण उनकी हार हुई। इस बार उन्हें देश में नरेंद्र मोदी की लहर को देखते हुए लाभ की उम्मीद है तो इनेलो से भाजपा का गठबंधन न होने का नुकसान भी झेलना पड़ सकता है।

राज कुमार वाल्मीकि (कांग्रेस)
वाल्मीकि समुदाय से संबंधित होने के कारण वाल्मीकि अनुसूचित जाति-ए वर्ग के वोटरों का फायदा मिल सकता है। लेकिन इस क्षेत्र से दो बार सांसद रहीं कुमारी सैलजा और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच मनमुटाव के कारण क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने का जो मुद्दा उठता रहा है, उसका खमियाजा वाल्मीकि को भुगतना पड़ सकता है। अंबाला शहर से कांग्रेसी विधायक विनोद शर्मा भी कांग्रेस छोड़ गए हैं, जिसका नुकसान भी वाल्मीकि को हो सकता है।

ये भी हैं मैदान में

डॉ. कुसुम शेरवाल
बसपा के पूर्व अध्यक्ष अशोक शेरवार की पत्नी डॉ. कुसुम शेरवाल 2000 में मुलाना हलके से बसपा टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। मुलाना भी अंबाला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। तब डा. कुसुम को करीब दस हजार वोट ही मिले थे। उनके पति अशोक शेरवाल भी मुलाना से ही 1996 में बसपा टिकट पर चुनाव लड़कर हार गए थे। बाद में वे इनेलो में शामिल हो गए। उन्हें इनेलो का स्थायी वोट बैंक का फायदा मिलने की उम्मीद है जबकि अनुसूचित जाति बी का वोट बंटने का नुकसान भी हो सकता है।

डॉ. कपूर सिंह
पेशे से इंजीनियर और जनस्वास्थ्य विभाग से एक्सईएन पद से रिटायर डॉ. कपूर सिंह पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। बसपा समर्थक रहे कपूर सिंह को हलके में नया चेहरा होने के कारण बसपा के स्थायी वोट पाने के लिए जोर लगाना पड़ेगा। इसी क्षेत्र से उनके साले एसपी सिंह भी आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। वह भी डा. कपूर के वोट काट सकते हैं।

ये हैं आम आदमी पार्टी के धुरंधर

एसपी सिंह
बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ सामाजिक कार्यों में जुटे एसपी सिंह आम आदमी पार्टी के आंदोलनों में भागे लेते रहे हैं। पंचकूला में सक्रिय रहे एसपी सिंह चुनाव में पहली बार उतरे हैं। वे इस लोकसभा क्षेत्र में पहचाना चेहरा भी नहीं हैं। फिर भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुहिम से जुड़े रहने का फायदा उन्हें मिल सकता है। हालांकि अंबाला में आम आदमी पार्टी का कोई पुराना कैडर नहीं है।

अंबाला में ज्यादातर उम्मीदवार पंचकूला निवासी
अंबाला लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे पांचों प्रमुख उम्मीदवार पंचकूला के निवासी हैं, इसलिए पंचकूला निवासी का ही सांसद बनना तय है। भाजपा के रतन लाल कटारिया मनसा देवी कांप्लेक्स, कांग्रेस के राज कुमार वाल्मीकि सेक्टर-12ए, इनेलो की डॉ. कुसम शेरवाल सेक्टर-16, बसपा के डॉ. कपूर सिंह सेक्टर-24 और आम आदमी पार्टी के एसपी सिंह भी पंचकूला में रह रहे हैं।

ऐसा रहा पिछले चुनावों का परिणाम

2009
उम्मीदवार------------------पार्टी------------------परिणाम
कुमारी सैलजा---------------कांग्रेस------------------जीत
रतन लाल कटारिया-----------भाजपा------------------हार
2004
कुमारी सैलजा----------------कांग्रेस------------------जीत
रतन लाल कटारिया-----------भाजपा------------------हार
1999
रतन लाल कटारिया------------भाजपा--------------जीत
फूल चंद मुलाना---------------कांग्रेस--------------हार
1998
अमन कुमार नागरा-------------बसपा------------------जीत
सूरजभान---------------------भाजपा------------------हार

ये भी रहे चुनाव ‌परिणाम

1996
सूरजभान------------------भाजपा------------------जीत
शेर सिंह------------------कांग्रेस------------------हार
1991
राम प्रकाश------------------कांग्रेस------------------जीत
सूरजभान------------------भाजपा------------------हार
1989
राम प्रकाश------------------कांग्रेस------------------जीत
सूरजभान------------------भाजपा------------------हार
1984
राम प्रकाश------------------कांग्रेस------------------जीत
सूरजभान------------------भाजपा------------------हार
विज्ञापन

इन चुनाव परिणामों को भी देखिए

1980
सूरजभान------------------जनता पार्टी------------------जीत
सोमनाथ------------------कांग्रेस------------------हार
1977
सूरजभान------------------बीएलडी------------------जीत
राम प्रकाश------------------कांग्रेस------------------हार
1971
राम प्रकाश------------------कांग्रेस------------------जीत
सूरजभान------------------जनसंघ------------------हार
1967
सूरजभान------------------जनसंघ------------------जीत
पी. वती------------------कांग्रेस------------------हार
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें