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पंजाब: 13 सीटों पर कांग्रेस के ये 13 धुरंधर

Thu, 27 Mar 2014 04:41 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़
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कांग्रेस ने बठिंडा सीट पीपीपी प्रधान मनप्रीत बादल को देने के बाद बाकी सभी सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। पार्टी हाईकमान ने इस बार पंजाब में सारी ताकत झोंकते हुए सभी दिग्गजों को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
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कांग्रेस के कई चेहरे ऐसे हैं, जिनकी चुनाव लड़ने की कोई उम्मीद ही नहीं थी। ऐन मौके पर बदली दिल्ली की सियासत ने सभी समीकरण बदल दिए। वहीं, दिग्गजों के उतरने के बाद पंजाब के चुनावी समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं।

ये हैं उम्मीदवार

अमृतसरः कैप्टन अमरिंदर सिंह
कई साल प्रदेश कांग्रेस प्रधान और 2002-2007 तक मुख्यमंत्री रहे। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद कांग्रेस छोड़ दी थी। बड़े कद और दमदार छवि वाले कैप्टन, भाजपा के राष्ट्रीय नेता अरुण जेटली के खिलाफ कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव हैं।

गुरदासपुरः प्रताप सिंह बाजवा
मौजूदा प्रदेश कांग्रेस प्रधान बाजवा संगठन का पुनर्गठन करने में लगे हुए हैं। विधायक और मंत्री रह चुके बाजवा ने 2009 में पहली बार विनोद खन्ना जैसे स्टार को हराकर संसद में कदम रखा था। इस बार भी उनका मुकाबला विनोद खन्ना से ही है।

ये भी हैं चुनाव मैदान में

पटियालाः परनीत कौर (69)
पिछले तीन बार से लगातार पटियाला सीट से चुनाव जीतीं, केंद्रीय राज्य मंत्री बनीं। अच्छी छवि और लोगों के साथ संपर्क। इस बार परनीत कौर का मुकाबला एक समय उनके खास सिपहसालार रहे दीपइंदर ढिल्लों से है।

श्री आनंदपुर साहिबः अंबिका सोनी (72)
पंजाब से राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय मंत्री रहीं। पार्टी प्रधान सोनिया गांधी की सियासी सलाहकार होने के कारण दिल्ली में अच्छा रसूख। अच्छी छवि, पार्टी में कोई विरोध नहीं। अंबिका सोनी की ससुराल इस हलके के गढ़शंकर में है।

ये भी आजमा रहे हैं किस्मत

फिरोजपुरः सुनील जाखड़ (60)
दिग्गज कांग्रेसी बलराम जाखड़ के पुत्र। पिछले तीन बार से लगातार अबोहर से जीतकर विधायक बने। इस बार पार्टी ने सीएलपी लीडर बनाया। सरकारी कॉलेज चंडीगढ़ से पढ़े, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। जाखड़ के रसूख को देखते हुए ऐन मौके पर उन्हें उतारा गया।

संगरूरः विजय इंदर सिंगला (42)
पंजाब यूथ कांग्रेस के पूर्व प्रधान विजय इंदर सिंगला की अगुवाई में पहली बार लोकतांत्रिक संगठन चुनाव हुए। जिस पर राहुल ने 2009 में उन्हें संगरूर सीट से टिकट से नवाजा। शिअद दिग्गज सुखदेव सिंह ढींढसा को हराकर उन्होंने पार्टी को निराश नहीं किया। इस बार भी सिंगला का मुकाबला ढींढसा से ही है।

इनको भी दिया गया है टिकट

लुधियानाः रवनीत बिट्टू (38)
पूर्व सीएम स्व. बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू पहले लोकतांत्रिक चुनाव जीत कर पंजाब यूथ कांग्रेस प्रधान बने। राहुल ने बिट्टू को भी आनंदपुर साहिब हलके से टिकट दिया। डॉ. दलजीत चीमा को हराकर वह संसद पहुंचे। वह लुधियाना के ही गांव कोटली में जन्मे, लुधियाना और चंडीगढ़ में पढ़े हैं।

होशियारपुरः मोहिंदर सिंह केपी (64)
दिग्गज नेता दर्शन सिंह केपी के पुत्र, पेशे से वकील। 1985, 1992 और 2002 में विधायक और मंत्री रहे। 2009 में नामी गायक हंसराज हंस को जालंधर से हरा कर लोक सभा पहुंचे। अंतर्कलह को देखते हुए पार्टी ने इस बार उन्हें होशियारपुर से उतारा है।

ये भी कांग्रेस के दिग्गज उम्मीदवार

जालंधरः चौधरी संतोख (63)
लॉ ग्रेजुएट चौधरी संतोख 1987 व 2002 में फिल्लौर से विधायक बने। हरचरण सिंह बराड़ और कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में मंत्री रहे। साफ छवि और पार्टी में कोई विरोध नहीं, इसीलिए जालंधर से उतारा गया है। संतोख के पुत्र बिक्रम चौधरी पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रधान हैं।

फतेहगढ़ साहिबः साधू सिंह धरमसोत (56)
1992 में यूथ कांग्रेस से सियासत में आए और अमलोह से पहली बार विधायक बने। बेअंत सिंह सरकार में मंत्री रहे। 1997 में चुनाव हार गए। उसके बाद से लगातार तीन बार विधायक बन चुके हैं। इस बार नाभा से जीते। बाजीगर बिरादरी से संबंधित धरमसोत का अमलोह में अच्छा प्रभाव है।

इन्हें भी आजमाया जा रहा है

फरीदकोटः जोगिंदर सिंह पंजगराईं (53)
2007 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजगराई सीट से लड़ाया। अकाली दिग्गज गुरदेव बादल को हराकर विधानसभा पहुंचे। 2012 में भी गुरदेव बादल को हराकर विधायक बने।

खडूर साहिबः हरमिंदर गिल (50)
आल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन से सियासी करिअर शुरू किया। ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय गिरफ्तार हुए। पिछली दो बार से पट्टी विधानसभा हलके से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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बठिंडा से खड़े हैं मनप्रीत बादल

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत चार बार विधायक और एक बार वित्तमंत्री रहे। बाद में बादल से वैचारिक मतभेद हुए। सामाजिक बदलाव का नारा देते हुए पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब का गठन कर 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन असफल रहे।

मनप्रीत दोनों जगह से हारे, उनके पिता गुरदेव बादल भी हारे। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। इस बार कांग्रेस ने समझौते के तहत उन्हें पंजाब की सबसे हॉट सीटों में से एक बठिंडा से उतारा है। जहां उनका मुकाबला अपने ही परिवार की बहू हरसिमरत कौर बादल से है।
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