लोकसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल में बगावत की तपिश तेजी से फैलने लगी है। टकसाली नेताओं की बगावत से सुखबीर और प्रकाश सिंह बादल की चिंता बढ़ने लगी है। सुखबीर सिंह बादल ने भी सख्ती के स्थान पर टकसाली नेताओं के आगे अब झुकना मुनासिब समझते हुए कहा कि अगर डॉ. रतन सिंह अजनाला कहेंगे तो वह अपना पद भी छोड़ देंगे। वह उनके लिए पारिवारिक सदस्य के बराबर हैं। पार्टी में संकट के बाद सुखबीर ने पहली बार एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बात कही। उनके इस बयान से शिअद में खलबली मच गयी है। माझा व मालवा के टकसाली अकाली सुखबीर को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।
मालवा से आने वाले सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा अपनी खराब सेहत का हवाला देकर पहले ही पार्टी की सक्रियता से अलग हो चुके हैं। इसके बाद अकाली दल के माझा से दिग्गज सांसद रणजीत सिंह बह्मपुरा, डॉ. रतन सिंह अजनाला, पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां ने भी मोर्चा खोल दिया। रतन सिंह अजनाला ने बगावत करते हुए साफ कह दिया कि बादल ने परिवारवाद को बढ़ावा दिया है। अब अकाली दल में नेताओं और वर्करों का कोई सम्मान व इज्जत नहीं है। प्रकाश सिंह बादल ने बहू हरसिमरत को केंद्र में मंत्री, पुत्र को अकाली दल का प्रधान और खुद को अकाली दल का संरक्षक और विक्रम मजीठिया को पार्टी का सर्वेसर्वा बना रखा है। वह शीघ्र ही बादल परिवार के खिलाफ एक अभियान शुरू करेंगे।
साथ ही माझा, दोआबा और मालवा में रैलियां कर बादल परिवार की धक्केशाही का पर्दाफाश करेंगे। इन रैलियों का नारा होगा ‘सुखबीर हटाओ- अकाली दल बचाओ। अकाली दल को अब बादल परिवार से मुक्त करना है। अजनाला की हुंकार से अकाली दल में जबरदस्त खलबली मच गयी है। शिअद सुप्रीमो ने भी टकसाली नेताओं के बढ़ते प्रभाव को देखकर अपना बयान दे दिया कि अगर अजनाला चाहते हैं तो वह इस्तीफा दे देते हैं। सुखबीर के इस बयान के बाद अकाली दल में युवा बिग्रेड व मजीठिया ग्रुप सुखबीर की हिमायत में खुलकर सामने आने लगा है।
टकसाली नेताओं से बात कर दूर करेंगे मतभेद
सुखबीर ने अजनाला के बारे में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया और कहा कि जल्द ही टकसाली नेताओं से बातचीत कर मतभेदों को दूर किया जाएगा। टकसाली नेता ही पार्टी की मजबूत नींव हैं। उनको पार्टी से अलग नहीं होने दिया जाएगा। अजनाला से पहले पार्टी के सीनियर नेता सुखदेव सिंह ढींढसा तथा रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा भी अकाली दल से सभी पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, सुखबीर की टीम अंदरखाते डैमेज कंट्रोल में जुट गई है और अजनाला व बह्मपुरा के कैंप को पूरी तरह से तोड़ने की तैयारी की जा रही है ताकि अगर बगावत खुलकर होती है तो दोनों को बड़ा समर्थन न मिल सके।
माझा के नेताओं को परेशानी मजीठिया से ज्यादा परेशानी
sukhbir badal
शिरोमणि अकाली दल में बगावत की तपिश तेजी से फैलने लगी है। टकसाली नेताओं की बगावत से सुखबीर और प्रकाश सिंह बादल की चिंता बढ़ने लगी है। माझा में सबसे बड़ी समस्या मजीठिया को लेकर पैदा हो गई है। पार्टी में जिस तेजी से मजीठिया ने अपना प्रभाव बढ़ाकर माझा अकाली दल पर अपना कब्जा किया है, उससे टकसाली अकाली नेताओं का परेशान होना स्वाभाविक है। मजीठिया को जब से माझा के जरनैल का नाम दिया गया है, तभी से सांसद रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा, सेवा सिंह सेखवां, रतन सिंह अजनाला ने पार्टी में अपने बगावती सुर शुरू कर दिए।
पार्टी के दिग्गज सुखदेव सिंह ढींढसा के त्यागपत्र के बाद से आग माझा की तरफ निकली, जो लंबे समय से सुलग रही थी। ढींढसा का दर्द भी यह था कि सबसे सीनियर अकाली सांसद होने के बावजूद उनको केंद्रीय मंत्री न बनाकर हरसिमरत कौर को स्थान दिया गया। सांसद ढींढसा ने जो नाराजगी जताई, उसका असर माझा में सुलग रही आग पर पड़ा जिससे वह और भड़क गई।
वहीं सुखबीर बादल के जीजा और पूर्व मंत्री आदेश प्रताप कैरों भी मजीठिया के बढ़ते प्रभाव से नाखुश हैं। अकाली सरकार के दौरान भी कैरों और मजीठिया में लगातार ठनी रही लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल किसी तरह दोनों को समझाबुझाकर आगे बढ़ते रहे। अब इस विवाद में कैरों ने चुप्पी साध ली है। उनकी चुप्पी भी अकाली दल को भारी पड़ सकती है।
माझा के टकसाली अकाली नेता भी एकजुट होना शुरू हो गए हैं। टकसाली नेताओं ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि जिस प्रकार से सुखबीर बादल पार्टी चला रहे हैं, उससे वे संतुष्ट नहीं हैैं। पिछले दिनों ढींढसा के इस्तीफा देने के बाद ही ब्रह्मपुरा, सेखवां और अजनाला ने भी इस्तीफा का मन बना लिया था। इसकी भनक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लग गई थी। माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के हस्तक्षेप के बाद इन नेताओं ने जल्दबाजी में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस करके यह स्पष्ट कर दिया कि वे इस्तीफा नहीं दे रहे हैैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर इन टकसाली नेताओं को मनाने की कोशिश ही नहीं की गई। ब्रह्मपुरा के बेटे पूर्व विधायक रविंदर ब्रह्मपुरा का कहना है कि शिअद के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद भी उनके पिता से किसी अकाली दल के नेता ने संपर्क नहीं किया। पार्टी के सीनियर नेता बताते हैं कि अकाली दल में टकसाली नेताओं को किनारे करने का पूरा गेम प्लान तैयार हो चुका है ताकि जो अकाली दल के नेता पार्टी में आगे आए, वह यस सर की भूमिका में हो।