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'आप' ने संगरूर में मुकाबले को बनाया त्रिकोणीय

Mon, 07 Apr 2014 05:19 PM IST
जसवीर सिंह भट्टी/अमर उजाला, संगरूर
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संगरूर सीट पर कांग्रेस और शिअद के बीच ही सख्त मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान को यहां से चुनाव मैदान में उतारकर न केवल इस सियासी जंग को दिलचस्प बना दिया है, बल्कि तीनों दलों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला भी बनता दिखाई दे रहा है।
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कांग्रेस हाईकमान ने राहुल ब्रिगेड विजयइंदर सिंगला पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी दंगल में उतारा है। सिंगला ने हलके में कई बड़े प्रोजेक्ट लगाकर यहां की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश की है और अपने बड़े प्रोजेक्टों के दम पर ही वे लोगों से वोट मांग रहे हैं।

हालांकि हलके के कई कांग्रेस विधायकों का सिंगला के साथ न चलना उनके लिए मुसीबत बना हुआ है। लेकिन पीपीपी और शिअद (लौंगोवाल) का समर्थन मिल जाने के बाद सिंगला को आक्सीजन जरूर मिल गई है। सिंगला को टक्कर देने के लिए शिअद ने अपने दिग्गज नेता सुखदेव सिंह ढींढसा को चुनाव मैदान में उतारा है।
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लेकिन ढींढसा के लिए भी संसद की डगर आसान नजर नहीं आ रही है क्योंकि उन्हें भी अपने पार्टी नेताओं के साथ-साथ लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है।

विजयइंदर सिंगला

कांग्रेस प्रत्याशी का पुश्तैनी गांव गाजेवास पटियाला में पड़ता है। इनके पिता संत राम सिंगला कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में थे। सिंगला संगरूर से वर्तमान सांसद हैं और वे दूसरी बार इस सीट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

उन्होंने अपना पहला चुनाव साल 2009 में लड़ा था और शिअद के दिग्गज नेता सुखदेव सिंह ढींढसा को करीब चालीस हजार मतों से हराया था।

चुनाव जीतने के बाद हलके में केंद्र के कई बड़े प्रोजेक्ट मंजूर करवाने में सिंगला सफल रहे। इस बार चुनाव जीतने के लिए सिंगला को नाराज कांग्रेसी विधायकों को साथ लेकर चलना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

सुखदेव सिंह ढींढसा

अकाली दल के प्रत्याशी सुखदेव सिंह ढींढसा शिअद के सेक्रेटरी जनरल हैं और चौथी बार चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ढींढसा का पुश्तैनी गांव उभावाल है। इनके पुत्र परमिंदर सिंह ढींढसा प्रदेश के वित्तमंत्री हैं।

1989 का लोकसभा चुनाव ढींढसा हार गए थे। इसके बाद 1997 में हलका सुनाम से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन इसमें भी वह कामयाब नहीं हुए थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में ढींढसा ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर यह सीट शिअद की झोली में डाली।

2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनका सामना कांग्रेस उम्मीदवार से हुआ, लेकिन यह चुनाव भी ढींढसा हार गए थे। इस बार चुनाव में ढींढसा दोनों प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं और पंजाब सरकार द्वारा करवाए विकास के बदले वोट मांग रहे हैं।

भगवंत मान

आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी भगवंत मान प्रसिद्ध कॉमेडी कलाकार हैं और संगरूर के ही गांव सतौज के रहने वाले हैं। मान ने अपने सियासी कैरियर की शुरुआत हलका लहरा से 2012 के विधानसभा चुनाव में की थी।

उन्होंने पीपुल्स पार्टी की टिकट पर यह चुनाव लड़ा था, हालांकि वे चुनाव हार गए थे। पीपीपी और साझा मोरचा द्वारा कांग्रेस को समर्थन देने के बाद भगवंत मान ने आप का दामन थाम लिया और उन्हें पार्टी ने संगरूर से चुनाव मैदान में उतारा है।

चुनाव हार जाने के बाद दोबारा हलका लहरा में न जाना मान के लिए भारी पड़ रहा है। हालांकि अपने चुटकीले अंदाज में चुनाव प्रचार दौरान मान अपने दोनों विरोधियों पर शब्दों के बाण चला रहे हैं और अब की बार अपने लिए लोगों से एक मौका मांग रहे हैं।
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संगरूर लोकसभा क्षेत्र की ये है स्थिति

संगरूर लोकसभा सीट में कुल नौ विधान सभा हलके हैं। इनमें से पांच पर कांग्रेस का कब्जा है और चार पर अकाली दल का कब्जा है।
वोटरों की कुल संख्या-14 लाख दो हजार तीन सौ दस
पुरुष मतदाता-सात लाख 46 हजार 286
महिला मतदाता - 6 लाख 56 हजार 024

पिछले चुनाव में वोट 77 प्रतिशत रही थी।
लोकसभा संगरूर सीट दो जिलों में बंटी हुई है।
संगरूर और बरनाला
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