पंजाब में तीस अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। उम्मीदवारों ने प्रचार के साथ-साथ अब नामांकन पत्र भी दाखिल करने शुरू कर दिए हैं। सभी दल जनता को अपने हक में करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं, लेकिन पंजाब के मुसलमानों ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, उनकी खामोशी राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा रही है।
पंजाब के शाही इमाम एवं मजलिस अहरार इस्लाम हिंद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने साफ किया है कि सूबे के मुसलमानों से राय करके ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। इसके लिए सूबे में तुरंत रायशुमारी अभियान शुरू किया जा रहा है।
शाही इमाम ने कहा कि पंजाबी मुसलमान पिछले साठ साल से धोखा खा रहा है। उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा, इसलिए अब सोच समझ कर ही फैसला किया जाएगा।
पंजाब में करीब 25 लाख मुसलमान हैं। इनमें से 12 लाख ग्रामीण वोटर एवं पांच लाख शहरी वोटर हैं। सूबे में लुधियाना, पटियाला, अमृतसर, बठिंडा, जालंधर, गुरदासपुर सीटों पर 35 से 50 हजार तक और संगरूर में एक लाख से अधिक मुस्लिम वोटर हैं। बठिंडा सीट पर भी करीब 37 हजार वोटर मुसलमान हैं।
ऐसे में मुसलमान वोटर चुनाव परिणाम को बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सभी दलों के नेता अपने हक में वोट पाने के लिए सूबे के शाही इमाम के संपर्क में हैं। लेकिन उन्होंने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है। पहले कांग्रेस और भाजपा ही विकल्प रहे हैं, लेकिन अब आम आदमी पार्टी भी नया राजनीतिक विकल्प बन कर उभरी है।
शाही इमाम का कहना है कि केंद्र की सरकारें अल्पसंख्यकों के हितों की पूरी तरह से रक्षा नहीं कर पाई हैं। हर पार्टी वादा तो करती है, लेकिन उसे निभाती नहीं।
हालत यह है कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट तक को लागू नहीं किया गया है। शाही इमाम ने कहा कि राजनीतिक दल मुसलमानों के वोट लेने के लिए तो तत्पर रहते हैं, लेकिन सत्ता में हिस्सेदारी देने को तैयार नहीं। उन्होंने कहा कि पंजाब में ओबीसी कैटेगरी में मुसलमानों को आरक्षण नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के मुसलमान की मांग है कि केंद्र सरकार की सभी स्कीमों का बराबर लाभ मुसलमानों को दिया जाए। नौकरियों में मुसलमानों को प्राथमिकता दी जाए।
मुस्लिम इलाकों में थानों एवं प्रशासन में मुस्लिम अफसर तैनात किए जाएं। शाही इमाम ने कहा कि अरबों रुपये की वक्फ बोर्ड की जमीन बर्बाद हो रही है। इसके लिए सूबे और जिले में कमेटी बनी और वहीं बोर्ड से संबंधित फैसले ले।