लुधियाना संसदीय सीट से इस बार राजनीतिक चक्रव्यूह में चार दिग्गज उलझे हैं, ऐसे में इस सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प होने के आसार हैं। यहां पर कांग्रेस और अकाली दल दोनों को ही भितरघात का खतरा है।
लुधियाना से शिरोमणि अकाली दल ने दाखा के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली को चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का पर दांव आजमाया है। केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी की खराब सेहत के कारण कांग्रेस ने श्री आनंदपुर साहिब से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को चुनाव मैदान में उतार दिया है।
इन सब के बीच शिअद से बागी सिमरजीत सिंह बैंस भी भाग्य आजमा रहे हैं। इन चारों दिग्गजों को अपनी-अपनी जीत का पूरा भरोसा है, लेकिन जनता का मन क्या बन रहा है यह 16 मई को ही साफ हो पाएगा।
ये है लुधियाना सीट का गणित
लुधियाना में कुल 15,24,441 वोट हैं, इनमें से पुरुष वोटर 8,16,267 और महिला वोटर 7,08,174 हैं। यहां पर 1652 पोलिंग बूथ और 748 पोलिंग स्टेशन हैं। इनमें शहरी एवं सेमी शहरी मतदाताओं की संख्या 10,62,560 है, जबकि ग्रामीण वोटरों की गिनती 4,61,881 है। पचास साल से कम उम्र के वोटरों की संख्या 11.20 लाख है।
वर्ष 2009 के चुनाव में 64.77 फीसदी वोट डाले गए थे। लुधियाना सीट पर नौ विस हलके हैं, इनमें शहर के छह जिनमें लुधियाना पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण के अलावा सेंट्रल और आत्मनगर शामिल हैं। इसके अलावा तीन ग्रामीण हलकों में दाखा, गिल और जगरांव शामिल हैं।
इसमें सबसे बड़ा हलका गिल है, यहां पर 225043 वोट हैं, जबकि सबसे छोटा लुधियाना दक्षिण है, यहां पर 142031 वोट हैं। 2009 के चुनाव में कांग्रेस के मनीष तिवारी ने शिअद उम्मीदवार गुरचरण सिंह गालिब को 1,13,482 वोट से परास्त किया था।
लुधियाना के छह शहरी हलकों में तीन कांग्रेस के पास, एक शिअद और दो आजाद बैंस ब्रदर्स के पास हैं। जबकि तीनों ग्रामीण हलकों में शिअद के विधायक परचम लहरा रहे हैं। साफ है कि शिअद को शहर में जमीन तैयार करने के लिए खूब पसीना बहाना होगा।
ये हैं लुधियाना की समस्याएं
लुधियाना पंजाब का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर है। यहां पर कमजोर औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा रिहायशी इलाकों में बसी इंडस्ट्री को नई जगह बसाना बड़ी चुनौती है। इसके अलावा प्रदूषण, बेतहाशा ट्रैफिक, सफाई, बुड्ढा नाला, बेहतर एयरपोर्ट की कमी बड़ी समस्याएं हैं।
ये उम्मीदवार है मैदान में लुधियाना से
कांग्रेस: रवनीत सिंह बिट्टू शेरे पंजाब एवं पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद हैं। लुधियाना जिले में उनका पुश्तैनी घर है, लेकिन हलका उनके लिए नया है। लुधियाना की जनता के साथ उनका सीधा संपर्क नहीं रहा। बिट्टू को पार्टी के अंदर और बाहर की चुनौतियों से एक साथ लड़ना होगा। गुटबाजी खत्म कर सभी को साथ लेकर चलना होगा।
शिअद: मनप्रीत सिंह अयाली हलका दाखा से विधायक और ग्रामीण इलाकों में इनकी अच्छी पकड़ है। अयाली ने जिला परिषद के चेयरमैन के अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया था। अयाली ने अपनी कामयाबी के लिए विकास को ही मंत्र बनाया है। अयाली के लिए भी पार्टी के भीतर की गुटबाजी को लगाम लगाकर सभी को साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती है।
इन्हें भी दिया गया है मौका
आप: एचएस फुल्का लुधियाना के लोगों के लिए नया राजनीतिक चेहरा है। फुल्का ने 1984 के दंगाें में सिखों को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। फुल्का जीत के लिए दिन रात लगातार पसीना बहा रहे हैं। फुल्का आम आदमी पार्टी की नीतियों को बताकर लोगों से वोट मांग रहे हैं।
आजाद: सिमरजीत सिंह बैंस: अकाली दल से बागी सिमरजीत सिंह बैंस की शहरी इलाके में अच्छी पकड़ है। शिअद के वोट बैंक में बैंस सेंधमारी कर सकते हैं। जीत के लिए शहर और ग्रामीण इलाकों में कर रहे हैं जोरदार प्रचार।