हरियाणा में नॉन एससीएस कोटे से आईएएस की सीट के लिए नॉमिनेशन करने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा है। प्रदेश के लोकायुक्त की ओर से मामले में जांच से इनकार को पंचकूला निवासी रविंदर कुमार ने याचिका दाखिल कर चुनौती दी है।
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हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर को केस की सुनवाई तय की है। याची रविंदर कुमार ने नॉन एचसीएस श्रेणी से आईएएस केएक पद के लिए नॉमिनेशन करने के मामले में दिए गए लोकायुक्त के आदेश पर आपत्ति जताई है।
कहा है कि हरियाणा सरकार ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा की बेटी डॉ. आशा शर्मा और प्रिंसीपल सेक्रेटरी आरके खुल्लर की पत्नी डॉ. सोनिया त्रिखा खुल्लर को आईएएस बनाने के लिए योग्य लोगों के नाम को नजरअंदाज किया।
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याची ने कहा कि इस मामले में उन्होंने लोकायुक्त से शिकायत की थी। इस पर प्राथमिक जांच होनी चाहिए थी। यदि जांच में कुछ तथ्य सामने आते तो आगे रेगुलर जांच के आदेश दिए जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
नॉन एससीएस कोटे से आईएएस की सीट के लिए नॉमिनेशन का मामला
कोर्ट
- फोटो : file photo
आरोप है कि मामले में मुख्यमंत्री की भूमिका भी सवालों के घेरे है। याची ने खुल्लर पर आरोप लगाया है कि हेल्थ विभाग उनके पास होने के चलते डायरेक्ट व इनडायरेक्ट तरीके से उन्होंने स्क्रीनिंग कमेटी को प्रभावित किया।
ताकि उनकी पत्नी का ही चयन हो। पूरी मेरिट से बाकी सभी नामों को दरकिनार कर केवल पांच नामों को चुना गया। हालांकि यूपीएसई ने एसीआर अधूरी होने के चलते इन नामों को वापस भेज दिया।
इसके बाद एक बार फिर से हरियाणा सरकार ने नामों को यूपीएसई को भेजा, जिसे यूपीएसई ने यह कहते हुए वापस भेज दिया कि हरियाणा सरकार ने कैट द्वारा दिए गए स्टे का जिक्र नहीं किया।
याची ने इस बारे में लोकायुक्त से शिकायत करते हुए प्रकरण की जांच करने की अपील की थी। हालांकि लोकायुक्त की तरफ से अपील खारिज कर दी गई। याची ने कहा है कि लोकायुक्त ने इस याचिका को खारिज करते हुए लोकायुक्त एक्ट 2002 का पालन नहीं किया, जिसके अनुसार प्राथमिक जांच अनिवार्य थी।
हरियाणा सरकार द्वारा यूपीएससी के तहत मांगे गए स्टेट आईएएस कोटे की एक अदद सीट के लिए नॉन एससीएस अधिकारियों से आवेदन मांगे गए थे। करीब डेढ़ दर्जन आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की छटनी करने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई, जिसका चेयरमैन चीफ सेक्रेटरी को बनाया गया। कमेटी ने अपनी सिफारिशें सौंपते हुए, पांच नामों की सूची तैयार की और इस सूची में आशा शर्मा, गुरमीत कौर, रामेश्वर मैहरा, राकेश तलवार तथा सोनिया त्रिखा का नाम शामिल किया गया।
कमेटी ने अपनी सिफारिशों के साथ ही यह भी कहा कि भारत सरकार और हरियाणा सरकार दोनों ही लड़कियों की शिक्षा और महिला उत्थान की दिशा में काम कर रही है। यदि इस पद पर महिला की नियुक्ति होती है, तो यह इस दिशा में अहम होगा। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले लाजपत राय ने इस बारे में कैट में याचिका दाखिल की।
कैट को बताया गया कि इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (अप्वाइंटमेंट बाय सेलेक्शन) रेगुलेशन 1997 के अनुसार इस प्रकार की कोई कंडीशन या क्राइटेरिया नहीं है, जिसके तहत महिलाओं के नाम को ही प्राथमिकता देने की बात कही जाए।
याची द्वारा उठाए गए सवालों पर कैट ने यूपीएससी को निर्देश दिए थे कि वे 30 जून को भेजी गई सूची में से चयन की प्रक्रिया पर आगे कोई फैसला न लें। इससे पूर्व यूपीएससी द्वारा आशा शर्मा, गुरमीत कौर और सोनिया त्रिखा के नाम के प्रस्ताव के साथ भेजी गई एलिजिबिलिटी लिस्ट पूरी न होने और एसीआर पूरी न होने की बात कहते हुए वापस भेज दिया था और इसे नए सिरे से पूरा कर भेजने को कहा गया था।
कैट की ओर से 8 अगस्त को यूपीएससी को सेलेक्शन प्रॉसेस फाइनल न करने के आदेश दिए गए थे और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया गया था। बावजूद इसके सरकार ने दोबारा सूची भेज दी। इस पर यूपीएससी ने पत्र लिखकर कहा कि हरियाणा सरकार ने कैट के केस की जानकारी नहीं दी, जिसके चलते इस सूची को स्वीकार नहीं कर सकते हैं।