लोकसभा चुनाव में हरियाणा में इस बार जातीय कारक धरे के धरे रह गए। पहली बार यहां जाट और गैर जाट का फैक्टर काम नहीं कर पाया, बल्कि हरियाणा के मतदाताओं ने दिल खोलकर हरियाणा एक-हरियाणवी एक की परपंरा को आगे बढ़ाते हुए एक दूसरे जाति के प्रत्याशियों को वोट दिए हैं।
राव दान सिंह को नहीं मिले अपनी ही जाति के वोट, जाटलैंड में जीते
भिवानी सीट पर कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों को देखते हुए भाजपा के जाट चेहरे धर्मबीर सिंह के सामने श्रुति चौधरी की टिकट काटकर राव दान सिंह को मैदान में उतारा था। कांग्रेस को उम्मीद थी कि हुड्डा के चेहरे पर जाट और राव दान सिंह चेहरे पर अहीर वोट बैंक मिलेगा, लेकिन कांग्रेस का यह दांव उलटा पड़ गया। राव दान सिंह अपने ही हलके महेंद्रगढ़ में हार गए, जबकि भिवानी जिले के विधानसभा सीटों पर उन्होंने जीत दर्ज की। इनमें बाढ़ड़ा, लौहारू और चरखीदादरी विधानसभा आती हैं। वहीं, जातिगत फेक्टर को दरकिनार करते हुए अहीरवाल ने चौधरी धर्मबीर को अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल और नांगल चौधरी में एक तरफा जीत दिलाई।
अहीरवाल में भी जीते दीपेंद्र
रोहतक सीट पर कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा को न केवल अपनी जाट लैंड पर भारी बहुमत मिला, बल्कि अहीरवाल की सीट कोसली में भी उनको अहीरों के दिल खोलकर वोट मिले। पिछली बार इसी विधानसभा सीट से दीपेंद्र हुड्डा को 74 हजार से अधिक वोटों से हार मिली थी। इस बार वह भाजपा के अरविंद शर्मा से यहां से 2 वोटों से आगे रहे।
मराठा को रोड़ और अभय चाैटाला को जाटों का नहीं मिला साथ
करनाल से एनसीपी के उम्मीदवार वीरेंद्र मराठा अपने रोड़ समाज के दम पर मैदान में उतरे थे, लेकिन समाज ने उनको सिरे से नकार दिया। यहां पर समाज के 1.75 लाख मतदाता हैं, लेकिन मराठा को मात्र 30 हजार वोटों से सब्र करना पड़ा। मराठा द्वारा पंजाबी समाज को लेकर की गई विवादित टिप्पणी से पंजाबी समाज एकजुट हो गया और मनोहर लाल की जीत तय की। दूसरा, कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक जाट वोट बैंक 4.50 लाख मतदाता हैं। इन्हीं को देखते हुए इनेलो के अभय चौटाला कुरुक्षेत्र के रण में उतरे थे, लेकिन जाटों ने उन पर विश्वास नहीं जताया।
यहां सामान्य और एससी मतदाताओं ने तय की जीत
आरक्षित अंबाला और सिरसा की सीटों की बात करें तो इन दोनों ही सीटों पर अनुसूचित जाति और सामान्य जाति के मतदाताओं ने खुलकर कांग्रेस का वोट दिए। सिख, जाट और एससी मतदाताओं की एकजुटता ने दोनों सीटें कांग्रेस के खाते में डाल दी। हालांकि, भाजपा की बंतो कटारिया और अशोक तंवर को पिछड़ा वर्ग और सामान्य श्रेणी की जातियों के भी वोट मिले, लेकिन इनका प्रतिशत कम रहा।
मुस्लिम बहुल इलाकों में राज बब्बर की बढ़त
गुरुग्राम लोकसभा सीट पर इस बार उल्टफेर रहा। राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल के गढ़ में पहले के मुकाबले कमजोर पड़ते नजर आए। पिछली बार के मुकाबले बावल और रेवाड़ी हलके में 22 हजार और 36 हजार वोटों से ही लीड मिली। गुरुग्राम शहर और जाट बहुल बादशाहपुर विधानसभा सीट से राव को बढ़त मिली तब जाकर वह राज बब्बर से अपनी सीट बचा पाए।