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लोकसभा चुनाव 2019: चंडीगढ़ में पहली बार ट्रांसजेंडर खुद की पहचान से डालेंगे वोट, मिला अधिकार

Thu, 16 May 2019 03:50 PM IST
खुशबू गोयल रीतिका पठानियां, अमर उजाला, चंडीगढ़
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किन्नर स्टूडेंट धनंजय
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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में महिला या पुरुष की पहचान से मतदान करने वाले ट्रांसजेंडर इस बार अपनी खुद की पहचान से मतदान करेंगे। सिटी में 19 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव में 30 ट्रांसजेंडर मतदान करेंगे। ट्रांसजेंडर लोगों ने बताया कि 15 अप्रैल 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि ट्रांसजेंडरों को पुरुष या महिला के समान अधिकार प्रदान किए जाएं और 6 माह के भीतर नियम बनाए जाएं, लेकिन एक दो माह के भीतर चुनाव होने के कारण तब ट्रांसजेंडर्स को अपनी खुद की पहचान से मतदान करने का अधिकार नहीं मिल पाया था। ऐसे में उन्हें महिला मतदाताओं की पहचान से मतदान करना पड़ा था।

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2014 के बाद बदले हालात, मिले अधिकार
पंजाब यूनिवर्सिटी के पहले ट्रांसजेंडर स्टूडेंट धनंजय मंगलमुखी ने बताया कि ट्रांसजेंडर्स के पास जब अधिकार नहीं थे तो वह अपने आप को आम लोगों से अलग समझते थे। उन्हें लगता था कि वह इस देश के नागरिक नहीं हैं, लेकिन जब 2014 के बाद हालात बदले तो बहुत से लोग अपनी पहचान उजागर करने लगे और अपने अधिकारों के लिए लड़ने लगे। फिर चाहे लड़ाई पढ़ाई की हो या मेडिकल सुविधा की। उन्होंने बताया कि वह ऐेसा सांसद चाहते हैं जो लाइन में सबसे आगे बैठे लोगों के बारे में सोचने की बजाय अंत में खड़े लोगों के बारे में भी सोचे।

तीन लोकसभा चुनाव में मिली महिला वोटर की पहचान

मंगलमुखी ट्रांसजेंडर समुदाय की डायरेक्टर काजल मंगलमुखी ने बताया कि पहली तीन लोकसभा चुनाव में वह महिला वोटर बनकर वोट दे चुकी हैं। इस बार के लोकसभा चुनाव में वह पहली बार ट्रांसजेंडर बनकर वोट दे रही हैं। उनका कहना है कि वह ऐसी सांसद चाहती हैं जो सभी जेंडर्स के बारे में समान सोच रखे और सबकी भलाई के लिए कार्य करे।

पहली बार मिली अपनी पहचान
ट्रांसजेंडर बन्नी राणा ने बताया कि उन्हें खुशी है कि वह पहली बार अपनी खुद की पहचान से वोट देंगी। वह चाहती हैं इस बार जो भी सांसद बने वह उनके बारे में भी सोचे। उनके लिए भी नियम बनाए। ट्रांसजेंडर्स को शेल्टर होम और फ्री एजुकेशन की सुविधा उपलब्ध करवाए।
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ट्रांसजेंडर्स की मुख्य मांगें

- ट्रांसजेंडर्स के लिए सिटी में पब्लिक टॉयलेट बनाए जाएं
- लोन या इंश्योरेंस की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए
- हाउस अलॉटमेंट की जाए
- सभी जेंडर्स को ध्यान में रखकर पॉलिसी बनाई जाए
- संसद में ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन बिल 2014 में सुनाए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार बनवाया जाए
- ट्रांसजेंडर्स के लिए कानून बनाए जाए कि उनके साथ दुष्कर्म हो तो कौन से एक्ट के तहत सजा होगी
- पासबुक में महिला जेंडर की बजाए ट्रांसजेंडर लिखा जाए
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