वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में महिला या पुरुष की पहचान से मतदान करने वाले ट्रांसजेंडर इस बार अपनी खुद की पहचान से मतदान करेंगे। सिटी में 19 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव में 30 ट्रांसजेंडर मतदान करेंगे। ट्रांसजेंडर लोगों ने बताया कि 15 अप्रैल 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि ट्रांसजेंडरों को पुरुष या महिला के समान अधिकार प्रदान किए जाएं और 6 माह के भीतर नियम बनाए जाएं, लेकिन एक दो माह के भीतर चुनाव होने के कारण तब ट्रांसजेंडर्स को अपनी खुद की पहचान से मतदान करने का अधिकार नहीं मिल पाया था। ऐसे में उन्हें महिला मतदाताओं की पहचान से मतदान करना पड़ा था।
2014 के बाद बदले हालात, मिले अधिकार
पंजाब यूनिवर्सिटी के पहले ट्रांसजेंडर स्टूडेंट धनंजय मंगलमुखी ने बताया कि ट्रांसजेंडर्स के पास जब अधिकार नहीं थे तो वह अपने आप को आम लोगों से अलग समझते थे। उन्हें लगता था कि वह इस देश के नागरिक नहीं हैं, लेकिन जब 2014 के बाद हालात बदले तो बहुत से लोग अपनी पहचान उजागर करने लगे और अपने अधिकारों के लिए लड़ने लगे। फिर चाहे लड़ाई पढ़ाई की हो या मेडिकल सुविधा की। उन्होंने बताया कि वह ऐेसा सांसद चाहते हैं जो लाइन में सबसे आगे बैठे लोगों के बारे में सोचने की बजाय अंत में खड़े लोगों के बारे में भी सोचे।