सिरसा संसदीय क्षेत्र के लिए कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवारों का एलान हो चुका है। विपक्षी दलों जजपा और इनेलो प्रत्याशियों का मैदान में आना अभी बाकी है। सिरसा सीट से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए इस बार का लोकसभा चुनाव अलग होगा। मौजूदा सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती होगी।
सिरसा की जनता ने आज तक किसी नेता को जीत की हैट्रिक बनाने का मौका नहीं दिया है। हालांकि पांच बार ऐसा मौका आया है, जब कोई सांसद चुनावी जीत की हैट्रिक बनाने की दहलीज पर पहुंचा है, लेकिन वह दहलीज लक्ष्मण रेखा बन गई और कोई इसे पार नहीं कर सका।
अशोक तंवर सिरसा से रहे हैं एक बार सांसद
2019 का लोकसभा चुनाव भी किसी की हैट्रिक का गवाह नहीं बनेगा। मौजूदा सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी दोबारा टिकट की उम्मीद में हैं। उन्हें टिकट मिलता है तो ये उनके लिए दूसरा चुनाव होगा। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर 2009 में यहां से सांसद थे, जबकि वह 2014 में हार गए।
ये प्रत्याशी जीत की हैट्रिक लगाने से चूके
कुमारी सैलजा के पिता दलबीर सिंह दो बार हैट्रिक के करीब पहुंचे, लेकिन दोनों बार तीसरे चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। सबसे पहले दलबीर सिंह 1967-71 में सांसद बने, इसके बाद अगले प्लान 1971-1977 तक वो दोबारा सांसद बने। 1977 में जनता पार्टी की आंधी में कांग्रेसी उम्मीदवार दलबीर सिंह हैट्रिक बनाने से चूक गए।
इसके बाद 1980 से 1988 तक वो लगातार दो बार फिर से सांसद बने। इसके बाद हेतराम 1988-89 एवं 1989-1991 तक लगातार दो बार सांसद चुने गए। 1991 से 1998 तक दलबीर सिंह की बेटी कुमारी सैलजा यहां से दो बार सांसद बनीं, लेकिन वह भी सिरसा से हैट्रिक नहीं लगा सकी। उनके विजय रथ को इनेलो के सुशील इंदौरा ने रोका।
सुशील इंदौरा खुद लगातार दो बार सांसद बने, लेकिन तीसरा प्लान उन्हें भी नहीं मिल सका। इंदौरा 1998 से लेकर 2004 तक वाजपेयी सरकार के दौरान सिरसा के सांसद थे। इसके बाद कोई सांसद लगातार दूसरी बार भी सिरसा सीट के लिए नहीं चुना जा सका।