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पंजाब सीएम की दो टूक चेतावनी, बोले- लोकसभा चुनाव नहीं जीते तो कैबिनेट से निकाल दिया जाएगा

Wed, 24 Apr 2019 05:23 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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अमरिंदर सिंह
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को साफ कर दिया कि कांग्रेस ने पंजाब में उम्मीदवारों की जीत की जिम्मेदारी संबंधित हलकों में मंत्रियों और विधायकों पर डाल दी है। इस तरह इन मंत्रियों और विधायकों का प्रदर्शन भी तय कर दिया गया है।
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उन्होंने बताया कि यह फैसला कांग्रेस आलाकमान ने राहुल गांधी के नेतृत्व में लिया है, ताकि पार्टी के ‘मिशन 13’ को प्राप्त करने के लिए जारी अभियान में तेजी लाई जा सके। आलाकमान के निर्देश के अनुसार, पंजाब में जो मंत्री कांग्रेस के लिए जीत सुनिश्चित करने में सफल नहीं होते, खासकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, को कैबिनेट से हटा दिया जाएगा।

कांग्रेस विधायकों के मामले में, यह निर्णय लिया गया है कि जो लोग अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस के विजयी प्रदर्शन करने में विफल रहते हैं, उन्हें अगले विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए नहीं गिना जाएगा। इसके साथ ही पार्टी ने बोर्ड-निगमों के चेयरमैन पदों के आवंटन के मानदंडों को भी अधिक कठोर बना दिया है।
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अपने रुख को कड़ा करते हुए, कांग्रेस ने फैसला किया है कि बोर्ड-निगमों के चेयरमैन पद लोकसभा चुनावों में नेताओं के व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर आवंटित किए जाएंगे। कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि प्रदर्शन और वरिष्ठता बोर्ड और निगमों के लिए उनकी पात्रता निर्धारित करने वाले मापदंड नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फैसलों के पीछे का उद्देश्य, पार्टी में एक प्रदर्शन-आधारित संस्कृति को बढ़ावा देना है। राहुल उन पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत करने के पक्ष में थे, जो धरातल पर कुछ विशेष करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से लोगों और पार्टी के बीच की खाई को पाटना चाहते हैं।

2014 में पंजाब की आधी सीटों पर रही थी कांटे की टक्कर

इस बार भी मुकाबले के कडे़ होने के आसार नजर आ रहे हैं। नए सियासी दलों के चुनाव मैदान में आने से वोट विभाजन का दायरा बढ़ने की संभावना है। पिछले चुनाव में बठिंडा सीट से अकाली भाजपा गठबंधन की टिकट पर चुनाव लड़ने वाली केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, होशियारपुर से भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला, पटियाला से आप के धर्मवीर गांधी और लुधियाना सीट से कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू कांटे की टक्कर में अपनी सीटें बचाने में सफल रहे थे।

बठिंडा सीट पर हरसिमरत कौर बादल का सीधा मुकाबला अपने देवर मनप्रीत सिंह बादल से था और वह 1.65 फीसदी के अंतर से चुनाव जीत पाई थीं। पटियाला से आप के धर्मवीर गांधी का मुकाबला कांग्रेस की परनीत कौर और अकाली दल के दीपइंदर सिंह के साथ था। त्रिकोणीय मुकाबले में धर्मवीर गांधी महज 1.87 फीसदी के अंतर से चुनाव जीते थे। होशियारपुर से विजय सांपला 1.41 फीसदी के अंतर से चुनाव जीते थे। उन्हें कांग्रेस के मोहिंदर सिंह से कड़ी चुनौती मिली थी।
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लुधियाना में वोटों के चार भागों में विभाजित होने के चलते कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू सिर्फ 27 फीसदी वोट लेकर 1.79 फीसदी के अंतर से चुनाव जीत गए थे। यहां आप को पच्चीस फीसदी, अकाली दल को 23 फीसदी व लोक इंसाफ पार्टी को करीब 20 फीसदी वोट मिले थे। फिरोजपुर सीट से अकाली दल के शेर सिंह घुबाया 2.84 फीसदी वोट के अंतर से कांग्रेस के सुनील जाखड़ को हराने में सफल रहे थे। श्री आनंदपुर साहिब संसदीय क्षेत्र से अकाली दल के ही प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने मात्र दो फीसदी के फर्क से कांग्रेस की दिग्गज नेत्री अंबिका सोनी को हराया था। यहां आप के हिम्मत सिंह को 28 फीसदी मत मिले थे।   

पिछले लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी जीत संगरूर से आप के भगवंत मान के हिस्से आई थी। उन्होंने 19 फीसदी से ज्यादा अंतर से चुनाव जीता। जबकि फरीदकोट से आप ही के प्रत्याशी प्रोफेसर साधू सिंह करीब 17 फीसदी के अंतर से चुनाव जीते थे। इस बार चुनाव मैदान में दो नए दलों अकाली दल टकसाली और पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस ने हुंकार भर दी है। ऐसे हालात में पंजाब में वोटों के ज्यादा विभाजन के आसार नजर आ रहे हैं। लिहाजा आने वाला वक्त ही बताएगा कि वोटों का विभाजन किस सियासी दल पर भारी पडे़गा।
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