भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कहने के बावजूद अब तक शिरोमणि अकाली दल और भाजपा में निचले स्तर पर समन्वय नहीं बन सका। जबकि, लोकसभा चुनाव में सिर्फ दो महीने ही बचे हैं। जानकारी के मुताबिक, शाह को यह फीडबैक मिला था कि दोनों दलों के बीच निचले स्तर पर कोई तालमेल नहीं है। दस साल के शासन के दौरान जिला स्तर पर सिर्फ शिअद नेताओं की चली, भाजपाइयों को पूछा तक नहीं गया।
केंद्र की सत्ता हासिल करने की आस में एक-एक सीट कीमती मान कर चल रहे भाजपा नेतृत्व के लिए पंजाब में यह स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं थी। पिछले दिनों शाह के दिल्ली आवास पर दोनों पार्टियों के नेताओं की बैठक हुई। उसमें शाह ने कहा कि जल्द से जल्द निचले स्तर पर तालमेल बनाया जाए। इसके बाद अब तक के इतिहास में पहली बार शिअद का सारा नेतृत्व भाजपा दफ्तर पहुंचा।
वहीं, दोनों पार्टियों के जिला प्रधानों की संयुक्त बैठक हुई। जिसमें फैसला लिया गया कि तत्काल दोनों जिला प्रधान मिल कर कोआर्डिनेशन कमेटियां बनाएंगे। भविष्य में सारे कार्यक्रम और पूरा चुनावी कैंपेन सांझे तौर पर ही चलाया जाएगा। हर हफ्ते कमेटी बैठक करके आगे की प्लानिंग करेगी। लेकिन अब तक कोई कैंपेन तो दूर कमेटियां तक नहीं बनीं।
शाह की बैठक में सांझे तौर पर 16 मार्च को सरकार के खिलाफ विश्वासघात दिवस मनाने का फैसला किया गया था, लेकिन इस कार्यक्रम में तालमेल की हवा निकल गई। यह कार्यक्रम शिअद का था, जिन्होंने हर हलके में इसे करना था। लेकिन भाजपा का प्रदेश नेतृत्व इस पर तैयार नहीं हुआ। आखिर में कार्यक्रम जिलों में हुआ, लेकिन उनमें भी शिअद का कैडर था, भाजपाइयों की मौजूदगी खास नहीं रही।
अपनी तीन सीटों पर फोकस
पंजाब इकाई के साथ अलग-अलग बैठकों में शाह और संगठन महामंत्री राम लाल ने कहा था कि सभी 13 सीटों पर तैयारी करें। बेशक भाजपा यहां तीन सीटों पर लड़ती है, लेकिन बाकी दस हलकों में भी पूरा जोर लगाएं। लेकिन भाजपा का फोकस सिर्फ अपनी तीन सीटों गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर पर ही दिख रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, निचले स्तर पर संगठन भी इन्हीं हलकों में बना है। बाकी दस सीटों पर खानापूर्ति की गई है। अमित शाह ने भी यहीं के शक्ति केंद्र प्रमुखों के साथ बैठक की थी। प्रदेश के नेताओं के दौरे और बैठकें भी यहीं हो रही हैं। हाल ही में गुरदासपुर, पठानकोट, बटाला, होशियारपुर में प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक ने बैठकें की हैं।
उम्मीद के मुताबिक नहीं हुए कार्यक्रम
भाजपा के कई कार्यक्रम उम्मीद के मुताबिक प्रभावशाली नहीं रहे, जो पार्टी के लिए चिंता का विषय है। विश्वासघात दिवस से पहले 17 मार्च को पार्टी के सबसे प्रमुख फ्रंटल संगठन युवा मोर्चा की फगवाड़ा में रैली थी। उसमें कैप्टन अभिमन्यु, श्वेत मलिक, विजय सांपला समेत सारा नेतृत्व मौजूद था। पूनम महाजन के आने की चर्चा थी, पर वह नहीं आईं। सभी बड़े नेताओं की मौजूदगी में कार्यक्रम उतना प्रभावशाली नहीं रहा, जितनी उम्मीद थी। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी का मेरा बूथ, सबसे मजबूत कार्यक्रम भी बहुत से जिलों में प्रभाव नहीं छोड़ सका था। वहीं, अमृतसर में अमित शाह की रैली में भीड़ न जुटने से नेतृत्व नाराज हुआ था।