हरियाणा के पांच बड़े राजनीतिक घरानों के लिए वर्तमान लोकसभा चुनाव करो या मरो से कम नहीं है। इस चुनाव में प्रदेश के तीन लाल ताऊ देवीलाल, बंसी लाल और भजन लाल के अलावा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के परिवार की सियासत दांव पर लगी हुई है। पांचों परिवारों के सामने विरासत की सियासत बचाने की बड़ी चुनौती है। ताऊ देवीलाल का परिवार भले ही दो अलग-अलग पार्टियों के बैनर तले चुनाव मैदान में हो, लेकिन राजनीति उनसे ही विरासत में मिली है।
देवीलाल की चौथी पीढ़ी से इनेलो के चुनाव चिह्न पर कुरुक्षेत्र के चुनावी रण में अभय सिंह चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला कूदे हैं। उनकी ही चौथी पीढ़ी के सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला जननायक जनता पार्टी के सिंबल पर चुनाव मैदान में हैं। कुरुक्षेत्र का चुनावी महाभारत अर्जुन चौटाला के लिए आसान नहीं है। यहां भाजपा ने राज्यमंत्री नायब सैनी को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। अर्जुन के सामने खुद को साबित करने के साथ ही इनेलो को जिंदा रखने की भी चुनौती है।
सांसद दुष्यंत चौटाला हिसार में बेहद कड़े मुकाबले में फंसे हुए हैं। यहां उनके सामने भजनलाल परिवार की तीसरी पीढ़ी से भव्य बिश्नोई और छोटू राम के नाती चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह। यहां से तीनों राजनीतिक परिवारों में से एक ही के सिर ताज सजेगा, बाकी दो परिवारों की पारिवारिक सियासत को फिलहाल विराम लगेगा। तीनों ही परिवार जीत हासिल करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। अगर ये पांचों परिवार इस बार चुनावी रण में ढेर हुए तो दिल्ली की सियासत में इनकेरुतबे पर असर पड़ना तय है।
बेटे बृजेंद्र के लिए तो चौधरी बीरेंद्र सिंह ने अपना राजनीतिक करियर भी दांव पर लगा दिया है। अग्निपरीक्षा तो नई नवेली जजपा के कर्णधारों दुष्यंत और दिग्विजय की भी है।