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लोकसभा चुनाव: हरियाणा में 5 राजनीतिक घरानों के सामने विरासत की सियासत के लिए करो या मरो

Thu, 25 Apr 2019 02:34 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा का संग्राम - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के पांच बड़े राजनीतिक घरानों के लिए वर्तमान लोकसभा चुनाव करो या मरो से कम नहीं है। इस चुनाव में प्रदेश के तीन लाल ताऊ देवीलाल, बंसी लाल और भजन लाल के अलावा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के परिवार की सियासत दांव पर लगी हुई है। पांचों परिवारों के सामने विरासत की सियासत बचाने की बड़ी चुनौती है। ताऊ देवीलाल का परिवार भले ही दो अलग-अलग पार्टियों के बैनर तले चुनाव मैदान में हो, लेकिन राजनीति उनसे ही विरासत में मिली है।
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देवीलाल की चौथी पीढ़ी से इनेलो के चुनाव चिह्न पर कुरुक्षेत्र के चुनावी रण में अभय सिंह चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला कूदे हैं। उनकी ही चौथी पीढ़ी के सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला जननायक जनता पार्टी के सिंबल पर चुनाव मैदान में हैं। कुरुक्षेत्र का चुनावी महाभारत अर्जुन चौटाला के लिए आसान नहीं है। यहां भाजपा ने राज्यमंत्री नायब सैनी को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। अर्जुन के सामने खुद को साबित करने के साथ ही इनेलो को जिंदा रखने की भी चुनौती है।

सांसद दुष्यंत चौटाला हिसार में बेहद कड़े मुकाबले में फंसे हुए हैं। यहां उनके सामने भजनलाल परिवार की तीसरी पीढ़ी से भव्य बिश्नोई और छोटू राम के नाती चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह। यहां से तीनों राजनीतिक परिवारों में से एक ही के सिर ताज सजेगा, बाकी दो परिवारों की पारिवारिक सियासत को फिलहाल विराम लगेगा। तीनों ही परिवार जीत हासिल करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। अगर ये पांचों परिवार इस बार चुनावी रण में ढेर हुए तो दिल्ली की सियासत में इनकेरुतबे पर असर पड़ना तय है।
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बेटे बृजेंद्र के लिए तो चौधरी बीरेंद्र सिंह ने अपना राजनीतिक करियर भी दांव पर लगा दिया है। अग्निपरीक्षा तो नई नवेली जजपा के कर्णधारों दुष्यंत और दिग्विजय की भी है।
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सोनीपत में दिग्विजय की राह पथरीली

इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला की सोनीपत में राह बेहद पथरीली है। यहां उनका मुकाबला पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और भाजपा सांसद रमेश कौशिक से है। दिग्विजय पर यहां से खुद को साबित करने का भारी दबाव है। जींद उपचुनाव में पहले भाजपा से मात खा चुके हैं। हालांकि उनकी ओपनिंग अच्छी रही और उन्होंने एआईसीसी मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था।

भूपेंद्र व दीपेंद्र को दिखाना होगा दम
लोकसभा के चुनावी रण में बाप-बेटा ताल ठोक रहे हैं। वह भूपेंद्र सिंह हुड्डा व उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा है। भूपेंद्र को राजनीति अपने पिता रणवीर हुड्डा से विरासत में मिली तो दीपेंद्र को पिता भूपेंद्र हुड्डा से। दोनों के सामने ही चुनौती विरासत की सियासत को बचाने की है। चूंकि, भाजपा इन्हें हराने में कोई कोर-कसर छोड़ने वाली नहीं। 2014 केचुनाव में तो दीपेंद्र हुड्डा ने विरासत की सियासत बचा ली थी।

श्रुति को बचाना होगा परिवार को गढ़
बंसी लाल परिवार से उनकी पोती श्रुति चौधरी मैदान में है। श्रुति 2009 में सांसद रह चुकी हैं, जबकि 2014 में हार गई थीं। अब 2019 में उन्हें फिर खुद को साबित करना होगा। भिवानी-महेंद्रगढ़ बंसीलाल परिवार का गढ़ रहा है।
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