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लोकसभा चुनाव 2019: दांव पर लगी पंजाब के पांच पार्टी प्रधानों की प्रतिष्ठा, तय होगा सियासी भविष्य

Thu, 25 Apr 2019 02:17 PM IST
खुशबू गोयल हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सुनील जाखड़
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पंजाब की 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव के लिए मैदान सज गया है और इस बार पांच सियासी दलों के प्रमुखों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सभी सियासी दलों ने अपने- अपने धुरंधरों को इस दावे के साथ मैदान में उतारा है कि उनके ही प्रत्याशी जीत हासिल करेंगे।
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खास बात यह भी है कि चुनाव परिणाम पांच सियासी दलों के प्रमुखों के सियासी भविष्य को भी तय करेंगे। ये पार्टी अध्यक्ष हैं- कांग्रेस के सुनील जाखड़, शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल, पीडीए के तहत पंजाब एकता पार्टी के सुखपाल सिंह खैरा, आम आदमी पार्टी के भगवंत मान और पंजाब अपना मंच के धर्मवीर गांधी।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ अपनी मौजूदा संसदीय सीट गुरदासपुर से एक बार फिर चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा के विनोद खन्ना की मृत्यु के बाद खाली हुई गुरदासपुर सीट पर पिछले साल हुए उपचुनाव में जाखड़ ने भाजपा के स्वर्ण सलारिया को हराया था। इस बार स्थितियां कुछ अलग हैं।

भाजपा ने इस सीट पर बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल को उतारा है, जबकि आम आदमी पार्टी की ओर से पीटर मसीह प्रत्याशी हैं। हालांकि देओल को टिकट दिए जाने से स्थानीय भाजपा नेताओं में नाराजगी है। दिवंगत विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है और उन्हें स्वर्ण सलारिया का समर्थन मिल रहा है।

कविता खन्ना का हलके के ग्रामीण इलाकों में अच्छा रसूख है। वहीं पीटर मसीह दलित और एक विशेष वर्ग के वोटरों तक पहुंच बना सकते हैं।

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रधान सुखबीर सिंह बादल को फिरोजपुर सीट से अपनी ही पार्टी के पूर्व टकसाली नेता शेर सिंह घुबाया से चुनौती मिल सकती है। वैसे यह सीट अकाली दल की सबसे सुरक्षित सीट रही है, जिस पर बीते 25 साल से अकाली दल ने ही जीत दर्ज की है।

कांग्रेस को कभी भी इस सीट पर जीत का मौका नहीं मिल सका है। अकाली दल में रहते हुए ही घुबाया इस सीट से लगातार दो बार सांसद रहे और वे कांग्रेस में भी इसी शर्त पर शामिल हुए थे कि पार्टी उन्हें फिरोजपुर से टिकट देगी। घुबाया राय सिख बिरादरी से हैं, जिसके मतदाताओं की संख्या इस सीट पर सबसे अधिक है।

यह बिरादरी अब तक अकाली दल के साथ रही है। देखना होगा कि प्रत्याशी के पाला बदलने से क्या बिरादरी भी पाला बदलेगी। अगर ऐसा हुआ तो अकाली दल का 25 साल के कब्जे का रिकार्ड टूट सकता है।

पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) के तहत पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने इस चुनाव में बठिंडा सीट पर दो बार से अकाली सांसद हरसिमरत कौर बादल को चुनौती दी है। 1997 से 2015 तक कांग्रेस में विभिन्न पदों पर रहे खैरा ने 2017 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर भुलत्थ से दूसरी बार जीत हासिल की।

आप ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी दिया, लेकिन केजरीवाल से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़कर पंजाब एकता पार्टी का गठन किया। हरसिमरत के मुकाबले खैरा कितने सफल होंगे, यह कहना संभव नहीं है। हालांकि कांग्रेस ने भी इस सीट से विधायक राजा वड़िंग के रूप में मजबूत प्रत्याशी खड़ा किया है। आम आदमी पार्टी ने इसी हलके से विधायक बलजिंदर कौर को मैदान में उतारा है।
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पंजाब आप के प्रधान और संगरूर से सांसद भगवंत मान एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। उन्हें मुख्य चुनौती कांग्रेस के केवल सिंह ढिल्लों से मिल रही है, जबकि अकाली दल ने इस सीट से पूर्व वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा को उतारा है।

भगवंत मान अपने घर-घर चुनाव अभियान के कारण हलके में पहचान बना चुके हैं, फिर भी बरनाला से विधायक रहे केवल ढिल्लों साधन संपन्न प्रत्याशी हैं, जो मतदाताओं तक बाकी बची अवधि में भी पहुंच बनाने में कामयाब हो सकते हैं। पंजाब अपना मंच के डा. धर्मवीर गांधी पटियाला में एक बार फिर कांग्रेस की परनीत कौर को चुनौती दे रहे हैं।

वहीं, अकाली दल ने सुरजीत सिंह रखड़ा और आम आदमी पार्टी ने नीना मित्तल को उतारा है। बीते चुनाव में धर्मवीर गांधी की पटियाला शहर से अलग नाभा और करीबी इलाकों में मतदाताओं में अच्छी पकड़ साबित हुई थी।
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