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पंजाब: फरीदकोट सीट पर विदेशों में बसे पंजाबियों की नजर, बरगाड़ी और बहिबल कांड का भी असर

Thu, 16 May 2019 01:22 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
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साधु सिंह
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बठिंडा, फिरोजपुर, गुरदासपुर बेशक हॉट सीट मानी जा रही हैं, लेकिन फरीदकोट पर भी हर किसी की नजर है। बरगाड़ी व बहिबल कलां इस लोकसभा सीट का हिस्सा हैं। इसकी गूंज विदेशों में भी सुनाई दे रही है। इसके कारण विश्व में बसे पंजाबी समुदाय के लोग इस सीट पर खासी दिलचस्पी ले रहे हैं। इस सीट से पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल भी सांसद रह चुके हैं। पहली बार 2014 में आप ने यहां से जीत हासिल कर पंजाब की रिवायती पार्टियों का किला ध्वस्त कर दिया था। वर्ष 1977 से लेकर 2004 तक यह हलका जनरल था।
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वर्ष 2009 में यह लोकसभा क्षेत्र आरक्षित कर दिया गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने इस पर बड़े अंतर से जीत हासिल कर इतिहास रच दिया। इस सीट पर ज्यादा बार अकाली दल का ही कब्जा रहा है। 1977 से 2004 तक के परिणाम को देखें तो 6 बार अकाली दल और कांग्रेस सिर्फ 2 जीत दर्ज कर सकी। फरीदकोट सीट का एक इतिहास यह भी है कि यहां से सुखबीर बादल चुनाव हार चुके हैं। बाद में सुखबीर सिंह बादल भी इसी हलके से 3 बार सांसद निर्वाचित हुए हैं।

इसी हलके से राज्य में अपनी सरकार होने के बावजूद सुखबीर बादल वर्ष 1999 में कांग्रेस के उम्मीदवार जगमीत बराड़ के हाथों मात खा गए थे। इस लोकसभा हलके में 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। फरीदकोट संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाले 9 विधानसभा हलकों में वर्ष 2017 में हुए विस चुनाव में 6 सीटें कांग्रेस और 3 सीटें आम आदमी पार्टी को मिली थीं। किसी समय अकाली दल का गढ़ रहे इस क्षेत्र में अकालियों को एक भी सीट नहीं मिली। इन चुनावों में अकाली वोटरों का झुकाव आम आदमी पार्टी की तरफ हुआ था।
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आप के उम्मीदवार साधू सिंह ने इस सीट को जीत लिया था। बरगाड़ी और बहिबलकलां बेअदबी व गोलीकांड मामलों का लोकसभा फरीदकोट पर सीधा प्रभाव है। इन मामलों को लेकर शिरोमणि अकाली दल ही कटघरे में है। इसी क्षेत्र में बरगाड़ी मोर्चा चलाया गया और छह माह से अधिक समय तक मोर्चा लगा। बेअदबी की घटनाओं के बाद कटघरे में खड़े शिअद को माझा क्षेत्र से गुरसिख उम्मीदवार लाना पड़ा है। पार्टी ने पूर्व मंत्री व एससी विंग के अध्यक्ष गुलजार सिंह रणीके को मैदान में उतारा गया है।

विधानसभा चुनाव हारे कांग्रेस के पूर्व विधायक मोहम्मद सद्दीक भी मैदान में है। आप से बागी विधायक मास्टर बलदेव सिंह पंजाब डैमोक्रेटिक अलायंस के उम्मीदवार हैं। मास्टर बलदेव सिंह के हाथों ही सद्दीक पिछला विधानसभा चुनाव हारे थे। आम आदमी पार्टी की ओर से इस हलके से लोकसभा चुनाव भारी अंतर से जीतने वाले प्रो. साधू सिंह दोबारा मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

 

कुल मतदाता- 15,35716
पुरूष-8,12141
महिला-7,23538
थर्ड जेंडर-37
सर्विस वोटर-6250

पहली बार करेंगे मतदान...
फरीदकोट में 18 से 19 साल के लगभग 27149 नौजवान वोटर पहली बार मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

9 विधानसभा हलके शामिल
- फरीदकोट
- कोटकपूरा
- जैतो
- मोगा
- बाघापुराना
- धर्मकोट
- निहाल सिंह वाला
- गिद्दड़बाहा
- रामपुरा फुल
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कांटे की टक्कर है चार महारथियों में...

मोहम्मद सदीक- कांग्रेस
मजबूती-लोक गायिका का बड़ा चेहरा होने के साथ साथ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के काफी करीबी है और उनकी बदौलत ही उन्हें टिकट मिल पाई है। क्षेत्र में कांग्रेस का अच्छा दबदबा है और संसदीय क्षेत्र में शामिल 9 विधानसभा क्षेत्रों में से छह पर कांग्रेस के विधायक है।
कमजोरी- संसदीय सीट पर उनकी निजी तौर पर कोई ज्यादा  पकड़ नहीं है। इसके अलावा संसदीय क्षेत्र में मजहबी सिख वर्ग की करीब 30 प्रतिशत से ज्यादा वोटें है और विरोधियों द्वारा कांग्रेस द्वारा मजहबी सिख वर्ग से उम्मीदवार खड़ा ना किए जाने का खूब प्रचार किया जा रहा है जबकि शिअद उम्मीदवार मजहबी सिख वर्ग से है।  

गुलजार सिंह रणीके-शिअद
मजबूती-राजनीतिक अनुभवी रणीके के पार्टी संगठन से जुड़ा होने के कारण वर्करों से अच्छी जान पहचान है और उनका क्षेत्र से सम्बंधित ना होने के चलते यहां के नेताओं से विवाद भी नहीं है। मजहबी सिख वर्ग का होने के चलते भाईचारे समर्थन मिल सकता है।  
कमजोरी-बरगाड़ी बेअदबी व गोलीकांड की घटनाओं के चलते पार्टी का विरोध हो रहा है और उनके माझा क्षेत्र का होने के चलते साधारण लोगों के लिए भी वह नया चेहरा है। पहले से क्षेत्र में सरगर्म विरोधी पार्टियों के उम्मीदवारों से सामना हो रहा है और उनकी सहयोगी पार्टी भाजपा का क्षेत्र में कोई बड़ा जनाधार नहीं है

प्रो.साधु सिंह -आप
मजबूती- साफ सुथरे अक्स व पढ़े लिखे होने के चलते ही पार्टी ने उनपर दोबारा विश्वास जताया है। विरोधी पार्टियों के नेताओं के साथ भी निजी तौर पर अच्छे संबंध है। बतौर सांसद उन्होंने सांसद निधि फंड के रूप में मिले 22.5 करोड़ की रकम को 100 प्रतिशत विकास पर खर्च करवाया है।
कमजोरी-आम आदमी पार्टी की व्यापक हवा के चलते सांसद बनने के बाद जनता के साथ कोई ज्यादा संपर्क नहीं रखा और सामाजिक कार्यक्रमों से भी दूरी बनाकर रखी। पार्टी में पैदा हुई गुटबंदी के कारण वर्करों के आभाव से भी जूझ रहे है।

मास्टर बलदेव सिंह-पीडीए
मजबूती- पीडीए में सीपीआई व बसपा जैसे कैडर बेस पार्टियों के शामिल होने के चलते चुनावी मुहिम को सफलता पूर्वक चला रहे है और साल 2017 में जैतो से विधानसभा चुनाव जीत चुके है। नई पार्टी और नया चेहरा होने की वजह से संगठन के तौर पर कोई विरोध नहीं है।
कमजोरी- जैतो को छोड़कर संसदीय सीट में शामिल बाकी 8 विधानसभा क्षेत्रों की आम जनता के साथ कोई संपर्क नहीं है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी से बगावत किए जाने के कारण उनको अपने विधानसभा क्षेत्र में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
 
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