लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भाजपा ने पंजाब की अमृतसर सीट से केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला से होगा। रविवार शाम को उनके नाम का औपचारिक एलान कर दिया गया। अमृतसर के लिए जो सबसे पहला नाम चला था, वह पुरी का ही था। पार्टी हाईकमान ने शायद काफी समय पहले ही पुरी को संकेत दे दिए थे। वह खुद भी काफी समय से अमृतसर को लेकर होमवर्क कर रहे थे।
अगर केंद्रीय राज्यमंत्री के तौर पर पुरी के पंजाब दौरे देखें, तो सबसे ज्यादा अमृतसर के ही थे। यहां तक कि पीएम नरेंद्र मोदी के विशेष अभियान के तहत पुरी एक बार अमृतसर के एक गांव में भी रात को ठहरे थे। पार्टी ने यह तय कर लिया था कि अमृतसर सीट के लिए किसी सेलेब्रिटी को राजी किया जाएगा। अगर बात नहीं बनी तो पुरी पर ही दांव खेला जाएगा।
इसके पीछे एक अहम वजह यह है कि एक जमाने में अमृतसर हिंदू सीट होती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों में बदलाव के बाद यहां सिख वोट ज्यादा हो गए हैं। कांग्रेस का उम्मीदवार सिख है। इसलिए पार्टी यहां से एक सिख चेहरा चाहती थी।
नवजोत सिद्धू हैट्रिक लगा चुके हैं अमृतसर से
दिल्ली में जन्मे हरदीप पुरी सिख होने के साथ-साथ अच्छी छवि और स्वभाव के मालिक हैं। पुरी 1974 बैच के आइएफएस अधिकारी रह चुके हैं। वह उत्तर प्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सदस्य होने के साथ-साथ केंद्रीय राज्य शहरी व विकास मंत्री है। अमृतसर लोकसभा सीट पर 1967 में यज्ञदत्त शर्मा ने भारतीय जनसंघ से चुनाव लड़ते हुए इस सीट पर भगवा फहराया।
1977 में जनता पार्टी से डा. बलदेव प्रकाश ने सीट भाजपा की झोली में डाली। उसके बाद लगातार पार्टी 5 बार सीट हारती रही। 1998 में दया सिंह सोढ़ी विजयी होने में सफल हुए, पर 1999 में फिर यह सीट कांग्रेस की झोली में चली गई। 2004 में भाजपा ने सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता रघुनंदन लाल भाटिया के खिलाफ नवजोत सिद्धू को मैदान में उतारा और वह विजयी रहे।
उसके बाद 2007 में और 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करते हुए सिद्धू ने हैट्रिक बनाई और इससे भाजपा की भी हैट्रिक बनी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के अरुण जेटली को अमृतसर में बड़ी हार झेलनी पड़ी। भाजपा ने जेटली को टिकट देते हुए नवजोत सिंह सिद्धू की टिकट काट दी थी। जेटली के मुकाबले कैप्टन अमरिंदर सिंह मैदान में उतरे और उन्होंने जेटली को 1,02,770 मतों से हराया।
हार का यह सिलसिला 2017 उपचुनाव में भी बरकरार रहा। कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला ने भाजपा के राजिंदर मोहन सिंह छीना को 1,99,189 बड़े अंतर से हराया था।
अमृतसर में गुटबाजी भी झेल रही है भाजपा
यही आंकड़े वजह रहे कि इस बार पार्टी फूंक-फूंककर कदम रख रही थी। ऐसा कोई प्रयोग नहीं करना चाहती थी कि पार्टी के लिए ओर विकट हालात अमृतसर लोकसभा सीट पर बने। वैसे भी भाजपा अमृतसर में जबरदस्त गुटबाजी से जूझ रही है। दोनों स्थानीय दावेदार अनिल जोशी और रजिंदर मोहन छीना में से किसी को भी टिकट देने का मतलब पार्टी में ही झगड़ा करा देना था।
इसलिए यह पहले ही तय हो गया था कि यहां से कोई बाहरी प्रत्याशी ही आएगा। क्योंकि बाहरी कैंडिडेट के आने पर सभी गुट उसके साथ चल पड़ेंगे। अब भी पार्टी को यही उम्मीद है। पुरी कोई बड़ा नाम नहीं हैं, लेकिन कम से कम उनके आने से पार्टी की गुटबाजी पर लगाम लगेगी। भाजपा को यह भी लग रहा है कि कांग्रेस का कैंडिडेट भी उतना कद्दावर नहीं है, उसका पार्टी में विरोध भी है, जो पुरी की राह आसान करेगा।
हालांकि स्थानीय वर्करों में पुरी को लेकर खास उत्साह नहीं दिखा। इसलिए भाजपाइयों के व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज चलते रहे कि उम्मीदवार कम से कम स्थानीय होना चाहिए था, चाहे किसी को भी दे देते।