लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट घोषणा में हो रही देरी ने कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। वे समझ ही नहीं पा रहे हैं कि प्रचार किसके लिए किया जाए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन और सांसद किरण खेर दोनों अपने गुटों के साथ अलग-अलग दिशा में प्रचार करने में जुटे हैं। प्रत्याशी के नाम का एलान नहीं होने से कार्यकर्ताओं की सक्रियता काफी कम नजर आ रही है।
आलम यह है कि बीते दिनों भाजपा के वीडियो रथ को हरी झंडी दिखाने के कार्यक्रम में भी भाजपा के तमाम नेता पहुंचे लेकिन पार्टी ऑफिस में कार्यकर्ता काफी कम ही नजर आए। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं की संख्या को देखते हुए पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने यहां तक कह दिया कि यह गुटबाजी का ही असर है, जिसकी वजह से पार्टी के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं से ज्यादा मीडियाकर्मी नजर आ रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल भाजपा के पार्षदों का भी है।
तीन गुट होने की वजह से कई पार्षद खुलकर किसी के समर्थन में नहीं आ रहे हैं। फिलहाल पर्दे के पीछे से ही पार्षद अपना समर्थन दिखा रहे हैं। कार्यकर्ता भी गुटबाजी से बचने के लिए घर बैठकर प्रत्याशी के नाम का एलान होने का इंतजार कर रहे हैं। सामूहिक प्रचार में भाजपा काफी दूर नजर आ रही है। दूसरी ओर कांग्रेस, आप व कैप के प्रत्याशी प्रचार में जोरशोर से जुटे हुए हैं।
दूसरे गुट के कार्यक्रम में जाने पर आ रहे फोन
भाजपा के कार्यकर्ता इस समय एक अजीब हालात से गुजर रहे हैं। किसी एक दावेदार के लिए कार्यक्रम आयोजित कराने पर पार्टी के ही दूसरे नेता का फोन आ जाता है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को समझ नहीं आ रहा कि ऐसे हालात में वह क्या करें। नाम न छापने की शर्त पर भाजपा के एक नेता ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने अपने क्षेत्र में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन के लिए चाय पर चर्चा कार्यक्रम का आयोजन कराया। अगले ही दिन सांसद किरण खेर के किसी करीबी का उनके पास फोन आ गया। कुछ ऐसे ही हालातों से पार्टी के कई कार्यकर्ता गुजर रहे हैं।
कांग्रेस, आप व कैप डोर-टू-डोर कैपेंन में जुटे
भाजपा के कार्यकर्ता भले अपने प्रत्याशी के इंतजार में हैं लेकिन कांग्रेस व अन्य पार्टियों के कार्यकर्ता डोर-टू-डोर कैपेनिंग में जुटे हुए हैं। कांग्रेस के उम्मीदवार पवन बंसल ने प्रचार के लिए टीमें बांट दी हैं, जो शहर के विभिन्न हिस्सों में जाकर रोजाना एक टारगेट के तहत प्रचार में लगे हैं।
वहीं आम आदमी पार्टी और चंडीगढ़ की आवाज पार्टी के कार्यकर्ता कालोनियों के लोगों को साधने में जुटे हैं। चंडीगढ़ में लोकसभा चुनाव आखिरी चरण में होने हैं। सभी दल अपने-अपने प्रत्याशी को मैदान में उतार चुके हैं। वर्तमान सांसद किरण खेर टिकट पक्का मानकर चल रही हैं, लेकिन टिकट की घोषणा में लगातार हो रही देरी ने इस खेमे की बेचैनी भी बढ़ा दी है।