अपना वोट बैंक मजबूत करने को नेताओं ने वादे तो खूब किए, लेकिन वे धरातल पर कुछ नहीं कर पाए। इसके पीछे बड़ा कारण आपसी खींचतान रहा, जिसका शिकार जनता होती रही। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि लोकसभा चुनाव 2019 में वे जनता के बीच कैसे जाएंगे और क्या उपलब्धि गिनाएंगे।
पांच साल के कार्यकाल में भाजपा सांसद रतन लाल कटारिया ने एक भी ऐसा मील का पत्थर नहीं रखा, जिसे बताकर वोट मांग सकें। जबकि वे इससे पहले भी एक बार इस सीट से सांसद रह चुके हैं। लेकिन वे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट को भी साकार करने में सफल नहीं हो सके। वहीं सांसद रतन लाल कटारिया के संबंध मुख्यमंत्री मनोहर लाल से अच्छे हैं।
यही कारण है कि भाजपा ने तीसरी बार उन पर विश्वास जताया है। सांसद रतन लाल कटारिया ने पिछले लोकसभा चुनाव में जनता से वादा किया था कि वह चंडीगढ़ और यमुनानगर के बीच रेल ट्रैक बिछवाएंगे। यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है, लेकिन इस प्रोजेक्ट की आज तक फाइल नहीं बन पाई। हालांकि भाजपा ने नेशनल हाईवे-73 का निर्माण करवाकर जनता को बड़ी राहत दी है।
सांसद कटारिया के पास 2014 के लोकसभा चुनाव में भी गिनाने के लिए कोई बड़ी उपलब्धि नहीं थी। इसके बाद भी उन्होंने जीत हासिल की थी। पिछले चुनाव में मोदी का मैजिक चला था और उन्हें मोदी के नाम पर ही वोट मिले थे।
सबसे बड़ा मुद्दा एचएमटी
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा एचएमटी को न बचा पाना रहेगा। भले ही मुख्यमंत्री ने यहां मंडी के निर्माण की घोषणा कर दी है और इस प्रोजेक्ट पर काम भी चल रहा है, लेकिन कालका-पिंजौर के लोग सरकार के इस फैसले से खुश नहीं हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टी के नेताओं ने उनके साथ विश्वासघात किया है। सबसे पहले यह वादा किया गया था कि एनआईएफटी पिंजौर में खुलेगा, लेकिन इस प्रोजेक्ट को पंचकूला में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी निर्माणाधीन है।
10 साल का कार्यकाल फिर भी जनता की झोली खाली
वहीं, यदि बात कांग्रेस की करें तो अंबाला लोकसभा सीट से कुमारी सैलजा दो बार सांसद रह चुकी हैं। सोनिया गांधी के काफी करीब होने के बाद भी वह कोई बड़ा प्रोजेक्ट लगाने में सफल नहीं हो पाईं। इतना ही नहीं कुमारी सैलजा के पिता भी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं और उनके रिश्ते भी पार्टी हाईकमान से बहुत अच्छे रहे हैं।
यहां के लोगों का कहना है कि दस साल का कार्यकाल कम नहीं होता है। लेकिन दोनों पार्टी के नेताओं ने वोट के लिए उन्हें गुमराह करने के सिवाय कुछ नहीं दिया। यदि बात कांग्रेस के विधायक डीके बंसल की करें तो उन्हें कुमारी सैलजा ने ही प्रमोट किया था, लेकिन कुछ देर बाद ही उन्होंने सैलजा से दूरी बना ली थी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट में शामिल हो गए थे। इसका खामियजा भी जनता को भुगतना पड़ा था।