नेता जी को अपने घर पर बुलाकर उनका स्वागत करते हुए उन्हें चाय पिलाना समर्थकों को महंगा पड़ सकता है। चुनाव प्रचार के दौरान यदि नेता जी किसी समर्थक के बुलाने पर उसके घर या सेक्टर में मीटिंग करने जाते हैं तो उनके स्वागत में आने वाले फूल, माला, चाय, समोसे का खर्च प्रत्याशी के चुनावी खर्चे में जोड़ दिया जाएगा।
हालांकि, इस बार प्रत्याशियों को ज्यादा खर्च करने का मौका मिलेगा, लेकिन भारी भी पड़ सकता है। नामांकन के बाद चुनाव प्रचार खत्म होने तक उम्मीदवार 53 लाख रुपये तक खर्च कर सकेगा, जो पिछली बार से करीब 40 फीसदी अधिक है। चुनाव अधिकारी ने चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम और किराया तय कर दिया है।
इसके साथ ही कुछ ऐसे दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके उल्लंघन को लेकर उम्मीदवारों पर सख्ती बरती जा सकती है। चुनाव अधिकारी ने यह भी साफ किया है कि नामांकन करने के दिन से ही चुनावी खर्च गिना जाएगा। नामांकन से पहले किए गए खर्च का पार्टी को ब्योरा देना होगा।
चुनाव आयोग की ओर से यह भी साफ कर दिया गया है कि यदि कोई स्टार प्रचारक किसी प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार करने आता है तो उसका खर्च उम्मीदवार के चुनावी खर्चे में नहीं जुड़ेगा। यदि वह कहीं से उम्मीदवार है और यहां चुनाव प्रचार करने आया है तो वह खर्च उसके चुनावी खर्च में जुड़ जाएगा। चंडीगढ़ एक वीआईपी संसदीय सीट है। यहां पर प्रचार के लिए कोई न कोई वीआईपी जरूर आता है। ऐसे में चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि स्टार प्रचारक यहां आते हैं तो उनके रुकने, खाने पीने का खर्च चुनावी खर्च में नहीं जुड़ेगा।
कांग्रेस की हमेशा से सोच रही है कि चुनाव साफ सुथरा हो। यदि किसी ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया तो पार्टी उसकी आपत्ति जरूर दर्ज कराएगी। हम इस पर नजर रख रहे हैं।
- सुभाष चावला, पूर्व मेयर कांग्रेस
हमारी मंशा झाड़ू बांटने की नहीं है। झाड़ू तो गंदगी को बाहर निकालने के लिए है। हमने अपनी एक राय रखी थी। झाड़ू तो हर घर में होती है। यह तो पार्टी का चुनाव चिह्न है।
- कौशल सिंह, संस्थापक सदस्य आप